हर कर्तव्य का बोध होना आवश्यक

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ********************************************** बोध होना अति उत्तम है,परंतु बोध क्या होना चाहिए ? वह सृष्टि की संरचनाकर्ता अर्थात ईश्वर के उपरांत सभ्य समाज को गहनता से विचार करते हुए अज्ञानियों को विस्तारपूर्वक समझाना चाहिए।विशेषकर माँ-बाप को अपनी संतान के प्रति जागरूक होने का बोध होना चाहिए। माँ की ममता और बाप … Read more

ज्ञान की देवी सरस्वती माता

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *************************************** वसंत पंचमी स्पर्धा विशेष ….. ‘वसंत पंचमी’ सरस्वती जी के अवतरण का दिवस है। सरस्वती माँ विद्या-बुद्धि एवं वाक् प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की अधिष्ठात्री देवी भी हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है कि,प्रणो देवी सरस्वती परम चेतना … Read more

ज्ञान और उल्लास का पर्व वसंत पंचमी

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)******************************************* वसंत पंचमी स्पर्धा विशेष ….. इस दिन पूजी जानेवाली विद्या की देवी सरस्वती बालक-बालिका की प्रथम पूज्या है। जब तक जातक (बालक-बालिका) कुछ समझने बूझने लायक हो जाता है,तो उसका अक्षरारंभ या विद्यारंभ कराया जाता है और यह बड़े उल्लास के साथ एक उत्सव के रूप में वसंत पंचमी … Read more

अपराधों का कानून से रुकना संभव नहीं

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)************************************* सामयिक चिंतन…. जब से सृष्टि का उदय हुआ और मानव युगल में हुए,तब से अपराध-पाप आदि शुरू हुए। कारण मानव में मन होने से वह सबसे अधिक समाज में विकृतियां फैलाई हैं,जिस कारण पुराण,शास्त्रों,वेदों में और तो और कानून की किताबें लिखी गई। आज विश्व में जितने भी क़ानून बने हैं,वे मात्र ५ … Read more

लोकतंत्र:भारत को मनोबल ऊँचा रखना होगा

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* भारत में लोकतंत्र की हालत क्या है,इस मुद्दे पर हमारे देश में और दुनिया में आजकल बहस तेज हो गई है। इस बहस को धार दे दी है किसान आंदोलन ने। इसके पहले नागरिकता कानून,धारा ३७०,मनमानी हत्याएँ और अल्पसंख्यकों में भय-व्याप्ति आदि मामलों को लेकर भारत के बारे में यह कहा जाने … Read more

प्रशासन को आचार संहिता से बांधना होगा

ललित गर्गदिल्ली ************************************** प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भले ही प्राथमिकता से सरकारी कामकाज की शैली में पारदर्शिता,तत्परता और ईमानदारी की वकालत की हो,लेकिन आज भी सरकारी कार्यशैली लापरवाह,अनुशासनहीन,भ्रष्ट एवं उदासीन बनी हुई है। आजादी के बहतर सालों के बाद भी आम आदमी शासन-तंत्र की उपेक्षा एवं बेपरवाही के कारण अनेक संकट का सामने करने को … Read more

‘प्रेम दिवस’ एक दिखावा

डॉ.अर्चना मिश्रा शुक्लाकानपुर (उत्तरप्रदेश)************************* हमारे धर्म,पुराण,साहित्य प्रेम की अनेक कथाओं एवं उपाख्यानों से भरे पड़े हैं। हमारी युवा पीढ़ी अपने समृद्धशाली आदर्शों को छोड़कर भटकती फिरती है। भौतिकता ने ऐसा भाव जगत दुनिया में पेश किया है,जैसे पहले के जोड़ों ने प्यार ही न किया हो। पहले प्रदर्शन नहीं था,भौतिकता ने आज जैसे पाँव नहीं … Read more

अस्मिता पर आंदोलन का कलंक

हेमेन्द्र क्षीरसागरबालाघाट(मध्यप्रदेश)**************************************** किसान आंदोलन के नाम पर अराजक तत्वों ने गणतंत्र दिवस पर गणतंत्र की संप्रभुत्ता का अपमान करने का कुकर्म किया। कुंठित ‘कलंक कथा’ देश को पीढ़ियों तक शर्मसार करती रहेगी। आलम में दंगाईयों ने बेशर्मी से कई जगह पर पुलिसकर्मियों पर हमला और जमकर तांडव किया। हाथ में डंडे लेकर पुलिसकर्मियों को दौड़ाया … Read more

जैन धर्म की महती राष्ट्रीय भूमिका

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** चिंतन…….. प्रस्तुत संस्कृति की धारा ने भारतीय जीवन व विचार एवं व्यवस्थाओं को कब कैसे पुष्ट और परिष्कृत किया,इसका यथार्थ मूल्यांकन होकर उसकी वास्तविक रूपरेखा उपस्थित हो जाए तो मालूम होगा कि जैन धर्म अपनी विचार व जीवन संबंधी व्यवस्थाओं के विकास में कभी किसी संकुचित दृष्टि का शिकार नहीं बना। उसकी भूमिका … Read more

दुर्भाग्यपूर्ण और सरकारी तंत्र की असंवेदनशीलता

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** शहादत न सही,कोरोना योद्‍धाओं की मौत जिन्हें देश ने ‘कोरोना योद्धा’ कहा,जिनके सम्मान में प्रधानमं‍त्री नरेन्द्र मोदी ने ताली-थाली बजाने का आव्हान किया, जिन्होंने कोविड-१९ महामारी से लड़ते हुए जान लगा दी,और उसी क्रूर कोरोना का शिकार बने चिकित्सकों की शहादत को लेकर मोदी सरकार और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बीच जिस … Read more