तेरा मोहक रूप
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) **************************************** रूप दमकता नित्य ही,फैलाता आलोक।प्रिये आज तू चाँद है,देखे सारा लोक॥ गालों पर आभा खिली,लुभा रहा है नूर।दाता ने तुझको दिया,सच यौवन भरपूर॥ चंचल चितवन से चलें,जाने कितने तीर।दिल थामे सब घूमते,कौन बताए पीर॥ बतला दे ऐ रूपसी,तू किसका वरदान।तेरा मोहक रूप ये,है किसका अरमान॥ रूप दमकता नित्य ही,फैलाता आलोक।प्रिये … Read more