मेरी ये पीड़ा समझोगे कभी!

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* धरती कहे पुकार के… जरा देख मुझे संतान मेरी, अपने हृदय के प्यार से अपने चक्षु की नमी से, कब समझोगे मेरा प्रेम जो सदा है समर्पित, तुम्हारे लिए सदियों से। और तुम लूटते हो मेरा सौन्दर्य, मेरी मुस्कान चीर देते हो मुझे… मेरी ये पीड़ा, जो समझोगे … Read more

एक दिन धरा पर..

गंगाप्रसाद पांडे ‘भावुक’ भंगवा(उत्तरप्रदेश) **************************************************************** ये चुभती धूप, ये चिलचिलाती गर्मी वस्तुतः ऋतु परिवर्तन के कारण ही है, परंतु इसकी अति, व असामयिक गति के कारक हम स्वयं हैं, प्रकृति से चल रही छेड़छाड़, अत्यधिक सुख भोग की मानव की चाह, मानव कृत प्रदूषण की भरमार, कटते वन, बढ़ती पालीथिन कारखानों जनित विषाक्त कचरा, वाहनों … Read more

सुख की खाई को है पाटा

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* आज समस्या हुई अनेक, कैसे हो अब निराकरण आओ मिल-जुलकर करें, स्वच्छ चहुँ दिशि पर्यावरण। निर्मलता से वृक्षों को काटा, सुख की खाई को है पाटा दूभर हो अब जीव भरण, जब शुष्क हुआ पर्यावरण। हरियाली का ह्रास हुआ, वृक्षों का विनाश हुआ शुद्ध वायु के अभाव में, दूषित सबकी … Read more

सूरत

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** सूरत में भावों का दर्शन होता है, छिपे हुए उदगार प्रदर्शन होता है। कितना ही मन अपने भाव छिपाता है, पर सूरत पर तो सत्य प्रदर्शन होता है। हर्ष,शोक,दु:ख,चिंता जिससे पीड़ित हों, सूरत पर हर भाव का दर्शन होता है। पर कुछ ऐसे कर्म छुपे भी होते हैं, सूरत पर … Read more

बल-प्रखर महाराणा प्रताप

अर्चना पाठक निरंतर अम्बिकापुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************************************** राणा प्रताप प्रखर,प्रबल है प्रभाव, अणु-अणु में मुखर अनंत,अडिग अटल स्वभाव। राजपूत की नाक वे,आन-बान की शान, बने प्रताप सदा ही,सबल सख्त इंसान। मुगलों को धूल चटाई,अकबर नीयत भाँप, घनी मूँछों वाले ने,छोड़ी अचूक छाप। बलशाली भुजाओं से,सब शत्रु हुए अनाथ, महाराज मेवाड़ के,सिर्फ समर्थ सनाथ। कूट-कूट हुई पूरित,वीरता दृढ़ प्रण, … Read more

समय रहते सम्भल जाओ

जसवंतलाल खटीक राजसमन्द(राजस्थान) ************************************************************* मुझको लगते हैं प्यारे, वन्यजीव देखो हमारे। अब इनको बचाना है, बचेंगे तभी वन हमारे॥ क्यों लगाते हो आग वन में, क्यों पहुँचाते हो नुकसान। पर्यावरण सरंक्षण के लिए, बनाओ इनको भी अभियान॥ लुप्त हो रही है प्रजातियां, सब अपने मोह और लालच में। समय रहते सम्भल जाओ, एक जीव नहीं … Read more

अंधेरी है रात..

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** अंधेरी है रात हम भटक गए हैं बाट, छूट गया है साथ बहुत बड़ी हो गई रात। कौशिक बोल रही है बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं चारों तरफ शोर मचा है। भयानक-सी है रात कैसी हो गई बात, पग-पग कठिन है बाट घनघोर लग रही है रात। टिम-टिमटिमाते … Read more

वरदान हैं वृक्ष

गीता गुप्ता ‘मन’ उन्नाव (बिहार) ************************************************************************************* प्रकृति का उपहार हैं वृक्ष, वसुधा का श्रृंगार हैं वृक्ष। प्राण वायु उत्सर्जन करके, नित करते उपकार हैं वृक्ष॥ भूमि का सम्मान हैं वृक्ष, ईश्वर का वरदान हैं वृक्ष। कलरव मधुर सरस फल शीतल, उपमेय कहीं उपमान हैं वृक्ष॥ गर्मी की शीतल छाँव हैं वृक्ष, थकते पथिकों को पाँव … Read more

मन

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** मन पापी,मन दोगला,मन ही साँचा मीत, बैरी और कपटी भी मन,मन ही करता प्रीत। मोल दिये न मन मिले मन तो है अनमोल, मनो-मन,मन बेमोल है,कह प्रेम के बस दो बोल। जग तेरा बन जायेगा,रस प्रेम जगत में घोल, मन ही साँचा मीत रे… रब है मन में,मन … Read more

चाँद

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** महताब दर महताब, बस बिखरे आपके ख्वाब। दूज का चाँद दिखा, तो मांगा सजन सलोना। ईद के चाँद से की, जल्दी आने की याचना। चौधरी के चाँद में नायिका का मुखड़ा है, तुम मुस्काते चाँद से कहे, बिरहन अपना दुखड़ा है। संदेश पिया को दे आ रे चंदा, मनाकर … Read more