रहा भरोसा अब नहीं
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)*************************************** सुख ने नित इतना छला, तन क्या मन पर घाव।तो भी अपनों पर नहीं, दिखता तनिक प्रभाव॥ पीड़ा के सब गीत हैं, मातम के उस्ताद।नहीं करे कोई यहाँ, उजड़े को आबाद॥ आँसू पीकर दिन कटा, बिलखी सारी रात।उसने जब मुँह फेरकर, करी न मुझसे बात॥ सबके मुखड़े दर्द के, बने हुए … Read more