नहीं दु:ख की घड़ी रहती
हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** घर-परिवार स्पर्धा विशेष…… रचनाशिल्प:१२२२ १२२२ १२२२ १२२२मुहब्बत से सजा रहता जो घर-परिवार जीवन का,उसी में हर खुशी रहती।नहीं दु:ख की घड़ी रहती। पिता,माता,बहन,भाई,सभी रहते हैं मिल-जुल के,यहीं तो हर खुशी रहती।नहीं दु:ख की घड़ी रहती,मुहब्बत से सजा रहता…॥ दरो-दीवार में कितनी मुहब्बत की महक रहती,बड़े-छोटे सभी रहते,खुशी की हर … Read more