कहां सावरकर और कहां राहुल ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** हमारे आजकल के नेताओं से यह आशा करना कि वे नेहरु, लोहिया,श्यामाप्रसाद मुखर्जी,विनोबा,अटलबिहारी वाजपेयी और नरसिंहराव की तरह पढ़े-लिखे होंगे,उनके साथ अन्याय करना होगा। वे सत्ता में हों या विपक्ष हों,उनका बौद्धिक स्तर लगभग एक-जैसा ही होता है। सलाहकार तो उनके भी होते हैं। लेकिन वे अपने स्तर के लोगों … Read more

समाज में मनुष्यता के प्रतिस्थापक भगवान पार्श्वनाथ

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** सनातन धर्म की पावन गंगोत्री से निकले विभिन्न धर्मों में जैन धर्म भारत का सर्वाधिक प्राचीनतम धर्म है। चौबीस तीर्थकंरों की समृद्ध जनकल्याण की परम्परा,जो वर्तमान अवसर्पिणी काल में ऋषभदेव से लेकर महावीर तक पहुंची,उसमें हर तीर्थंकर ने अपने समय में जिन धर्म की परम्परा को और आत्मकल्याण के मार्ग … Read more

अब ‘राशन एकीकरण’ की तैयारी,क्या हाजमा भी एक होगा ?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** ‘एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड’ के बहाने ‘राष्ट्रीय एकीकरण अभियान’ के तहत केन्द्र की मोदी सरकार की सूची में अगला क्रम अब राशन कार्ड का है। इसे सरकार ने ‘एक राष्ट्र,एक राशन कार्ड’ नाम दिया है। इसका मानक प्रारूप हाल में राज्यों को जारी करके कहा गया है कि,वे राशन कार्ड के … Read more

निरर्थक संकट में फंसी भाजपा

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** मुद्दा `नागरिकता संशोधन कानून`………… कोई कानून हमारी संसद स्पष्ट बहुमत से बनाए और उस पर इतना देशव्यापी हंगामा होने लगे,ऐसा याद नहीं पड़ता। संसद के दोनों सदनों ने ‘नागरिकता संशोधन विधेयक’ पारित किया,जिसके अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आनेवाले शरणार्थियों को भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी,लेकिन यह नागरिकता … Read more

अपराध और अपराधियों के संरक्षण में नेताओं का बड़ा योगदान

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** एक कहावत है कि जब कोई चूहा बिल्ली को आँख दिखाए,तो मान कर चलना चाहिए चूहे का बिल नजदीक हैl आज देश में प्रजातंत्र होने से,जनता की सरकार बनी,यानि चुने हुए प्रतिनिधि ही पंच,सरपंच,विधायक,सांसद उसके बाद मंत्री,मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री इत्यादि बनते हैंl इन सबको बनने के लिए प्राथमिक अर्हता है आपका दबदबा समाज … Read more

राष्ट्र की शुभता को आहत करने का षड़यंत्र,सख्ती जरुरी

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* मुद्दा नागरिकता संशोधन कानून………… `नागरिकता संशोधन कानून` का जैसा हिंसक विरोध असम एवं पश्चिम बंगाल के बाद अब दिल्ली में हो रहा है,उससे यही पता चल रहा कि अराजक तत्व उत्पात पर आमादा हैं,वे देश को जोड़ना नहीं तोड़ना चाहते हैं। सरकारी एवं निजी संपत्ति को आग के हवाले करने,सड़क एवं … Read more

मानवतावादी सतनाम धर्म के प्रबल पक्षधर रहे गुरु घासीदास

गोपाल चन्द्र मुखर्जी बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************************ १८ दिसम्बर जन्म विशेष…………. विश्व के रचनाकर्ता सर्वजीव में प्राणदाता निरंतर विराजमान निराकार सर्वशक्तिमान परम ब्रह्म ही परम सत्य है। एक निराकार शक्ति! उनका नाम ही `सतनाम!` एक ही परमेश्वर को साधन तप द्वारा साधक व सत्य दृष्टाओं ने एक भाव से भिन्न-भिन्न पथ को अवलम्बन करते हुए मानव … Read more

नागरिकताःसरकार की नादानी

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** नया नागरिकता विधेयक अब जो जो गुल खिला रहा है,उसकी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। सबसे पहले तो मोदी और जापानी प्रधानमंत्री की गुवाहाटी-भेंट स्थगित हो गई। दूसरा,बांग्लादेश और पाकिस्तान में इस विधेयक की कड़ी प्रतिक्रिया हो रही है। बांग्लादेश के गृहमंत्री और विदेश मंत्री की भारत-यात्रा स्थगित हो … Read more

राहुल गाँधी:दिवाली पर होली के गीत गाने का क्या मतलब?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** मोदी २.० कार्यकाल में दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की पहली प्रभावी विरोध रैली ‘भारत बचाओ’ से ‘सावरकर हटाओ बनाम सावरकर बचाओ’ में कैसे और क्यों तब्दील हो गई,यह राजनीतिशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए रोचक विश्लेषण का विषय है। यह रैली देश में बढ़ती महंगाई,दम तोड़ती अर्थव्यवस्था,भारी बेरोजगारी जैसे जमीनी मुद्दों को … Read more

दिशाहीन हो रहा हमारा लोकतंत्र

प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी दिल्ली *************************************************************************** लोकतंत्र को विश्व में मानव और मानवता की सुरक्षा का एक सशक्त माध्यम माना जाता है। देश की प्रगति के लिए यह एक मानवीय,सुसंस्कृत और गरिमामय प्रणाली है। विचार और निर्णय पर इसका अंकुश तो नहीं होता,लेकिन यह किसी की विचारधारा को स्वतंत्र और सुरक्षित रूप में प्रस्तुत करने … Read more