दुःखी की मदद करना भी साहित्य सृजन का सौंदर्यबोध-प्रो. आच्छा
भोपाल (मप्र)। केवल मुट्ठी तानना और सत्ता का प्रतिरोध ही लेखन का सौंदर्यबोध नहीं, अपने लेखन में पीड़ित के साथ अपनी प्रतिबद्धता, करुणा और दुःखी व्यक्ति के साथ खड़े होना उसकी मदद करना भी साहित्य सृजन का सौंदर्यबोध है। करुण, संवेदना में भी रंजक तत्व होते हैं, यह भाव पाठक के मन में गहरे तक … Read more