कुछ नया सोचते हैं

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* जीवन के नये सफ़र में मेरे जीवनसाथी, लेकर हाथों में हाथ चलो! आज कुछ, नया सोचते हैं। जो तुमसे या मुझसे पहले, कभी किसी ने नहीं सोचा। तुम मेरी, तारीफ़ न करना मैं भी, नहीं बताऊंगी तुम्हारी कोई भूल। मेरे झल्लाने पर, तुम हौले से मुस्करा देना, मैं भी पी … Read more

काश!

मदन मोहन शर्मा ‘सजल’  कोटा(राजस्थान) **************************************************************** काश! प्यार करने वाले मोम के बने होते, पिघल कर एक दूसरे में मिले तो होते, काश! सदा एक ही डाली के फूल होते, काँटों के बीच गुस्ताखी से खिले तो होते, काश! तोड़ देते जमाने की बेदर्द बेड़ियां, पत्थरों से कठोर दिल कुछ हिले तो होते, काश! ना होती … Read more

मेरे अहं

रेखा बोरा लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ************************************************************* मेरे अहं ! मेरे और तुम्हारे बीच लगातार… चलता रहता है घोर युद्ध… जिसमें अच्छी लगती है, तेरी पराजय मुझको… मेरे अहं! तुम नहीं जानते कितनी घृणा करती हूँ तुमसे मैं… तुम्हारी हत्या की बात तक सोचती हूँ… और सोचती हूँ, तुम्हारी अस्थियों को त्रिवेणी संगम में विसर्जित करने … Read more

संस्कार के बीज

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** दर्पण कितने बदले तुमने,चेहरे को तुम बदल न पाए। नेेह-स्नेह के भाव कहो क्यूँ,अब तक तुममें मचल न पाए। चाँद-सा चेहरा भोली सूरत,दर्शन में बड़े सुहाने हो। इस माटी में संस्कार के,बीज कहो क्यूँ पल न पाए। परिचय-ओमप्रकाश अग्रवाल का साहित्यिक उपनाम ‘बबुआ’ है।आप लगभग सभी विधाओं (गीत, ग़ज़ल, दोहा, … Read more

माटी की गुड़िया

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** मैं माटी की गुड़िया हूँ, मिट्टी में मिल जाना है। माना शक्ल मेरी भी थी, कहते लोग खजाना है। सुंदर आँखें,गोरा रंग था, लटें भी थीं घुंघराली होंठ गुलाबी,चाल हिरनिया, मैं भी थी मतवाली। क्रूर नापाक पंजों से,पर कर ना पाई सुरक्षा। जानवरों के उन पंजों ने, देखो मुझे … Read more

कैसे लोग चला देते हैं बच्चों पर शमशीर

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** सोच-सोच कर मन यह मेरा होता रोज अधीर, कैसे लोग चला देते हैं बच्चों पर शमशीरl कैसे उसको पाला होगा, पल-पल उसे सम्हाला होगाl बिना खिलाये माँ के मुँह तक, जाता नहीं निवाला होगाl हल्की-सी भी चोट लगे तो माँ को उठती पीर- कैसे लोग चला देते हैं बच्चों … Read more

कल,आज और कल

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** जो कल हमपे है बीत चुका, उस कल की फिर क्यूँ चाह करें। जो कल हमने देखा ही नहीं, उस कल के लिए क्यूँ आह भरें। है आज हमारे साथ में तो, इस आज को जी भर के जी लें। खुशियों के सागर में डूबें, मस्ती के पैमाने … Read more

मेरे गाँव की हवा

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* हाले दिल गाँव का क्या सुनाऊँ आपको, पहले जन्नत,अब खण्डहर-सा लग रहा है। जिसे देख आँखें सुकून पातीं थी हवाएं, जो अब मन-ही-मन खटक रही है। सूनी वादियों मे जहाँ गीत गातीं थीं हवाएं, तनहाइयों में जहाँ गुनगुनाती थीं हवाएं। वन बाग़ उपवन को जहाँ महकाती थीं हवाएं, शहरों की … Read more

शांति को दिल में बसाना चाहते हैं

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** शांति को दिल में बसाना चाहते हैं। भक्तिमय संगीत गाना चाहते हैं। नफ़रतें जग से मिटा कर यार हम तो, प्रेम की गंगा बहाना चाहते हैं। लोग के दु:ख दर्द का उनको पता है, देश में वो क्रांति लाना चाहते हैं। जो हमारे साथ चलते हैं हमेशा, हम उन्हें … Read more

मौत खड़ी फुफकारती

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** अनज़ान नहि इस लोक में,दाता हो या दीन। मौत खड़ी फुफकारती,पर चाहत भयहीन॥ झूठ कपट सोपान से,चढ़ लिप्सा परवान। जन्म मरण ध्रुव मानकर,बनता नित धनवान॥ जो पाया सब तज धरा,तन धन अरु सम्मान। डेढ़ गज भी नसीब हो,जमीं मिले अवसान॥ चाहे कर जितना यतन,तैयारी सामान। नियत काल यमदूत … Read more