वार्द्धक्य और गार्हस्थ्य-जीवन

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)******************************************************** पति-पत्नी मिलकर जो जीवन जीते हैं,वह गार्हस्थ्य-जीवन कहलाता है। जाहिर है कि इसमें उन पर निर्भर उनके बच्चे आ ही जाएंगे। उनके वे बच्चे जो बड़े हो गए हैं और अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं या बेटी की शादी होकर गृहवास बदल गया है,वे भले इस परिधि … Read more

हिंदी के समर्थन में प्रचंड जनसंख्या खड़ी करने के अंतर्राष्ट्रीय लाभ क्या ?

लीना मेहेंदले********************************** हिंदी पखवाड़े में एक प्रश्न बार-बार उठता है कि,क्या हिंदी कोई मौलिक भाषा है ? कितनी प्राचीन या कितनी नूतन है ? चूँकि इससे अधिक प्राचीन भाषाएं हैं,तो उनकी तुलनामें हिंदी की महत्ता कम हो जाती है,इत्यादि। साथ ही यह प्रश्न उठता है कि मैथिली को हिंदी से अलग करके एक प्रमुख भारतीय … Read more

अखंड विश्व की परिकल्पना असंभव नहीं

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** अखंड विश्व की परिकल्पना भारतीय जनमानस के लिए नई नहीं है,सनातन संस्कृति सदा से ही वसुधैव कुटुंबकम् और विश्व बंधुत्व की भावना से ओत-प्रोत रही हैl इसने सदा से ही सर्वे भवन्तु सुखिन: का संदेश दिया है। किसी कवि ने बड़े ही सरल शब्दों में लिखा है कि,-सदियों पहले देश हमारा, जगत … Read more

गांधी दर्शन:भौतिक के साथ नैतिक स्वच्छता भी जरूरी…

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ********************************************************** गांधी दर्शन की सबसे बड़ी खूबी और ताकत यह है कि,वैचारिक द्वंद् के बावजूद उसमें समन्वय का कोई न कोई प्रेरक और सर्वमान्य बिंदु न केवल खोजा जा सकता है,बल्कि व्यापक अमल भी किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रखर राष्ट्रवादी होने के साथ-साथ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी अपना प्रेरणा … Read more

मानवता का मानःएक चिन्तनीय विषय

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ***************************************************** मानवता का मान एक चिन्तनीय विषय हैl आज समाज देश या वैश्विक पटल लोभ, ईर्ष्या,द्वेष,झूठ,ठगी,लूट,भ्रष्टाचार,विस्तारवाद आदि राक्षसी दुष्कर्मों के दल-दल में फँसता जा रहा है। अपने स्वार्थों की सिद्धि के लिए आज मनुष्य किसी भी निकृष्ट कर्म को करने के लिए तैयार है। चाहे परिवार में आजीवन अपनी संतान … Read more

गांधी बाबा को मत मानो,गांधी की अवश्य मानो

निर्मलकुमार पाटोदीइन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************************** अगले २० साल के लिए नई शिक्षा नीति प्रस्तुत हुई है। इसमें अनेक विशेषताएं हैं। एक बड़ी विशेषता कौशल के आधार पर विद्यार्थी को आत्मनिर्भर बनाने की है,विद्यार्थी का जीवन निर्माण करने की है। इसमें पाठ्यक्रम को कम रखते हुए अन्य गतिविधियों को महत्त्व दिया गया है। शिक्षा नीति कोरी दिमाग़ी और किताबी … Read more

टुकड़े-टुकड़े गिरोह से हिंदी की रक्षा

मुद्दा-हिन्दी का घर बाँटने वाले सांसद…. डॉ.शंकर लाल शर्मा(उप्र)–हिंदी को अंग भंग करने की साजिश को हमें सफल नहीं होने देना है। हिंदी अपनी उपभाषाओं एवं बोलियों के साथ स्वस्थ है। जिन सांसदों को सही से हिंदी बोलनी नहीं आती,वे भोजपुरी का एक वाक्य रोमन में लिखकर इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने … Read more

कृषि-कानूनःकांग्रेस का शीर्षासन

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************************* संसद द्वारा पारित कृषि-कानूनों के बारे में कांग्रेस दल ने अपने-आपको एक मज़ाक बना लिया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस शीर्षासन की मुद्रा में आ गई है,क्योंकि उसने अपने २०१९ के चुनाव घोषणा-पत्र में खेती और किसानों के बारे में जो कुछ वायदे किए थे, वह आज उनसे एकदम उल्टी बात कह … Read more

नवरात्रि में जसगीत का महत्व और छत्तीसगढ़

डॉ.जयभारती चन्द्राकर भारतीगरियाबंद (छत्तीसगढ़) ********************************************************* माता फूल गजरा,गूंथव हो मालिन के देहरी फूल गजरा…,भारतवर्ष में नवरात्रि पर्व को वर्ष में २ बार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है और देवी की आराधना की जाती है। वर्ष में ४ नवरात्रियां होती है जिनमें २ नवरात्रि गुप्त अथवा सुप्त नवरात्रि कहलाती है और २ नवरात्रि जागृत नवरात्रि कहलाती … Read more

घर वही,जहाँ बुढ़ापा खिलखिलाए

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’बहादुरगढ़(हरियाणा)***************************************************** किसी ने सच ही कहा है कि जिस घर में बुजुर्ग सन्तुष्ट व प्रसन्नचित्त रहते हैं,वह घर धरती पर स्वर्ग के समान है,परन्तु आज आधुनिकता के परिप्रेक्ष्य में रिश्तों में उत्पन्न व्यवहारिकता,आपसी सामंजस्य व घटती सम्मान की भावना के कारण ऐसा स्वर्ग अब अपवाद का रूप लेता जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों … Read more