प्रकृति बहुत नेहिल
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* प्रकृति बहुत नेहिल लगे,लगती नित अभिराम।सब कुछ नियमित हो रहा,सृष्टि-चक्र अविराम॥ सुंदर यह वसुधा लगे,आकर्षक आकाश।जी भर देखो जो इसे,तो हर ग़म का नाश॥ सुंदर हैं नदियाँ सभी,भाता पर्वतराज।वन-उपवन मोहित करें,दिल खुश होता आज॥ हरियाली है सुख लिए,गाती मंगलगान।प्रकृति सदा ही कर रही,शिल्पी का यशगान॥ खेतों में धन-धान्य है,लगते मस्त … Read more