शांति निकेतन

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** भाग-६….. पश्चिम बंगाल लोक कला और संस्कृति के मामले में एक समृद्ध राज्य है…शांति निकेतन यात्रा संस्मरण की कड़ी में पश्चिम बंगाल के ‘बाउल संगीत’ का जिक्र भी जरूरी है…यह संगीत यहां की विरासत है…इस संगीत ने यहां के सांस्कृतिक जगत में बहुत कुछ जोड़ा है…। बाउल संगीत ऐसा … Read more

सुनहरे भविष्य के सपने

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* विश्व बाल दिवस स्पर्धा विशेष……….. कालू की आँखों से आँसू बह रहे थे। वह सामने पड़े समाचार-पत्र के मुख्य पृष्ठ पर छपे समाचार को घूर रहा था,जिस पर विश्व बाल दिवस पर बच्चों के सुनहरे भविष्य का उल्लेख किया था। उसे देख अपने बाल्यकाल के गर्भ में … Read more

अच्छी सीख

प्रेरणा सेन्द्रे इंदौर(मध्यप्रदेश) ****************************************************** विश्व बाल दिवस स्पर्धा विशेष……….. दीवाली के आते ही चौदह साल का बेटा पटाखे के लिए जिद करता था। इस वर्ष भी वही हुआ पटाखे के लिए दीवाली की सुबह मैंने अपने घर के दरवाज़े पर एक गणेश जी की सीनरी टाँगी,जिसे मैंने पन्द्रह साल से संभालकर रखा था,कि नये घर … Read more

शांति निकेतन

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** भाग-४……… शांति निकेतन’ के अनुभव को यदि संक्षेप में बताना हो तो कह सकता हूँ कि वहां से लौटने के बाद व्यक्ति के अंदर एक लघु ‘शांति निकेतन’ का निर्माण हो जाता है..। ‘शांति निकेतन’ की स्मृति एक प्रेरणा स्रोत बन कर हमेशा नवनिर्माण के लिए प्रेरित करती रहती … Read more

डाकिया

वाणी बरठाकुर ‘विभा’ तेजपुर(असम) ************************************************************* निर्मला एकांत मन से ब्रीफकेस से निकली हुई चिट्ठी पढ़ रही है। “दादी…दादी,क्या पढ़ रहे हो ? मुझे भी दिखाइए!” सात वर्षीय पोते अभिज्ञान ने जिज्ञासा भरी नजरों से चिट्ठी देखकर निर्मला से पूछा। निर्मला ने जवाब दिया,”ये तेरे दादा जी की चिट्ठी थी। आज इस ब्रीफकेस में से निकली।” … Read more

चिंगु

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’ मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* दिवाली की छुट्टियाँ नजदीक आ रही थीं। बच्चों ने मनाली,शिमला,नैनीताल आदि घूमने की मांग पहले से ही रख दी थी। भला बच्चों को मना भी कैसे किया जाए। इसी बहाने घर से बाहर निकालना भी हो जाता है और बच्चों के साथ एक बार फिर बच्चा बन बचपन जी … Read more

कामचोरी

डॉ.शशि सिंघल दिल्ली(भारत) ********************************************************************************* नवम्बर का महीना था। ठंड ने अपने पाँव पसारने शुरू कर दिए थे। अभी कंपकंपाने वाली ठंड नहीं थी,मगर सूरज चाचू मद्धम-मद्धम तेज के साथ चल रहे थे। हल्की-हल्की गुलाबी ठंडक के चलते सूरज से सेंक लेना सुहाने लगा था। गली-मुहल्ले की महिलाएं अपने-अपने काम से निपटकर घर के बाहर बेड़े … Read more

आओ,राष्ट्रीय एकता स्थापित करने में भूमिका निभाएं

राज कुमार चंद्रा ‘राज’ जान्जगीर चाम्पा(छत्तीसगढ़) *************************************************************************** ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ मनाना महत्वपूर्ण नहीं है,बल्कि राष्ट्रीय एकता स्थापित करने में अपना योगदान देना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय एकता इस बात पर निर्भर करती है कि हमारी सोच और समझ देश के प्रति सकारात्मक हो। हम अपनी देश के प्रति भूमिका जवाबदारी और जिम्मेदारी से निभाएं। … Read more

लंदन में नए दक्षिण एशिया का सपना

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** लंदन से मैं दिल्ली के दस दिन के प्रवास में ‘दक्षिण एशियाई लोक संघ’ (पीपल्स यूनियन ऑफ साउथ एशिया) का मेरा विचार यहां काफी जड़ पकड़ गया है। पड़ौसी देशों के ही नहीं, ब्रिटेन और इजरायल के कई भद्र लोगों ने भी सहयोग का वादा किया है। उनका कहना था … Read more

रेल यात्रा या जेल यात्रा…!

तारकेश कुमार ओझा खड़गपुर(प. बंगाल ) ********************************************************** ट्वीटर से समस्या समाधान के शुरूआती दौर में मुझे यह जान कर अचंभा होता था कि महज किसी यात्री के ट्वीट कर देने भर से रेल मंत्री ने किसी के लिए दवा तो किसी के लिए दूध का प्रबंध कर दिया। किसी दूल्हे के लिए ट्रेन की गति … Read more