अहसास
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** `कोराना` सम व्याधि बहु,मनुज नहीं अहसास। हरित भरित सुष्मित प्रकृति,करता सत्यानासll लोभ मोह में जिंदगी,छल कपटी बस झूठ। प्रेम सत्य अहसास बिन,प्रकृति गयी नर रूठll परहित रत रवि शशि अनल,धरा व्योम जल वायु। नदी निर्झर सागर तरु,करे सृष्टि दीर्घायुll पा विवेक मति चिन्तना,सर्वोत्तम अहसास। अहंकार विषपान कर,मनुज करे … Read more