गुरु की महिमा

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* गुरु हिमराज,गुरु अधिराज,गुरु का रूप,ज्यों ईश।गुरु आगार,सद साकार,गुरु के चरण,नित शीश॥गुरु नित वेद,नहिं हो खेद,मिले सुरवर,यह चाह।गुरु दिनमान,गुरु पहचान,गुरु से मिले,नव राह॥ गुरुवर नमन,दु:ख का…

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भर आई हरियाली

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** वर्षा की रिमझिम बूंदों से,भर आई है हरियाली।खेत, बाग, वन, चरागाह सब,लदे हुए फल तरू डाली॥ भरे खेत सब धान मदीरा,हरे-भरे हैं दालों से।लौकी, कद्द्दू, ककड़ी…

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सावन आया, अब आओ

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** ओ मेघा रे… रचनाशिल्प:मात्रा भार १६/१४, पदांत २२/ बरसे बदरा रिमझिम-रिमझिम,सावन आया अब आओ।कितने सावन बीत गए हैं,अब तो साजन आ जाओ॥ भीगी चुनरी भीगा तन-मन,भीग…

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पिता आधार

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* सत्य ही तो एक बस आधार है।हों पिता जिस पथ वहीं परिवार है॥ आस है विश्वास सुंदर भावना।दे सदा खुशियाँ हमें शुभ कामना॥नींव होते हैं पिता…

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मन दौड़ता उस ओर क्यों ?

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** हो शीत चाहे हिम,भयानक ताप भीषण गर्जना।मन दौड़ता उस ओर क्यों,होती जहां है वर्जना।पथ पूर्व पूर्वज चल सरल,जो मार्ग निष्कंटक किया।काँटे चले ना मन अगर,कैसे करे नव…

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गरीब

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** गरीबों की नहीं होती, कभी कोई दिवाली है,भरी हसरत हजारों हैं, मगर ये जेब खाली है।भले दिखता रहे चंदा, चमकता आसमानों में,मनेगी ईद पर उनकी,…

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प्राणवायु आधार

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* हो हरित वसुंधरा.... हरित प्रकृति सार, प्राण वायु है आधार,वृक्ष कोई नहीं काटें, धरा ही तो शान है। कोरोना को करें याद, हुआ तन था बर्बाद,हालातों…

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हमारा देश भारत

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** रचनाशिल्प:२१२२ २१२२ २१२.... सोच रख कर हम बड़ी कुछ तो करें।ठान ली है हम किसी से ना डरें॥जुल्म कैसा भी नहीं सहना हमें।यह प्रगति का चक्र…

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जल ही जीवन

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* जल ही कल.... पानी बिन जीवन हो कैसे, गाँठ बाँध लें बात।जल सहेजकर ध्यान धरें यह, बहे नहीं दिन-रात॥ पानी के गुण को सब जानें, यह…

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ममता

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** मुँदी पलकें कन्हैया की, कमल से नैन हैं सोए,यशोदा मात की गोदी, सिमटकर लाल हैं खोयेजरा मुस्कान तो देखो, खिली है एक भोली-सी,लगे प्यारी बड़ी…

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