चाहिए है समझना बराबर

प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली भोपाल(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** (रचनाशिल्प:वज़्न-१२२-१२२-१२२-१२२-१२२-१२२-१२२-१२२-फऊलुन×८) बड़ी बात ये है कि फुटपाथ में जो उन्हें चाहिए है समझना बराबर। तक़ाजा यही हो न उनसे हिक़ारत लगाएं भी दिल से ज़मीं से उठाकर। जो मुमकिन नहीं वो करें हर्ज़ क्या है रिवायत पुरानी जो मर सी चुकी हैं, हटा दें उन्हें यूँ नहीं फायदा कुछ जो … Read more

मुहब्बत

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** (रचनाशिल्प:१२२ १२२ १२२ १२२)  मुहब्बत मुहब्बत मुहब्बत हमारी, सलामत रहे प्यार चाहत हमारी। नहीं ख़्वाब कोई नहीं चाह कोई, नहीं कोई तुझसे शिकायत हमारी। नहीं फूल गुलशन,नहीं चाँद-तारे, नहीं झूठ कहने की आदत हमारी। लिखेगा जमाना फ़साना हमारा, बनेगी कहानी ये उल्फ़त हमारी। प्रियम की मुहब्बत तुम्हारी जवानी, दिलों … Read more

आख़िर किस लिए

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) ********************************************************************  हो गया नाकाम आख़िर किस लिए, अम्न का पैग़ाम आख़िर किस लिए। क्या यही है सच बयानी का सिला, उफ़! ये क़त्लेआम आख़िर किस लिए। ख़ौफ़ से तेरे न सच बोला कोई, फ़िर मचा कोहराम आख़िर किस लिए। दल बदल कर दल सभी दल-दल हुए, वोट दे … Read more

बालमन

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** जोश सब में भरे बालमन। शाद दिल को करे बालमन। खौफ रखता परे बालमन। कब किसी से डरे बालमन। प्रेम की जब हवा आ लगे, फूल जैसा झरे बालमन। प्रेम का खाद पानी मिले, खूब जमकर फरे बालमन। ठान ले बात कोई अगर, फिर न टारे टरे … Read more

सुर्ख़ियाँ बनने लगीं

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* दूरियाँ घटने लगीं हैं, साज़िशें बढ़ने लगीं हैं। डालनी हैं बेड़ियाँ फिर, बंदिशें हटने लगीं हैं। आसमाँ खुश हो गया अब, बदलियाँ छँटने लगी हैं। बोलना होगा मुझे ही, चुप्पियाँ कहने लगीं हैं। कह दिया जो मैंने सच तो, त्योरियां चढ़ने लगीं हैं। आ रहा क़ातिल इधर ही, तालियाँ बजने लगीं … Read more

मैंने जिसको कहा पराया है

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** मैंने जिसको कहा पराया है, पहले दुख में वही तो आया है। हर किसी शय में दिख रहा है वो, जैसे आँखों में ही समाया है। फिर नुमायाँ है दिल के आँगन में, रोज़ मैंने जिसे भुलाया है। मुझको नादान कह रहा है वो, मैंने चलना जिसे सिखाया है। … Read more

खुदा से मांगी

डाॅ. मधुकर राव लारोकर ‘मधुर’  नागपुर(महाराष्ट्र) ************************************************************************* खुदा से मांगी दुआ तेरी सलामती की,कई दफ़ा। तेरे इकरार से,रहे महरूम तेरा इंकार भी,नज़र नहीं आता। ज़माने ने दिए,गम बहुत ठोकर भी खाई,बेपनाह। फ़कत शिकवा,रहा यही बुत-ए-काफ़िर,नज़र नहीं आता। ऐतबार करें भी तो किसपे कोई यार,मिला न हमराज। खुलुसे-ए-पल,मिले कैसे महबूब कोई,नज़र नहीं आता। माना मुहब्बत,नहीं है … Read more

मुनासिब है

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) ********************************************************************  साहिल की अहमियत को मझधार मुनासिब है, मझधार में हिम्मत की पतवार मुनासिब है। ख़ुशबू के लिए मसला जाता हो अगर गुल को, गुल के लिए गुलशन में ये ख़ार मुनासिब है। है सब्र बड़ी नेमत तस्लीम मुझे लेकिन, गर आन पे बन आए हुंकार मुनासिब है। … Read more

साँस तू अब संभलना छोड़ दे

गोविन्द राकेश दलसिंहसराय (बिहार) *************************************************************** साँस तू अब संभलना छोड़ दे, दिल मेरा तू भी घड़कना छोड़ दे। बाग़ में अब फूल खिलते ही नहीं, फिर तो ऐ तितली मचलना छोड़ दे। रोशनी दिखती नहीं अब चार सू, घर से अब बाहर निकलना छोड़ दे। क्या पता वो सच ही बोले अब यहाँ, झूठ के … Read more

हम भीड़ से बचते रहे

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* (रचनाशिल्प:२२१२ २२१२) उनसे नहीं रिश्ते रहे, चुपचाप बस घुटते रहेl दुश्वारियाँ तो थीं मगर, बिंदास हम बढ़ते रहेl बेफ़िक्र मुझको देखकर, बाजू में सब चिढ़ते रहेl पत्थर लिये थे हाथ सब, हम भीड़ से बचते रहेl क्यों दुश्मनों को दोष दें, जब दोस्त ही लड़ते रहेl हँसने को थे मजबूर हम, … Read more