राष्ट्र की शुभता को आहत करने का षड़यंत्र,सख्ती जरुरी

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* मुद्दा नागरिकता संशोधन कानून………… `नागरिकता संशोधन कानून` का जैसा हिंसक विरोध असम एवं पश्चिम बंगाल के बाद अब दिल्ली में हो रहा है,उससे यही पता चल रहा कि अराजक तत्व उत्पात पर आमादा हैं,वे देश को जोड़ना नहीं तोड़ना चाहते हैं। सरकारी एवं निजी संपत्ति को आग के हवाले करने,सड़क एवं … Read more

मानवतावादी सतनाम धर्म के प्रबल पक्षधर रहे गुरु घासीदास

गोपाल चन्द्र मुखर्जी बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************************ १८ दिसम्बर जन्म विशेष…………. विश्व के रचनाकर्ता सर्वजीव में प्राणदाता निरंतर विराजमान निराकार सर्वशक्तिमान परम ब्रह्म ही परम सत्य है। एक निराकार शक्ति! उनका नाम ही `सतनाम!` एक ही परमेश्वर को साधन तप द्वारा साधक व सत्य दृष्टाओं ने एक भाव से भिन्न-भिन्न पथ को अवलम्बन करते हुए मानव … Read more

नागरिकताःसरकार की नादानी

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** नया नागरिकता विधेयक अब जो जो गुल खिला रहा है,उसकी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। सबसे पहले तो मोदी और जापानी प्रधानमंत्री की गुवाहाटी-भेंट स्थगित हो गई। दूसरा,बांग्लादेश और पाकिस्तान में इस विधेयक की कड़ी प्रतिक्रिया हो रही है। बांग्लादेश के गृहमंत्री और विदेश मंत्री की भारत-यात्रा स्थगित हो … Read more

राहुल गाँधी:दिवाली पर होली के गीत गाने का क्या मतलब?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** मोदी २.० कार्यकाल में दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की पहली प्रभावी विरोध रैली ‘भारत बचाओ’ से ‘सावरकर हटाओ बनाम सावरकर बचाओ’ में कैसे और क्यों तब्दील हो गई,यह राजनीतिशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए रोचक विश्लेषण का विषय है। यह रैली देश में बढ़ती महंगाई,दम तोड़ती अर्थव्यवस्था,भारी बेरोजगारी जैसे जमीनी मुद्दों को … Read more

दिशाहीन हो रहा हमारा लोकतंत्र

प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी दिल्ली *************************************************************************** लोकतंत्र को विश्व में मानव और मानवता की सुरक्षा का एक सशक्त माध्यम माना जाता है। देश की प्रगति के लिए यह एक मानवीय,सुसंस्कृत और गरिमामय प्रणाली है। विचार और निर्णय पर इसका अंकुश तो नहीं होता,लेकिन यह किसी की विचारधारा को स्वतंत्र और सुरक्षित रूप में प्रस्तुत करने … Read more

इस कानून से हिंदू क्यों नाराज

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** कितने मजे की बात है कि गृहमंत्री अमित शाह ने जो नया नागरिकता विधेयक संसद से पारित करवाया है,उसका विरोध भारत के मुसलमान नहीं कर रहे हैं बल्कि हिंदू कर रहे हैं और ये हिंदू हैं पूर्वोत्तर राज्यों के। असम,त्रिपुरा, मणिपुर,मेघालय,मिजोरम,अरुणाचल के। इन राज्यों में रहने वाले मूल निवासियों को … Read more

छत्तीसगढ़ के असली जननायक रहे वीर नारायण सिंह

लक्ष्मीनारायण लहरे ‘साहिल’ सारंगढ़(छत्तीसगढ़) ************************************************************** छत्तीसगढ़ के इतिहास पर नजर डालें तो अलग-अलग समय में अलग अलग देशभक्त-सपूतों का जन्म हुआ,जो समाज और अपनी जन्मभूमि के लिए जिएl जिनके इतिहास को पढ़ कर-सुन कर बाँहें फूल जाती हैंl उनके कार्यों के प्रति मन-हृदय में श्रद्धा के भाव जाग जाते हैं। छत्तीसगढ़ के वर्तमान जिला बलौदाबाजार … Read more

स्त्रियों के लिए एक बेहतर समाज बनाने की चुनौती को स्वीकारे पुरुष समाज

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** बीते दिनों हैदराबाद में जिस प्रकार एक संभ्रांत महिला पशु चिकित्सक के साथ हैवानियत की गई,उसे सुनकर हर किसी की रूह कांप गई…इस नृशंस घटना ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया…। देश में बहुत कुछ बदला,लेकिन लड़कियों के लिए असुरक्षा का वातावरण नहीं बदला…। देश में … Read more

मेघालय में नारी-सत्ता,और सुरक्षित भी

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** जंगलराज से आदमराज में परिणत होती हुई दुनिया स्त्रियों को गौड़ बनाकर पुरुष प्रधान हो गई। समाज और धर्म के समस्त विधान पुरुषों के अहंकार और महत्व के पोषक हो गए। नारी जाति क्रमश: ढकेली जाने लगी और शोषण जनित पतन के परिणाम स्वरूप गर्भ में ही मारी जाने लगी। … Read more

फिर आरक्षण का अंधा कानून

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** संसद ने सर्वानुमति से आरक्षण विधेयक पारित कर दिया। सदन में उपस्थित ३५२ सदस्यों में से एक की भी हिम्मत नहीं हुई कि इस आरक्षण का विरोध करे। अब १० साल के लिए नौकरशाही के पैर में बेड़ियां फिर से डाल दी गई है। ७० साल से चल रहे इस … Read more