‘मनुष्यता’ ही साहित्य का प्रदेय
हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** ‘साहित्य समाज का दर्पण होता है’, इस पंक्ति से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। किसी भी काल-खंड की तस्वीर जब हम देखना चाहते हैं, तो उस दौर का साहित्य उठाते हैं और शोध-परिशोध के शिकंजे पर कस कर साहित्य-आइने में उस काल-खंड का अवलोकन करते हैं। इस शीशे को फ्रेम बद्घ … Read more