चलो बाढ़ का मजा लें

हेमेन्द्र क्षीरसागर बालाघाट(मध्यप्रदेश) *************************************************************** देश में इन दिनों चहुंओर मानसूनी बारिश खूब बरस रही है। सालों बाद जरूरत के मुताबिक ऐसी बारिश देखने को मिली। हाँ,बरखा से जन व जमीन को सुविधा और दुविधा साथ-साथ हो रही है। आलम कहीं सूखे से राहत तो कहीं बाढ़ की आफत,तो कहीं फसल की खुशामद तीनोें हद की … Read more

बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने का मोदी संकल्प

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दूसरी पारी के सौ दिन पूरे होने के बाद अब प्रकृति-पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण-मुक्ति के लिये सक्रिय हैं। कुशल राजनीतिज्ञ की तरह वे जुझारू किसान एवं पर्यावरणविद की भांति धरती पर मंडरा रहे खतरों के लिये जागरूक हुए हैं। बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने एवं पर्यावरण की … Read more

हिंदी को अनिवार्यत: करने से ही होगा भला

अजय जैन ‘विकल्प’ इंदौर(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** १४ सितम्बर को एक बार फिर हम ‘हिंदी दिवस’ मनाने की परम्परागत कोशिश करेंगे,औऱ अगले ११ महीने के लिए भूल जाएंगे। प्रश्न यह है कि ‘हिंदी दिवस’ कब तक-कितनी बार हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित हुए बिना मनाते रहेंगे ? यूँ कहें कि आजादी के इतने साल बाद भी हिंदी भाषा … Read more

हमारी हिंदी

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. हर व्यक्ति की एक भाषा होती है,जो उसे जन्म से माँ द्वारा मिलती है।मैं सौभाग्यशाली हूँ जो हिंदुस्तान में जन्म लिया और हिंदी के रूप में मातृभाषा मिली। हिंदी एक ऐसी भाषा है,जो हमारे भावों को स्पष्ट रूप प्रदान करती है। हिंदी रस,छंदों और … Read more

भारतमाता की बिंदी है हमारी हिंदी

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. पावन पुनीत भारत धरती,पवित्र नदियों से सिंचित,मुकुट मणि गिरिराज ‍हिमालय जिसका प्रहरी और माथे का शुभ्र मुकुट है,जम्मू कश्मीर व हिमाचल प्रदेश जिसका पूर्णेन्दु बिंब फल-सा मुख है,कश्मीर से असम तक फैली हिमालय पर्वत श्रृंखलाएं जिसकी मेखला है,उत्तराखंड के कूर्मांचल,गढ़वाल व तराई-भावर का भाग जिसका वक्षस्थल … Read more

‘हिंदी दिवस’ क्यों मनाया जाता है १४ सितम्बर को ?

गुलाबचंद एन.पटेल गांधीनगर(गुजरात) ************************************************************************ १९१८ में गांधीजी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी भाषा को राष्ट्र भाषा बनाने के लिए कहा था,हिंदी भाषा को जनहित की भाषा गांधीजी ने बताया थाl १९४९ में स्वतंत्र भारत के प्रश्न पर १४ सितम्बर को हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने का विचार-विमर्श करने के बाद में यह निर्णय लिया … Read more

सौतन

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. सौतन मेरे प्रिय सखे रचनाधर्मी, अशेष स्नेहाशीष। आज मैं अपनी पीर कहानी पत्र द्वारा तुम्हें बता रही हूँ,क्योंकि राजसभा में द्रौपदी से भी बदतर स्थिति है मेरी वर्तमान में। अब तो बस श्रीकृष्ण की तरह तुम्हारा ही भरोसा शेष है। इसी आशा और विश्वास से पत्र लिख … Read more

वैश्विक हिंदी और हम

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. किसी भी राष्ट्र की संस्कृति उस राष्ट्र की भाषा में निहित होती है। भाषा का अनुवाद मात्र करने से संस्कृति में परिवर्तन आ जाता है। हिंदी भाषा के ‘प्रणाम’ का बोध हमें अंग्रेजी भाषा के ‘गुड मार्निंग’ से नहीं होता। ‘क्षमा करना’ को ‘साॅरी’ शब्द कहना … Read more

साहित्य की भूमिका और हिंदी

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. हिंदी भाषा के विकास हेतु साहित्य की समृद्वि आवश्यक है,क्योंकि साहित्य समाज का दर्पण है,तो जाहिर है कि जब से समाज का अस्तित्व इस दुनिया में है तभी से साहित्य का भी। डॉ. हरदेव बाहरी के अनुसार-“साहित्य की भूमिका प्राचीन वैदिक काल से चली आ … Read more

संस्कारों का प्रतिबिम्ब हिंदी

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. हम सब बचपन में शाला जाना शुरू करते हैं और ज्ञान की प्राप्ति करते हैं। शाला में हम कहीं विषय की पढ़ाई करते हैं,जिनमें हिंदी विषय भी एक है,लेकिन दुःख की बात यह है कि आज भी हम हिंदी का इस्तेमाल करने पर शर्म महसूस करते हैं। … Read more