साहित्यकार आत्ममुग्धता से बचें
भोपाल (मप्र)। लघुकथा पाठ… साहित्यकार आज हड़बड़ी में है। आज लिखा कल प्रकाशित, परसों पुरस्कार, जबकि लेखन एक सतत प्रक्रिया है निरंतर अध्ययन, चिंतन, मनन और साधना की। इसमें लेखक आत्ममुग्धता से बचते हुए असहमतियों का सम्मान करना सीखें। लेखक यदि पहले पढ़ेगा, फिर गढ़ेगा, अपना समीक्षक और सम्पादक बनेगा तो रचना में निश्चित पाठक … Read more