वो कहीं रूठ न जायें..
संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** इस बात का डर है,वो कहीं रूठ न जायेंIनाजुक से हैं अरमान मेरे,कहीं टूट न जायें। फूलों से भी नाजुक है,उनके होंठों की नरमी,सूरज झुलस जाये,ऐसी साँसों की गरमी।इस हुस्न की मस्ती को,कोई लूट न जाये,इस बात का डर है,वो कहीं रूठ न जायें…॥ चलते हैं तो नदियों की, अदा साथ ले … Read more