जल,वायु से सजतीं बहारें

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** रचना शिल्प:२२२ २२२ १२२ जल,वायु से सजतीं बहारें,धरती में इनसे ही नजारे।मधुरम बनके धरती गगन को,बूंदों की चाहत में निहारे॥जल,वायु से… बूंदें,बादल देता धरा को,बिन बूंदों के सूखी धरा हो।कैसे फिर सज पाए धरा ये,मिलती ही न इसको कदर तो,कैसे सज पाएंगी बहारें।जल,वायु से… सूखीं नदियां,वन-वृक्ष कटते,झुलसें पर्वत,हिम भी … Read more

मजदूर हूँ मैं

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* श्रमिक दिवस विशेष…. मेहनतकश मजदूर हूँ मैं,सकल देश की शान।हाथों में हिम्मत है मेरे,यह मेरा अभिमान॥ देख भवन जो आज खड़ा है, मेरा है उपकार,खून पसीना खूब बहाया,किया देश उद्धार।देश करे है उन्नति मुझसे,श्रम करूँ मैं दान,मेहनतकश मजदूर हूँ मैं,सकल देश की शान…॥ अस्पताल की नींव रखी है,खूब बनाया स्कूल,श्रम करूँ … Read more

देश के जवान

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** भारत के वीर जवानों ने अपना हर फ़र्ज़ निभाया है।भारत माता की रक्षा के हित अपना लहू बहाया है॥ सर्दी गर्मी बरसात सही पर कर्म नहीं छोड़ा अपना,मेरा भारत आज़ाद रहे आँखों में रहता ये सपना।वर्षों केसर की क्यारी में बंदूकें बोते थे दुश्मन,कुर्बानी देकर वीरों ने उसको आज़ाद कराया है।भारत … Read more

सुख और दु:ख में सदा

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** विश्व पुस्तक दिवस स्पर्धा विशेष…… भूत,वर्तमान और भविष्य का,सदा होतीं स्पष्ट चित्र पुस्तकें।सुख और दु:ख में सदा साथ दें,होतीं हैं प्रगाढ़ मित्र पुस्तकें॥ हारते को दिखातीं राह नित,करातीं हैं विजय का घोष ये।अपूर्ण को बदलें पूर्ण में,उर में उगाती मधुर तोष ये॥ मिटता है तिमिर,और सर्वदा,नवल आलोक होता राह में।मनु नित देवत्व … Read more

कोई मीठा गान नहीं है

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ जीवन से बढ़ इस जगती में,कोई मीठा गान नहीं है। गीतकार है नियति सनातन,और गीत है अपना जीवन।गाते जाओ इस जीवन को,गायक बन कर ऐ जग चेतन।सुनने को तारे हैं ऊपर,सारा जग वीरान नहीं है…॥ सुख इसका आरोह निराला,दु:ख इसका अवरोह मधुरतम।घटनाएँ हैं संगति करतीं,आशाएँ हैं इसका सरगम।उठती स्वयं गगन से अविरल,ऐसी ऊँची … Read more

जल ही जीवन

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** जल ढलानों को बहे ये न शिखर को जाने।जल ही जीवन है मगर कद्र न जीवन माने।जल ढलानों पे बहे प्यार धरातल को दे,इस अदा पर ही कदर जल की न जीवन मानेंं।जल ढलानों को बहे…॥ दास्तां खुद ही कहे जल ये सुनो क्या कहता,मैं हुआ दर से बदर … Read more

दूर करो माँ बंदिश

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ माँ से माँगो आशीष हम सबके लिये।दूर करो माँ बंदिश हम सबके लिये।अपने ही घर कैद होकर रह गए,घूमने की हो ख़्वाहिश हम सबके लिये। माँ है भगवान,सभी बच्चों के लिये,माँ है वरदान सभी बच्चों के लिये।मेरी भी विनती सुन लो माँ ज़रा,दे दो मुझको भी दान सेहत का ज़रा। माँ से माँगों … Read more

कभी अशुभ बोलें नहीं

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* कभी अशुभ बोलें नहीं,हो जाता आह्वान।अपना हृदय पवित्र हो,ये ही सच्चा ज्ञान॥ स्वयं आप में झाँकिये,कैसा है व्यवहार,धर्म कर्म की राह पर,किया कभी उद्धार।स्वयं प्रशंसा आप कर,रखते झूठी शान,कभी अशुभ बोलें नहीं,हो जाता आह्वान…॥ औरों के भी झूठ पर,सदा दिखाएँ राह,मृदुवाणी ही बोलिए,कभी न होवें डाह।सबसे बढ़कर बोल है,इसका ही है … Read more

भगवा रंग बोलेगा…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** रचनाशिल्प:मात्रा भार १६-१५ भारती के लाल कैसे थे,ये भगवा रंग बोलेगा।दुश्मनों के काल कैसे थे,ये भगवा रंग बोलेगा॥ चढ़ाये शीश हँस-हँसकर,निडर हो माँ के चरणों में।वो माँ के ढाल कैसे थे,ये भगवा रंग बोलेगा॥भारती के लाल कैसे थे… जो केहरि बनके तोड़े थे,गुलामी की जंजीरों को।वो समर के साल कैसे थे,ये भगवा … Read more

चंचल-चपला चंद्रमुखी

सुदामा दुबे सीहोर(मध्यप्रदेश) ******************************************* चंचल-चपला-सी चंद्रमुखी,फूलों-सी लगे महकी-महकी।गुलमोहर-सा सिंदूरी बदन,हिये प्रीत अगन दहकी-दहकी॥ निकसी श्रृंगार किए घर से,अपने प्रीतम से मिलने को।गुलनार सुघड़ मनमोहिनी-सी,भावों से भरी गहकी-गहकी॥चंचल-चपला-सी… रसना से मौन लिए गौरीअधरन पर प्यास छुपाये हुए।कजरारी-सी बिखरे अलकें,मतवारी लगे बहकी-बहकी॥चंचल-चपला-सी… अल्हड़-अलबेली बावरी-सी,यौवन में चूर हुई अपने।अँखियन से इत-उत को ताँके,पंछी-सी लगे चहकी-चहकी॥चंचल-चपला-सी… बिंदिया दमके घन बिजुरी-सी,झूमे … Read more