पितृ पक्ष:भरपूर आशीर्वाद प्राप्ति

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ********************************************************** इस वर्ष २ से १७ सितम्बर तक पूरे १६ दिनों का पितृ पक्ष है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए,पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने एवं पितृ दोष निवारण के लिए ये दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पूरे साल की अमावस्या तथा इन दिनों पितृ तर्पण,पिंड दान,ब्राह्मण भोजन,दान,कुआं-तालाब का निर्माण,पौधरोपण,नारायण बलि-नाग … Read more

प्रकृति संरक्षक व दिव्यज्ञान के प्रतीक श्री गणेश जी

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ********************************************************** श्री गणेश चतुर्थी स्पर्धा विशेष….. ईश्वर निराकार है। एक होकर भी उसने अनेक रूप धारण किए। स्वयं भगवान कहते हैं,-‘एकोऽहं बहुस्याम’,अर्थात में एक होकर भी अनेक रूप धारण करता हूँ। संसार में विभिन्न लीलाएं रचने,संसार को मार्गदर्शन देने,संसार में सभी प्रकार की मर्यादाएं व व्यवस्थाएं बनाने,भक्तों को विभिन्न रूपों में दर्शन … Read more

मूलाधार स्थित विघ्नहर्ता गणेशजी

डॉ.पूर्णिमा मंडलोईइंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** श्री गणेश चतुर्थी स्पर्धा विशेष….. हमारे शरीर में सात चक्र होते हैं-मूलाधार, स्वाधिष्ठान,मणिपुर,अनाहत,विशुद्ध,आज्ञा और सहस्रार चक्र। इनमें से मूलाधार सबसे पहला चक्र है। मूलाधार चक्र का स्थान `रीढ़ की हड्डी के एकदम निचले हिस्से में होता है। सामान्यतः हमारी सारी ऊर्जा मूलाधार चक्र पर स्थित होती है। ध्यान के माध्यम से मूलाधार … Read more

विश्वभर के लिए आत्मा की उपासना का उत्कृष्ट पर्व ‘पर्यूषण’

आचार्य डाॅ. लोकेशमुनिनई दिल्ली(भारत) *********************************************************************** पर्यूषण महापर्व १५-२२ अगस्त विशेष…. जैन संस्कृति में जितने भी पर्व व त्योहार मनाए जाते हैं,लगभग सभी में तप एवं साधना का विशेष महत्व है। जैनों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है पर्यूषण पर्व। यह पर्व ग्रंथियों को खोलने की सीख देता है और आत्मशुद्धि का वातावरण निर्मित करता है। इस … Read more

हिन्दी काव्य में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास का ऊँचा स्थान

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* महाकवि गोस्वामी तुलसीदास (२४ जुलाई) जयंती स्पर्धा विशेष संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदासजी को श्रीराम का अनन्य भक्त माना जाता है। अपने १२६ वर्ष के दीर्घ जीवन-काल में तुलसीदासजी ने कालक्रमानुसार कालजयी ग्रन्थों की रचनाएँ कीं। जैसा कि,नागरी प्रचारिणी सभा(काशी) ने उनकी रचनाओं का उल्लेख किया है,उसके अनुसार- रामचरितमानस,रामललानहछू,वैराग्य-संदीपनी,कलिधर्माधर्म निरूपण, … Read more

अभिनव वाल्मीकि गोस्वामी तुलसीदास

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)************************************************************ महाकवि गोस्वामी तुलसीदास (२४ जुलाई) जयंती स्पर्धा विशेष ‘रामबोला,तुलसीराम फिर तुलसीदास। जन्मलग्न से भाग्य का निष्ठुर परिहास!’ पितृस्नेह से वंचित अवहेलित बालक,बारह माह तक माता हुलसी के गर्भ में परिपुष्ट एवं पुर्णदन्तपन्क्ती सह जन्मक्षण से राम नाम उच्चारित करते हुए श्रावण माह का शुक्ल सप्तमी,मूल नक्षत्र में बालक का जन्म हुआ। … Read more

संसार में कोई भी तत्व गुरु के समान नहीं

संदीप सृजनउज्जैन (मध्यप्रदेश) ****************************************************** गुरु पूर्णिमा ५ जुलाई विशेष…. गुरु को केवल परलोक तक पहुंचाने वाला ही नहीं,वरन इहलोक याने वर्तमान को सुधार कर भविष्य बनाने वाला कहा गया है। भारतीय दर्शन में गुरु को केवल एक व्यक्ति या पद नहीं माना,वरन एक तत्व माना गया है जो अगर मन में श्रद्धा और विश्वास के साथ … Read more

वट-सावित्री की वेदी पर

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र) पटना (बिहार) ****************************************************************************** मेरे गाँव का यह बरगद पेड़,मुझसे बहुत बड़ा है। मैं अब तेरासी ग्रीष्म को पार करनेवाला ही हूँ। खैर,बात बरगद पेड़ की उठी थी तो जब मैं बच्चा था,वट-सावित्री व्रत-पूजा के दिन मैं भी अपनी माँ के साथ इस पेड़ के पास जाता था और माँ की … Read more

गुरुनानक देव:विश्व दृष्टि और लोक व्याप्ति

प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा उज्जैन (मध्यप्रदेश) **************************************************************** भारतीय सन्त परम्परा में गुरुनानक देव जी (१५ अप्रैल १४५९-२२ सितम्बर १५३९) का स्थान अप्रतिम है। उनका प्रकाश पर्व कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है,यद्यपि उनका जन्म १५ अप्रैल को हुआ था। अनेक सदियों से सांस्कृतिक,सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक क्षेत्र में व्याप्त तमस को निस्तेज कर उन्होंने उजाला फैलाया … Read more

भगवान महावीर के सिद्धान्त आज भी मूल्यवान

श्रीमती अर्चना जैन दिल्ली(भारत) *************************************************************** भगवान महावीर स्वामी का जन्म आज से लगभग २६०० वर्ष पूर्व वैशाली के कुंडग्राम में राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के यहां हुआ था। इन्होंने ‘जियो और जीने दो’ के संदेश को अपनाया और हम सबको भी इस संदेश का पालन करने को कहा। ‘अहिंसा’ सबसे बड़ा धर्म है,हमें जियो … Read more