जीवन नौका
सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) ********************************************************************************************* प्रकृति चैत्र मास में जैसे,सकल नवल हो जाती है। जीवन को जीवन देकर माँ,नवजीवन खुद पाती है। तेज भले वैशाख धूप हो,पथ संघर्ष चलाती माँ। अमलतास पलाश शिरीष-सा,खिलना हमें सिखाती माँ। जीवन जेठ दुपहरी-सा तो,माँ है पीपल छाया-सी। जल-सी पावन शीतल निर्मल,मूल्यवान सरमाया-सी। आषाढ़ मास बरखा से … Read more