राष्ट्र प्रेम के अवसर तो अनेक
अरशद रसूल, बदायूं (उत्तरप्रदेश) ********************************************************************* आधुनिकता की चाशनी में लिपटा परिवेश, भौतिकवादी संस्कृति में डूबा देश का जनमानस,पागलपन की हद तक पश्चिमी सभ्यता की नकल आदि। अगर इस समय हम समाज की स्थिति को देखें तो पूरी तरह से बाजारवाद हावी है। न कोई विचार,न कोई चिंतन और न ही ‘मैं’ से ‘हम’ होने का … Read more