सब नश्वर,चरित्र कमाएं

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** जिनसे भी जन्म लिया,उसका अंत भी निश्चित है। मनुष्य मन के कारण ही मानव कहलाता है। जबसे मानव का प्रादुर्भाव हुआ,उसमें पाप यानी हिंसा,झूठ चोरी,कुशील और परिग्रह के साथ चार कषायों(क्रोध मान,माया लोभ यानी राग द्वेष) की युक्तता है। मनुष्य किस पर मद करता है- ज्ञानं पूजां कुलम जातिं बलमृद्धिं तपो वपुः।अष्टावाश्रित्य मानित्वं … Read more

देवनागरी लिपि:पथ की बाधाएँ और उपाय

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)**************************************************** यह सर्वमान्य तथ्य है कि यदि हमें अपनी भाषाओं का प्रचार-प्रसार करना है तो भाषा के साथ-साथ इनकी लिपियों को बचाए रखना भी अत्यंत आवश्यक है,लेकिन कई वर्षों में यह देखने में आ रहा है कि हिंदी ही नहीं,अन्य ऐसी भाषाएं जो देवनागरी में लिखी जाती हैं,उन्हें भी ज्यादातर लोगकम्प्यूटर,मोबाइल तथा … Read more

यदि ‘लव’ है तो ‘जिहाद’ कैसा ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** ‘लव जिहाद’ के खिलाफ उप्र और हरियाणा सरकार कानून बनाने की घोषणा कर रही है और ‘लव जिहाद’ के नए-नए मामले सामने आते जा रहे हैं। फरीदाबाद में निकिता तोमर की हत्या इसीलिए की गई बताई जाती है कि उसने हिंदू से मुसलमान बनने से मना कर दिया था। उसका मुसलमान प्रेमी … Read more

शक्ति पुंज हैं हम

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’बहादुरगढ़(हरियाणा)***************************************************** मनुष्य की शक्ति का एहसास स्वयं उसके सिवा और कौन कर सकता है ? अपने अन्दर की ऊर्जा को तभी जान पाएंगे,जब आप उमंग से भर कर कुछ नया करने की ठान लेंगे। विभिन्न वैज्ञानिकों ने बहुमूल्य खोजों से जहाँ जीवन को इतना आसान बना दिया तो उसके पीछे उनके अंतर्मन की … Read more

भारतीय भाषाओं में है आत्मनिर्भरता का मूल

प्रो. गिरीश्वर मिश्रदिल्ली********************************************************** भाषा संवाद में जन्म लेती है और उसी में पल-बढ़ कर समाज में संवाद को रूप से संभव बनाती है। संवाद के बिना समाज भी नहीं बन सकता न उसका काम ही चल सकता है,इसलिए समाज भाषा को जीवित रखने की व्यवस्था भी करता है। इस क्रम में भाषा का शिक्षा के … Read more

लोभ में आकर न छोड़ें संस्कृति और समाज

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)************************************************** अक्सर हम संस्कृति की बात करते हैं,पर कोई पूछे कि संस्कृति है क्या,तो क्या सही-सही जबाब दे पाते हैं ? संस्कृति को परिभाषित करना कठिन है; क्योंकि यह कोई वस्तु नहीं है। यह समझने की चीज है। यह हमारी भावनाओं को उजागर करने वाला वह दीप है,जो हमें औरौं … Read more

छुईमुई बनता समाज

राकेश सैनजालंधर(पंजाब)*********************************************** उत्तर प्रदेश के मथुरा में मंदिर में नमाज पढ़ऩे के जुर्म में फैसल खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। फैसल और साथियों के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद साहिब का कार्टून प्रकाशित करने की घटना के बाद इतना विवाद भड़का कि,यूरोप के बाकी हिस्से भी जिहादी … Read more

हिन्दी वालों की हिन्दी वालों से हिन्दी के लिए लड़ाई

प्रो. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)****************************************** पूजनीय बड़े पिता जी और माता जी,आप लोग मुझे माफ कर देना। मैं आपका अच्छा बेटा नहीं बन पाया…मैं जा रहा हूँ। मैं जिन्दगी से परेशान हो गया हूँ। आप लोग मुझे माफ करना। राजीव के सुसाइड नोट का यह एक अंश है। ११ सितंबर २०२० को यूपीपीसीएससी का रिजल्ट आया। … Read more

सवाल अवश्य करना चाहिए कि,अपराध क्यों ?

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ***************************************************** आजकल हमारे चारों ओर का वातावरण अपराधमय हो गया है। वर्तमान समय में किसी भी दिन के समाचारों पर ध्यान दिया जाए तो अपराधिक समाचार ही अधिक देखने व सुनने को मिल रहा है। विश्वास,सत्य,निष्ठा,कर्तव्य व परोपकार जैसे शब्द अब बोलचाल एवं सजावट की वस्तु प्रतीत होने लगें हैं। सत्यनिष्ठ … Read more

‘कोरोना’ का द्वन्द्व-ईश्वर या विज्ञान

डॉ. वरुण कुमारदिल्ली****************************** यह ‘तालाबंदी’ काफी लंबी खींची गई है और उसके बाद धीरे-धीरे खोलने (अनलॉक) की कोशिशें चल रही हैं। जब यह शुरू हुई थी तो नई स्थिति और नई चुनौती ने कई तरह से मनुष्य को उद्धेलित किया था-भय,बेबसी,गुस्सा,संवेदना,भविष्य में क्या होगा इसकी आशंकाएं आदि। इसने नए सिरे से एक वैचारिक प्रश्न को … Read more