बचना चाहिए ‘बोन चाइना’ के उपयोग से

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* शुरूआती दौर में जानकारियों के अभाव में सामान्य रूप से चाय, कॉफी व नाश्ते और खाने में चमकदार प्लेट (ललचाने वाली सामग्री ‘क्रॉकरी’) का उपयोग बहुतायत से होता था, और हो रहा है। जैसे-जैसे जानकारी मिलना शुरू हुई कि, इसमें हड्डी (बोन) का चूरा मिलाया जाता है, तो बहुत से शाकाहारियों ने इसे … Read more

बहुत नुकसानदायक परियोजना

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* केन-बेतवा नदी… वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री पर धुआंधार शिलान्यास-उदघाटन बहुत सवार है। यह भी देखना है कि, उनके कार्यकाल में उनके द्वारा कितनी राशि की रेवड़ियाँ बांटी गई और कितनी बाकी है। एक बात समझ लो कि, पूरा लेखा-जोखा करने पर विकास के साथ विनाश भी किया गया है। जब सत्ता परिवर्तन … Read more

चुनावी रथ में ही क्यों सवार जन-हित योजनाएं ?

ललित गर्गदिल्ली************************************** आजादी के अमृतकाल के पहले लोकसभा एवं ५ राज्यों के विधानसभा चुनाव की आहट अब साफ-साफ सुनाई देे रही है, राज्यों में चुनावी सरगर्मियाँ उग्र हो चुकी है। भारत के सभी राजनीतिक दल अब पूरी तरह चुनावी मुद्रा में आ गए हैं और प्रत्येक प्रमुख दल इसी के अनुरूप बिछ रही चुनावी बिसात … Read more

मुस्कान समृद्धि का अनमोल उपहार

ललित गर्गदिल्ली************************************** विश्व मुस्कान दिवस (६ अक्टूबर) विशेष…. प्रत्येक अक्टूबर के पहले शुक्रवार को यानी इस वर्ष ६ अक्टूबर को ‘विश्व मुस्कान दिवस’ है। मुस्कान दिवस के पीछे वॉर्सेस्टर, मैसाचुसेट्स के एक अमेरिकी वाणिज्यिक कलाकार हार्वे बॉल के दिमाग की उपज थी। प्रतिष्ठित स्माइली फेस १९६३ में उनके द्वारा बनाया गया था। तब से, इसने … Read more

कलयुग:समय नहीं, हमारी सोंच बदली

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* लोग अधिकतर यह कहते मिलते हैं कि, समय बहुत बदल गया, पर समय नहीं बदला। समय जैसा का तैसा है, दिन में २४ घंटे होते हैं, सूर्य पूर्व से निकलता है, मनुष्य हाथ से ही खाना मुँह तक ले जाता है और खाता है एवं स्त्रियाँ ही बच्चों को जन्मती है। समय नहीं … Read more

बेहद स्पष्टवादी रहे

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)********************************************* लाल बहादुर शास्त्री जयंती विशेष… स्वाधीनता के अमृत-महोत्सव काल में शास्त्री जी की जिन्दगी से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और सादगी की प्रतिमूर्ति लाल बहादुर शास्त्री दोनों का ही २ अक्टूबर को जन्मदिन है। सभी जानते होंगे कि, शास्त्री जी ने एक बार … Read more

नजरिया बदलें, दूसरों से भी प्रेम करें

ललित गर्गदिल्ली************************************** प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवनपथ, कार्यक्षेत्र में सफलता के सपने संजोता है, पर, सबके सब सपने सच में नहीं बदलते। अथक परिश्रम के पश्चात भी यदि सफलता न मिले तो निराश-हताश होना स्वाभाविक है। वह हीन भावना से ग्रस्त हो जाता है। ऐसी स्थिति से उबरने के लिए जेनकाऊल ने कहा-‘स्मरण रखो-आने वाला दिन … Read more

बुजुर्गों के प्रति हो समुचित व्यवहार

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस (१अक्टूबर) विशेष… आजकल हमारे समाज में बुजुर्ग-सयाने लोगों की बहुत दयनीय स्थिति है। विशेष रूप से वो वृद्ध, जिनकी आमदनी का कोई जरिया नहीं रहता है। इसके अलावा जिन बच्चों को पढ़ाया-लिखाया, वक्त के साथ उनके व्यवहार-नजरिए में अंतर आ जाता है। जो पेंशन भोगी हैं, वे कुछ सीमा तक … Read more

कब तक पालेंगे साम्प्रदायिकता का रोग !

ललित गर्गदिल्ली************************************** कांग्रेस और उसके नेताओं ने लोकसभा एवं विधानसभाओं के चुनाव आने से पहले अपनी राजनीति चमकाने के लिए समाज को धर्म और जाति के नाम पर बांटने का काम शुरु कर दिया है, लेकिन इस तरह की जहर उगलने वाली राजनीति के चलते धार्मिक सौहार्द बिगड़ रहा है। दल के ही एक बुजुर्ग … Read more

चुनाव:जनता अशिक्षित, लालची या असमंजस में!

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** जो अशिक्षित है वे ‘लाचार’ नहीं, बल्कि ‘लालची’ हैं। मतों के सौदागर चुनाव के दौरान उन्हें शराब बाँटते हैं, कम्बल बाँटते हैं, नकदी बाँटते हैं,जमीन बाँटते हैं और वे लोग लालचवश उसी प्रत्याशी को मत देते हैं, जबकि…पढ़ी-लिखी जनता इस ‘असमंजस’ में रहती है कि मत किसे दें ?कौन है सही प्रत्याशी … Read more