कंटक पथ में मानुष बनता

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* कंटक पथ में मानुष बनता,कैसे मैं बढ़ पाऊँगी।पंख कतर कर रखते बोलो,कैसे मैं मुस्काऊँगी॥ निर्मल मन से स्वप्न सँजोए,इस धरती पर आती हूँ,सीमाओं का बंधन मन में,देख बहुत डर जाती हूँ।नन्हीं-सी बाला हूँ मैं तो,कैसे मैं समझाऊँगी,कंटक पथ में मानुष बनता,कैसे मैं बढ़ पाऊँगी…॥ करवट लेती उम्र नवलता,कहते सब मैं नारी … Read more

सद्गुरु ही परमब्रह्म

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ************************************************ रचना शिल्प:गगनांगना छंद पर आधारित श्री सद्गुरु ही परमब्रह्म है,गुरु भगवान है।गुरु की कृपादृष्टि से मिलता,जग सम्मान है॥ बिन गुरु के सद्ज्ञान न मिलता,जग पहचान है।श्रीगुरु से अज्ञान मिटे है,बढ़ता मान है॥सत् की राह दिखाता है गुरु,मिलता ज्ञान है।गुरु की कृपादृष्टि से मिलता,जग सम्मान है…॥ श्री सद्गुरु ही परमब्रह्म है,गुरु भगवान … Read more

कोरोना का दंश…

नरेंद्र श्रीवास्तवगाडरवारा( मध्यप्रदेश)**************************************** कोरोना का दंश गजब का,काँप रहा है जग सारा।सुबह-शाम तक सूरज सिर पे,फिर भी लगता अँधियारा॥ हर पल काँटे से चुभते हैं,आँखों से आँसू झरते।सिसक-सिसक कर साँसें चलतीं,तिल-तिल कर जीते-मरते।नीरसता सब ओर दिखे है,बुझा-बुझा मन बेचारा,सुबह-शाम तक सूरज सिर पे,फिर भी लगता अँधियारा…॥ जो घर में,परिवार साथ में,स्वस्थ,सुखी,किस्मत वाले।देख सुकूँ मिलता है … Read more

सेवा में सद्भाव समाहित

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ********************************** सेवा में सद्भाव समाहित,कर्मों का सम्मान है।सेवा से जीवन की शोभा,मिलता नित यशगान है॥ दीन-दुखी के अश्रु पोंछकर,जो देता है सम्बलपेट है भूखा,तो दे रोटी,दे सर्दी में कम्बल।अंतर्मन में है करुणा तो,मानव गुण की खान है,सेवा से जीवन की शोभा,मिलता नित यशगान है…॥ धन-दौलत मत करो इकट्ठा,कुछ नहिं पाओगेजब आएगा … Read more

मानव हूँ

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* मैं मानव हूँ स्वार्थ धरें नित,करता काम।कभी न सोचूँ अहित काज का,निज अंजाम॥ लोभ मोह में फँसता जाता,मैं अज्ञान,दीन-दुखी को बहुत सताया,बन अनजान।पीछे मुड़कर पीर न देखी,बढ़ता नाम,मैं मानव हूँ स्वार्थ धरें नित,करता काम…॥ चले नहीं जोर अमीरों पर,डरता खूब,लख गरीब कर्जे में अक्सर,जाते डूब।नहीं आंकलन किया स्वेद का,देता दाम,मैं मानव … Read more

अधर धरो घनश्याम…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** बनाके बंशी अधर धरो घनश्याम।घनश्याम…घनश्याम…बनाके बंशी अधर धरो घनश्याम॥ जब फेरोगे कोमल कर तुम,सुर दूँगी अविराम…अधर धरो घनश्याम।बनाके बंशी अधर धरो घनश्याम…॥ देखूँगी मोहक सूरत को,मोहन आठूँ याम…अधर धरो घनश्याम।बनाके बंशी अधर धरो घनश्याम…॥ साथ-साथ जायें वृंदावन,साथ-साथ विश्राम…अधर धरो घनश्याम…।बनाके बंशी अधर धरो घनश्याम…॥ यमुना तट जब धेनु चरावें,लोगे कर में थाम…अधर … Read more

कुलबुलाहट

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *************************************** कोरोना ने उजाड़ दिया है चमन।क्या से क्या हो गया है मेरा वतन॥ रिश्ते सारे बिखर गए,अपने दूर हुए,मेल-मिलाप ख़त्म हुआ,सब मजबूर हुए।ऐसा चलेगा कब तक,यही सोच घबराहट है,सच में,दिल में यही एक कुलबुलाहट है॥ विद्या मंदिर सुनसान पड़े हैं,सब मोबाइल,लैपटॉप के सामने अड़े हैं।पुस्तकालय सारे कर रहे हैं विलाप,सुख-दुख … Read more

सीख बाँटता तू अज्ञान

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* स्वार्थ बसाकर सीख बाँटता,तू अज्ञान।द्वेष कपट रखकर कहता है,तू भगवान॥ दीन दुखी को बहुत सताया,करके लूट,बुरे कर्म पर चलने की क्या,तुझको छूट। गर नहिं सँभला तो पहुँचेगा,तू शमशान,स्वार्थ बसाकर सीख बाँटता,तू अज्ञान…॥ राजनीति में सत्ता पाकर,भूला हाल,लोभ मोह में कष्ट बाँटता,तेरी चाल। पीर देखकर मुख मोड़े है,बन अनजान,स्वार्थ बसाकर सीख बाँटता,तू … Read more

करुण कहानी…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** जिसके बल से भवन निराले,जिसके बल से है खाना।जिसके स्वेद कणों के बल पर,पर अधरों पर हो गाना॥ जिसका तप ही बंजर भू पर,लाता है नित हरियाली।जिसका श्रम ही तो हम सबके,जीवन का भी है माली॥ कभी न मिल पाती रोटी तो,कभी न मिलता पानी है।मजदूरों की सदा-सदा से,बस ये करुण कहानी … Read more

परिवार छॉंव है बरगद की

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* घर-परिवार स्पर्धा विशेष…… परिवार छॉंव है बरगद की,सुख सपनों के डेरे हैं।ये घोर निशा में दीपक है,पावन मधुर सबेरे हैं। घर-आँगन तुलसी महके,उलझे रिश्तों को सुलझाता है,लाख मुश्किलें आने पर,परिवार धीर बंधाता है।ममता की छाया मिले,मिट जाये घोर अंधेरे हैं,परिवार छॉंव है… हर दिन खुशियों वाला होता,रोज मनती दिवाली है,रात हुई उम्मीदों … Read more