नहीं दु:ख की घड़ी रहती

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** घर-परिवार स्पर्धा विशेष…… रचनाशिल्प:१२२२ १२२२ १२२२ १२२२मुहब्बत से सजा रहता जो घर-परिवार जीवन का,उसी में हर खुशी रहती।नहीं दु:ख की घड़ी रहती। पिता,माता,बहन,भाई,सभी रहते हैं मिल-जुल के,यहीं तो हर खुशी रहती।नहीं दु:ख की घड़ी रहती,मुहब्बत से सजा रहता…॥ दरो-दीवार में कितनी मुहब्बत की महक रहती,बड़े-छोटे सभी रहते,खुशी की हर … Read more

जीवन

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ************************************************ रचनाशिल्प:चौपाई आधारित १६-१६ मात्रा तू ही जग का भाग्य विधाता।जीवन की रक्षा कर दाता॥ तेरी महिमा अनंत भगवन।तू ही छिपा हुआ अंतर्मन॥आज हरो दु:ख जग संजाता।जीवन की रक्षा कर दाता॥ दयावान तू ही है कर्ता।तू ही धर्ता तू ही भर्ता॥करुणामय तू ही निर्माता।जीवन की रक्षा कर दाता॥ तू निर्मोही निर्विकार तू।सखा … Read more

परिजन से ही ‘विजयश्री’

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************************* घर-परिवार स्पर्धा विशेष…… कितना पावन,सुखद-सुहावन,मेरा घर-परिवार है।हिम्मत,ताक़त और हौंसला मेरा संसार है॥ सुख-दुख के साथी परिजन हैं,मिलकर बढ़ते जातेहर मुश्किल,बाधा,पीड़ा से,मिलकर लड़ते जाते हैं।मात-पिता,बहना-भाई से,खुशियों का आसार है,कितना पावन,सुखद-सुहावन,मेरा घर-परिवार है॥ हिल-मिलकर हम सारे रहते,प्यार असीमित बहताघर तो है मंदिर के जैसा,आकर ईश्वर रहता।पत्नी,बच्चे बल हैं मेरा,इनसे ही उजियार है,कितना … Read more

कर्तव्य

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** कर्तव्य पथ पर चल पड़ा जो,आँधियों से कब डरा है।पथ में असीमित शैल होंगे,उर सदा माधव भरा है॥ मधु हास भरकर बाँह अपनी,मंजिलें नित खोलती हैं।शूलों हटो तुम राह से ये,पाँखुड़ी ही बोलती हैं॥ यूँ देख उसके साहसों को,यामिनी छुपती विभा में।उसकी विजय के गीत बजते,सदा गुणियों की सभा में॥ पराभव ने … Read more

काटे अत्याचार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ************************************************** कलम बने तलवार तभी तो बिगड़ी बात बनेगी।काटे अत्याचार कलम,तब वह सौगात बनेगी॥ कलम वही जो झूठ,कपट पर नित हो भारी,जहाँ दिखे कोई विकार तत्क्षण भिड़ जायेआम आदमी की ख़ातिर,उजियारा बाँटे,शाहों का भी भय तजकर,ज़िद पर अड़ जायेरखे कलम ईमान तभी तो झिलमिल रात सजेगी।काटे अत्याचार कलम,तब वह सौगात बनेगी…॥ … Read more

चंदन करोगे…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** तुम लक्ष का संधान कर लो,उसका तब भेदन करोगे।उर में भावों को जगा लो,उनको फिर चंदन करोगे॥तुम लक्ष का संधान कर लो… पथ दिखाने वाले जग में,मिलते हैं निज भाग्य से ही।पहले गुरु को खोज तो लो,उनका फिर वंदन करोगे॥तुम लक्ष का संधान कर लो… अरे जो कभी अपने न थे,उनको अपना … Read more

लोग पत्थर के हुए

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* कूप अब पाताल में ईमान के गरके हुए हैं।गीत बोलो क्या सुनाऊँ,लोग पत्थर के हुए हैं। निर्भया को न्याय मिलने में लगे थे साल कितने,राम तंबू में फँसे थे फट गए त्रिपाल कितने।तीन लोकों के विधाता अब कहीं घर के हुए हैं,गीत बोलो क्या सुनाऊँ,…॥ चोर-डाकू फिर रहे रघुवंश का चोला … Read more

कुदरत के करिश्मे

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** हर दौर बदल कर भी जीवन न मिटा पाया।कोरोना भला कैसे ये ख्वाब सजा लाया। जीवन का विरोधी बन खुद मिटने चला आया,कुदरत के करिश्मे ये पहचान नहीं पाया।हर दौर बदल कर भी… जीवन तो सभी का इक ख्वाहिश का सिला होता,हिम्मत है खुदी इसकी जिस पर ये टिका … Read more

भूचालों की बुनियादों पर

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* भूचालों की बुनियादों पर,बना रखा है घर।स्वप्न सलोने बुनती हूँ मैं,आशा है सुंदर॥ अनजानों से रिश्तें कहते,सभी पराये हैं,पर अपने निज रिश्ते मानें,काम न आए हैं।पग-पग छल पीछे घूमे है,देख लगे है डर,भूचालों की बुनियादों पर,बना रखा है घर…॥ छलते सारे अपने देखो,पीड़ा है ज्यादा,छुरी चले आभास न होता,कैसा फिर वादा।ठगी … Read more

कठिन क्षण

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* कठिन परीक्षा का क्षण हिंदुस्तान का।ख़तरे में जीवन आया इंसान का॥ तुच्छ नहीं यह बात बड़ी है,घर के बाहर मौत खड़ी है,लड़ना होगा युद्ध सभी को,कोरोना से जंग छिड़ी है।निकला आज जनाजा सकल जहान का,कठिन परीक्षा का क्षण…॥ बात हमारी मानो भाई,बंद करो सब आवाजाई,प्राण गवां दोगे भगदड़ में,रोयें मैया चाची … Read more