हमारा चौकीदार

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- आज देश की गली-गली में गूँजा एक ही नारा है, देश को जो चोटी पर रक्खे वो सरदार हमारा हैl कुछ ही वर्षों में भारत में नयी रोशनी ले आया, जहाँ-जहाँ पिछड़ा था भारत उसको आगे पहुँचायाl सर्वसम्मति से जनता ने तेरा नाम पुकारा है, देश को चोटी पर… … Read more

गहराई

प्रकृति दोशी भोपाल(मध्यप्रदेश) ********************************************************************************** पैरों की उंगलियों ने पानी को छुआ, कहा- तुम कौन हो ? हो कौन तुम पूछा मैंने जब… एक अनजानी चाहत ने लिया खींच मुझे गहराई की बाँहों की ओर… गहराई मुझे बाँहों में भरती रही उस नीले से पानी की ठंडक मुझे महसूस-सी होने लगी… डूबने आयी थी मरने आयी … Read more

बदलते खेत

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* नहीं रहे वे खेत, जिसमें से गुजरकर सौंधी-सौंधी खुशबू के साथ हवा के झकोरे आते थेl नहीं रहे वे किसान, जो दिनभर काम करने के बावजूद कभी नहीं थकते थे। नहीं रही वह रौनक, जब किसान को देखकर खेत दूर से मुस्कराते थेl जोतते हुए बैलों के गले में, पड़े घुँघरूओं … Read more

सूरज के तेवर

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** आज मेरी मुलाकात सूरज से हुई, जब अर्घ्य देने छत पर गई। मैंने रवि की तरफ देख पूछा- इतने गर्म क्यों हो रहे हो ? अभी तो सुबह के सात ही बजे हैं, वो बोला मैं तो सदा से ऐसा ही हूँ मेरा समय और गर्मी के तेवर निश्चित हैंl ये … Read more

आदर्श

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** भिन्न-भिन्न नर जातियां, भिन्न-भिन्न संस्कार हम न किसी आदर्श का, कर सकते प्रतिकार। हर नर का कर्तव्य है, हृदय ग्राह्य आदर्श जीवन में लेकर चलें, हेतु प्रगति उत्कर्ष। व्यवहारिक होता नहीं, बिना विचार-विमर्श मतान्धता धर्माधन्ता, पर निर्मित आदर्श। मन स्वाधीन रहे सदा, रहे उच्च आदर्श फलीभूत होगा तभी, यह जीवन … Read more

रातभर

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* नींद आई न मुझको यूँ तेरे बिना, करवटें मैं बदलती रही रातभर। आसमां भी झुक के आता है देखो, धरा से मिलन को यहाँ रातभर। तेरी यादें भी लिपटीं मेरे जिस्म से, धड़कती रहीं बन के दिल रातभर। यूँ गगन में चमकते सितारे बहुत, कोई मेरा भी है क्या … Read more

ये कैसी प्यास है

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ भावना और भाव, दोनों में अंतर हैl प्यार और प्यास, दोनों आपस में क्या एक-दूसरे के पूरक हैं ! मैं कुछ समझा, और न समझा। मुझे कुछ ज्ञात ही, नहीं हो रहा हैll शायद आप ही, समझा सकें अब हमें। लेकर यही आस, आये हैं आपके पास। की रुबरू होकर, हमें … Read more

चली गिलहरी

डॉ.जियाउर रहमान जाफरी नालंदा (बिहार) *********************************************************************** चली गिलहरी कवि सम्मेलन में एक कविता पढ़ने, थी इच्छा सम्मान की इतनी लगी रातभर रटनेl आई जैसे ही माइक पर भूल गई वो रचना, उलट-पुलट वो पढ़कर आई सही-सही था पढ़नाl वहीं पे था एक बंदर बैठा बोला कवि जी सुनिए, आइंदा जब जाएं कहीं भी लिखकर उसको … Read more

सिसकता किसान

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** भंडार अन्नपूर्णा का बढ़ाएं, खेतों से काट फसलें जमा करता है खलिहान, कोटि-कोटि जनता का अन्नदाता है मगर अपने ही घर में, सिसकता किसान…,सिसकता किसानl दारिद्रय जिसकी व्यथा रही, क्या कहे वह अपनी अनकही कर्ज़ों के बोझ तले, हृदय में शूल गड़े संयम पे वश ना चले, राह कोई … Read more

मुझे तुम याद आते हो

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* यूँ ही बिन मौसम की बरसातें मेरी छत पर टप-टप करती बूंदें जहन में जाने कैसी हुलस-सी, जब भर जाती हैं मुझे तुम याद आते हो…। घड़ी-घड़ी तुम्हारी राह तकती बेसब्र आँखें,हर शय में जब तुम्हें ही तलाशती हैं, मुझे तुम याद आते हो…। भीगे से मन की देहरी पर डेरा … Read more