बाद मुद्दत के….

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** बाद मुद्दत के,उन्होंने मेरा हाल पूछा है क्या छुपा मन में,जो डर-डर के पूछा है, मैंने भी पूछ लिया,क्यों याद किया मुझे कोई बहाना भी,तो उन्हें नहीं सूझा है। आह तो निकलेगी ही चाहे वो मुस्कुराएं सालों से तो यूँ ही कलेजा नहीं फूंका है, इशारे में याद दिला दी,राज … Read more

नेपथ्य से…

मच्छिंद्र भिसे सातारा(महाराष्ट्र) ********************************************************************************** जीवन नहीं सजा करता है, बिना कँटीले-बीहड़ पथ से राग-अनुराग यूँ ही नहीं छिड़ा करता, बगैर हौंसले और नेक इरादे नेपथ्य से। जनम मिला खुशी पाई औरों ने, खुद से लड़ना है कही बात गैरों ने हाँ! हाँ! खुशियाँ यूँ ही मुफ़्त नहीं मिलती, बगैर खुद जिंदादिली शिकस्त खाने से। जीवन … Read more

बड़ी अदभुत प्रतिभा रहे अरुण

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** जीएसटी और नोटबन्दी,लिया था फैसला मुश्किल, कुशल नेता प्रखर वक्ता,सभी के संग रहे घुल-मिल। बड़े ही प्रिय अरुण जेटली,अटल वाजपेयी के खास, गये वो छोड़कर सबको,वहाँ सुषमा-अटल के पास। बड़ी अदभुत प्रतिभा वो,सदा लोकप्रिय अरुण जी थे, सियासी धुर विरोधी में,सभी के प्रिय अरुण जी थे। कहाँ हारे कभी … Read more

क्या से क्या हो गए लोग..

विनोद सोनगीर ‘कवि विनोद’ इन्दौर(मध्यप्रदेश) *************************************************************** बड़े मतलबी और मगरुर हो गए हैं लोग, दौलत के नशे में चूर हो गए हैं लोग। साथ मनाते थे जो हर तीज और त्यौहार, आज मन में मैल रख नीम और बबूल हो गए हैं लोग। भाई,भाई को पूछता नहीं बेटा बाप से डरता नहीं, मन को बंजर … Read more

बेटी

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** जीवन का आधार है बेटी, सपनों का संसार है बेटी। परियों का रुप है बेटी, चिड़ियों की चहचहाहट है बेटी। सूरज की गरमाहट है बेटी, चाँद की शीतलता है बेटी। घर की शान है बेटी, त्यौहारों की जान है बेटी। माँ-पिता का अभिमान है बेटी, ससुराल का मान है बेटी। हर … Read more

दुनिया की अजीब कहानी

कृष्ण कुमार कश्यप गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ************************************************************************** यारों इस दुनिया की अजीब कहानी, कोई हँसता सदा,किसी आंँख पानी। दाने-दाने के लिए कोई लड़ रहा, भ्रष्ट-तंत्र,भारी जीवन पर पड़ रहा। बिलखती झोपड़ी,हंँसती महल रानी, यारों इस दुनिया की अजीब कहानी। कहीं फसाद,धर्म-अधर्म की लड़ाई, एक मांँ,पर रक्त दुश्मन बने भाई-भाई। तेरा खुदा,मेरा ईश्वर,कैसी है नादानी ? यारों … Read more

आखिर क्यों जरूरी है हमें चौकीदार बनना …?

दिनेश पाठक  इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* अर्जुन का गांडीव बनूँ या,खुद गीता का सार बनूँ मैं ? कलम उठाकर वार करूं या,शब्द-शब्द अँगार बनूँ मैं ? मातृभूमि के चरणों की रज,ममता की रसधार बनूँ मैं ? हार-जीत का बनूँ कभी या ,खुशियों का त्यौहार बनूँ मैं ? कवि हूँ तो क्या कविताओं का,खुद अंधा रुजगार बनूँ मैं … Read more

अजन्मी बेटी की पुकार

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** मुझे इस धरा पर, माँ तू आने दे। तेरी गोद में खेलकर, आँगन को महकाने दे॥ तेरा ही अंश हूँ, रक्त से तेरे पल रही। मेरी नन्हीं मुस्कान को, काहे तू रौंद रही॥ बेटी,बहन,बहू,माँ बन, कई रिश्ते निभाऊंगी। तेरी लाड़ली कहा जग में, खुशियाँ मैं फैलाऊंगी॥ माँ जैसे पावन रिश्ते को, … Read more

मैं नहीं गा सका गीत तुम्हारे…

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** मैं नहीं गा सका गीत तुम्हारे, मीठे नहीं कर सका समुंदर खारे। बटोरने में लगा रहा बिखरे मोती, जो टूट कर बिखर गए हैं प्यारे॥ मैं नहीं गा सका गीत तुम्हारे… मानवता बिलख रही चारों ओर, फैला है आतंक का घना शोर। सवा अरब बेटों की माँ भारती, है दुःखी,सबके विचार … Read more

गुलाब

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* मैं गुलाब हूँ,गुलाब हूँ,गुलाब हूँ, तेरी आँखों में पलता मैं ख्वाब हूँ। घर-आँगन की शोभा तो होता हूँ में, सब फूलों का राजा भी होता हूँ मैं। खिलता मुस्काता सदा काँटों में हूँ, तुम्हें जीवन की सीख दे जाता हूँ। तुम न तोड़ो मुझे डाल से यूँ, मैं गुलाब … Read more