‘माॅं’ का जाना…
रश्मि लहरलखनऊ (उत्तर प्रदेश)************************************************** अचानक बदरंग हो जाता हैमौसम,शून्यता पसर जाती हैउस आँगन में,जहाॅं बरसों तलकसुनती रही बिटिया,कि वह ईश्वर कीसबसे सुन्दर कृति है। अनमने मन में,बन जाता हैविसर्जित लम्हों का पहाड़। अनुभवों की टूटन और,आत्मीय-स्नेहीस्मृतियों की जकड़नटीसती दिनचर्या को,बेमुरव्वत ज़िम्मेदारी से भर जाती है। सुनो,कुलबुलाहट भरी इंसानीभीड़ के मध्य…,आशीर्वाद देते।दो अद्भुत हाथों का अदृश्य … Read more