परिवर्तन होता सदा
डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** पल-पल चलता ही रहे, कालचक्र गतिमान।कभी रहे ना एक क्षण,अचल सृष्टि प्रतिमान॥ परिवर्तन होता सदा, प्रकृति और संसार।कभी यहाँ पतझड़ रहे, कभी वसंत बहार॥ कभी ऊष्णता ग्रीष्म की, तो सावन जलधार।कभी शीत में ठिठुरती, ठंडी शीत बयार॥ बदलेगी दुनिया जहां, होंगे यह बदलाव।सभी पुराना बीतकर, आयें नव बदलाव॥ नई सृष्टि नवचेतना, … Read more