तुम्हारी प्रीत के पौधे
ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** झुकी पलकें अगर मेरी,तेरा मैं मान करता हूँ, उठी पलकें तो मानो यूँ,तेरा गुणगान करता हूँ। अगर पलकें हुई बोझिल,तो समझो याद करता हूँ, अगर हों बंद पलकें तो,बस फरियाद करता हूँ॥ नयन के नूर को किसने,कहाँ कैसे भुलाया है, तुम्हें पलकों के झूले में,सदा मैंने झुलाया है। तुम्हारे नेह … Read more