नदिया
डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* शिव मस्तक पर बस रही, निर्मल नदिया धार।पापों को हरती सदा, पाते जीवन सार॥ नदियों के तट पर बसे, खुशियाँ पाते लोग।बहती निर्मल धार तो, करते पूजन योग॥ नदियां बहती धार है, महिमा अपरम्पार।धरती पर गंगा बसे, मिलता जीवन सार॥ यमुना के तीरे बसे, मोहन मुरली श्याम।बहती नदियाँ धार तो, मिलते तीरथ … Read more