किसे सुनाए ? सुने कौन ?

कैलाश मंडलोई ‘कदंब’ रायबिड़पुरा(मध्यप्रदेश) *********************************************************** जन की दारुण कथा व्यथा, किसे सुनाए ? सुने कौन? जिम्मेदार जो जन है इसके, देखो साधे बैठे मौन ? जीर्ण-शीर्ण-सा सूखा तन। पेट भूखा है विकल मन॥ न मंदिर न कोई शिवाला। भूखे को बस मिले निवाला॥ प्रश्न खड़े अनगिनत मौन। शोषित रुदन सुनता कौन॥ किसे सुनाए ? सुने … Read more

हल्का करो ज़रा मन को

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** जानते दीन को न दुनिया को, कह रहे हैं कि रहबरी दे दो। कह के हल्का करो ज़रा मन को, बेसबब दर्द क्यूँ रहे हो ढो। रब मआ़फ़ी ज़रूर देगा ही, मैल दिल का अगर लिया हो धो। काम कोई ग़लत नहीं होगा, ख़ौफ़ से रब के … Read more

तबाही लाएगी गर्मी

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** ऐसी गर्मी आएगी मिट्टी में तबाही लाएगी, पौधों को खूब सुखाएगी हरियाली दूर भगाएगी। ऐसा मंजर हो जाएगा दुनिया को खूब तपाएगा, दर्दनाक हो जाएगा फसल नहीं उग पाएगी। दूषित हो रहा है,जल और थल इसीलिए फटते हैं बादल, हर मंजर एक शोला होगा आग नहीं वह ज्वाला होगी। कांप उठेगी … Read more

धर्मयुद्ध

क्षितिज जैन जयपुर(राजस्थान) ********************************************************** जब रणभूमि में आ आमने-सामने शक्तियाँ धर्म अधर्म की टकरातीं हैं, योद्धाओं के सिंहनाद से यह धरा भयभीत होकर बार-बार थर्रातीं है। तब भी यदि कोई योद्धा किसी के बुलावे का मानो इंतज़ार करता है, देखे धर्म को लड़ते अधर्म से मात्र अपने ऊपर ही वह प्रहार करता है। हराने को … Read more

धूप और छाँव

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** धूप और छाँव की लुका-छिपी, कितनी अच्छी लगती है। धूप में जब थक जाओ, छाँव शीतलता देती है। धूप जीवन का कठोर समय है, छाँव ढलती शाम है। हे मानव ! तुम धूप से क्यों घबराते हो, कठिन परिश्रम करके तुम अपना भाग्य बनाते हो। छाँव में जब तुम सबके साथ, … Read more

मतदान

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** देश हित में बढ़-चढ़कर, आओ मिल मतदान करें। अपने वोट से नेता चुन, देश का गौरव गान करें॥ बहुमूल्य होता मतदान, व्यर्थ में न उसको गंवाएँ। ऐसे नेता को जितायें, जो विकास नीतियां अपनाएँ॥ नोट लेकर वोट न दें, अपने मत का सम्मान करें। नाप-तौल की वस्तु नहीं, मिलकर सब मतदान … Read more

हमारा चौकीदार

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- आज देश की गली-गली में गूँजा एक ही नारा है, देश को जो चोटी पर रक्खे वो सरदार हमारा हैl कुछ ही वर्षों में भारत में नयी रोशनी ले आया, जहाँ-जहाँ पिछड़ा था भारत उसको आगे पहुँचायाl सर्वसम्मति से जनता ने तेरा नाम पुकारा है, देश को चोटी पर… … Read more

गहराई

प्रकृति दोशी भोपाल(मध्यप्रदेश) ********************************************************************************** पैरों की उंगलियों ने पानी को छुआ, कहा- तुम कौन हो ? हो कौन तुम पूछा मैंने जब… एक अनजानी चाहत ने लिया खींच मुझे गहराई की बाँहों की ओर… गहराई मुझे बाँहों में भरती रही उस नीले से पानी की ठंडक मुझे महसूस-सी होने लगी… डूबने आयी थी मरने आयी … Read more

बदलते खेत

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* नहीं रहे वे खेत, जिसमें से गुजरकर सौंधी-सौंधी खुशबू के साथ हवा के झकोरे आते थेl नहीं रहे वे किसान, जो दिनभर काम करने के बावजूद कभी नहीं थकते थे। नहीं रही वह रौनक, जब किसान को देखकर खेत दूर से मुस्कराते थेl जोतते हुए बैलों के गले में, पड़े घुँघरूओं … Read more

सूरज के तेवर

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** आज मेरी मुलाकात सूरज से हुई, जब अर्घ्य देने छत पर गई। मैंने रवि की तरफ देख पूछा- इतने गर्म क्यों हो रहे हो ? अभी तो सुबह के सात ही बजे हैं, वो बोला मैं तो सदा से ऐसा ही हूँ मेरा समय और गर्मी के तेवर निश्चित हैंl ये … Read more