चुनावी जाल

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** रचना शिल्प:काफ़िया-आज़,रदीफ़- मैं लिख दूँ सियासी खेल के हर शख्स का राज़ मैं लिख दूँ, बदलते देश के हालात पर अल्फ़ाज़ मैं लिख दूँ। कभी आया नहीं बरसों, कभी ना हाल ही पूछा, अभी पैरों पे गिरने का, नया अंदाज़ मैं लिख दूँ। सियासत खेल सत्ता का, यहाँ कोई … Read more

झूठी दुनिया

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** चुनौतियां बन गया तुम्हारा तिरस्कार, झूठी दुनिया और अपना घर परिवार। देखो भौंक रही हैं मेरी समस्त गज़लें, और अक्षर बन गए तेज धार तलवार। मुझे शिक्षा दे रहे शराबी और जुआरी, एवं चुपचाप तमाशा देख रही सरकार। लोकतंत्र में मात्र मतदाता पूजे जाते हैं, जिस कारण … Read more

सहज बुनियाद हिलती है

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** (रचना शिल्प:१२२२ १२२२ १२२२ १२२२) कठिन श्रम से सफलता शीघ्र सबको हाथ लगती है, लगाओ जोर दम भरके,सहज बुनियाद हिलती है। कमाओ लाख धन चाहे,महल मोटर बनाओ तुम, न दे ये काम, जीवन की कभी जब शाम ढलती है। निकट जब बाल बच्चे हों,मजा तब नौकरी में है, अगर … Read more

प्राण न्योछावर कर दे

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** थक चुका हूँं भारी प्रहार न कर। काट दे गर्दन तू इन्तजार न कर। मेरे अपने भी अपने ना हुए यहां, रणभूमि है प्रेम का इजहार न कर। रक्त बहता युद्धों में मालूम सबको, शत्रु छोड़कर व्यर्थ उद्धार न कर। बोलती बंद कर दे तिरंगा ऊंचा कर, … Read more

सच छुपाऊं कैसे

ललित प्रताप सिंह बसंतपुर (उत्तरप्रदेश) ************************************************ अपने विचार मैं सबको बताऊं कैसे, मन में क्या है सबको सुनाऊं कैसेl हरदम किया है प्रयास हँसाने का, अब हँसते हुए को रूलाऊं कैसेl बात-बात पर भड़कते हैं लोग, अब उन्हें भड़कने से बचाऊं कैसेl कुछ ही हो पायी है बातें अपनी, अब इन बातों को मैं भुलाऊं … Read more

ज़िंदगानी दर्द की

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’  छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) ********************************************************************************************* इक मुकम्मल दास्तां है ज़िंदगानी दर्द की। मुस्कुराते लब के पीछे है निशानी दर्द कीl ठोकरों के बीज बो कर सींचती है अश्क से, ग़म की फसलें सब्ज़ करती बागबानी दर्द कीl गंगा यमुना में मिलाते कारखानों का ज़हर, अब नदी का ये सफ़र भी है रवानी … Read more

चलो करें,मतदान रे भइया

ऋषभ तोमर ‘राधे’ मुरैना(मध्यप्रदेश) ****************************************************** निज अधिकार समझ के अपने मत का कर लें दान, रे भइया चलो करें मतदान,रे भइया चलो करें मतदानl पाँच वर्ष पश्चात मिला है हम सबको फिर से मौका, लोकतंत्र के महापर्व में क्यों तुम सब अनजानl बहना भाई चाची ताई दादा-दादी सब सुन लो, अबकी बढ़-चढ़ के करना है … Read more

माँ का नूर हो जाओ

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** चलो हटो तुम मेरी नजरों से दूर हो जाओ। फिर औकात में रहो या मगरूर हो जाओ। मेरी हस्ती मिटाने वालों सोचो समझो जरा, मुझे मिटाने हेतु ना कहीं चूर-चूर हो जाओ। तुम्हारी यातनाओं की आग में बहुत जला, अब अमृत बनो या क्रूर से क्रूर हो … Read more

कोई शिकवा नहीं ज़माने से

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** यार उसने मुझे सताया है, मैंने दिल में जिसे बिठाया हैl उसका हँसना सुकून देता क्यूँ, रोज जिसने मुझे रुलाया हैl दूर जायेगा मेरी नज़रों से, वह जो इतने करीब आया हैl कोई शिकवा नहीं ज़माने से, चोट खाता हूँ,चोट खाया हैl याद जिसकी रुला रही है मुझे, कैसे … Read more

बताओ माँ,मेरे दामन में हिस्से क्यों नहीं आते ?

शैलेश गोंड’विकास मिर्ज़ापुरी’ बनारस (उत्तर प्रदेश) ************************************************************************ खुदी चलकर बहाने से ये रस्ते क्यों नहीं आते। घरानों से मिरी बेटी को रिश्ते क्यों नहीं आतेl पराई थीं,पराई हूँ,पराई ही,रहूँगी मैं, बताओ माँ,मेरे दामन में हिस्से क्यों नहीं आते। मुझे तालीम लेने की बड़ी हसरत ज़िगर में है, मग़र चालीस रुपये में ये बस्ते क्यों नहीं … Read more