उत्तरशती के विमर्शों के बीच साहित्य की सत्ता के सवाल

प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा उज्जैन (मध्यप्रदेश) **************************************************************** साहित्य की सत्ता मूलतः अखण्ड और अविच्छेद्य सत्ता है। वह जीवन और जीवनेतर सब-कुछ को अपने दायरे में समाहित कर लेता है। इसीलिए उसे किसी स्थिर सैद्धांतिकी की सीमा में बाँधना प्रायः असंभव रहा है। साहित्य को देखने के लिए नजरिये भिन्न-भिन्न हो सकते हैं,जो हमारी जीवन-दृष्टि पर निर्भर … Read more

ट्रम्प की यात्रा सिर्फ नौटंकी नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की इस भारत-यात्रा से भारत को कितना लाभ हुआ,यह तो यात्रा के बाद ही पता चलेगा लेकिन ट्रम्प ऐसे नेता हैं,जो अमेरिकी फायदे के लिए किसी भी देश को कितना ही निचोड़ सकते हैं। यह तथ्य उनकी ब्रिटेन, यूरोप तथा एशियाई देशों की विभिन्न यात्राओं में … Read more

तनाव को कम करने के प्रयास भी सुधार की राह

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* चिकित्सक की गलतियों को रोगी भोगते हैं। पिता की गलतियों को बच्चे भोगते हैं। उसी प्रकार बच्चों की गलतियों का दण्ड माँ-बाप भोगते हैं। पत्नियों की गलतियों को पति भोगते हैं और पतियों की गलतियां प्राय: पत्नियां भोगती हैं। राजनेताओं की गलतियों को देशवासी भोगते हैं। मतदाओं … Read more

`मातृभाषा` को संभालने की जरूरत

प्रो. गिरीश्वर मिश्र दिल्ली ************************************************************* यूनेस्को ने २१ फरवरी को ‘मातृ भाषा दिवस’ मनाने का निश्चय करने के बाद भारत सरकार ने भी इसका फरमान जारी किया है और इसके आयोजन के निर्देश दिए हैंl शैक्षिक संस्थानों द्वारा आयोजित किए जाने वाले कृत्यों की सूची में अब यह भी शामिल हैl ऐतिहासिक रूप से यह … Read more

बढ़ती बेरोजगारी

सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** भारत एक जनसंख्या बहुल देश है। बढ़ती जनसंख्या को रोजगार उपलब्ध कराना आज विकराल समस्या बन चुकी है। जनसंख्या नीति और देश के अनुरूप औद्योगिक नीति के अभाव ने बेरोजगारी की समस्या को भयावह बना दिया है। सरकारी क्षेत्र की किसी भी भर्ती की घोषणा होने पर भारी संख्या में … Read more

अब भी सुधार का मौका

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में जो भाषण दिया,उससे भारत के मुसलमान संतुष्ट होंगे या नहीं,यह कहना मुश्किल है लेकिन यह मानना पड़ेगा कि उनका भाषण काफी प्रभावशाली,खोजपूर्ण और रोचक था। विपक्षी नेताओं ने भी कुछ तर्क अच्छे दिए, लेकिन मोदी के सामने कोई भी टिक नहीं सका। भारत का … Read more

ट्रम्प की यात्रा:कितनी झुग्गियां छिपाएगी सरकार एक दीवार में…

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उनकी पत्नी मेलानिया की पहली भारत यात्रा की चर्चा उनकी अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात से ज्यादा इस शहर में एक झुग्गी बस्ती को ढंकने के लिए दीवार खड़ी करने को लेकर ज्यादा हो रही है। लोग समझ नहीं पा रहे कि,एक झुग्गी बस्ती को … Read more

‘माँ’ कहाँ क्या करती है!

डॉ. वसुधा कामत बैलहोंगल(कर्नाटक) ******************************************************************* माँ कहाँ क्या करती है,बस चूल्हा-चक्की करके बस एक घर ही तो संभालती है। वो कहाँ क्या करती है…! हम सब जानते हैं माँ की अहमियत को, फिर भी हम माँ से बात बात पर कह देते हैं। माँ तुमने कहाँ क्या किया,तुम बस चूल्हा-चक्की करना,कपड़े धोना,बरतन मांजना, झाडू लगाना,नाश्ता-खाना … Read more

शहजादे की आँखें आई,गाँव में धुआं मत करो!

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** ट्रम्प साहब का दौरा……………. राजकुमार को आँखों का रोग हो गया तो राजा ने मुनादी कराई कि,राजधानी में धुआं नहीं होना चाहिए कारण राजकुमार को आँखें आई हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने राजा को सलाह दी कि,एक के पीछे कितने जन परेशान होंगे,क्यों न राजकुमार को राजधानी से बाहर भेज दिया … Read more

काम की जीत से मुगालते दूर

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ बहादुरगढ़(हरियाणा) *********************************************************************** दिल्ली में आम आदमी पार्टी की प्रचंड एक सन्देश तो बहुत ही अच्छा दे रही है कि जनता काम चाहती है,परिणाम को प्रणाम करती है।सामाजिक सरोकार ही जनता चाहती है,उसे अपनी चिंता करने वाली सरकार चाहिए। राष्ट्रीय मुद्दे व स्थानीय मुद्दे में अन्तर को तो समझना ही होगा। इस बार … Read more