एनसीआरबी के आँकड़े और डरती सरकार

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** छप्पन इंची छाती रखने वाली,पाकिस्तान को आए दिन ठोंकने वाली और कश्मीर से धारा ३७० एक झटके में हटाने वाली मोदी सरकार भला आँकड़ों से क्यों डरती है ? बेजान से लगने वाले इन आँकड़ों में ऐसी कौन- सी चिंगारी छिपी है,जिसकी वजह से सरकार को डर है कि कहीं वह … Read more

मुफ्त बाँटने की होड़ कब तक ?

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* भारतीय राजनीति में खैरात बांटने एवं की सविधाओं की घोषणाएं करके मतदाताओं को ठगने एवं लुभाने की कुचेष्टाओं का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है। महाराष्ट्र एवं हरियाणा विधानसभा चुनाव के सन्दर्भ में ऐसी अतिश्योक्तिपूर्ण घोषणाओं को देखा एवं आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव को देखते हुए अरविन्द केजरीवाल ऐसी ही घोषणाओं … Read more

भारत की सेतु `हिन्दी` विश्वभाषा की ओर अग्रसर

डॉ. प्रभु चौधरी उज्जैन(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* सन् १९७५ में हुए प्रथम हिन्दी सम्मेलन में हिन्दी को राष्ट्रसंघ की भाषा बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ था,जो कार्य आज तक सम्पन्न नहीं हो पाया,किन्तु इसके अनवरत प्रयास से आशा है कि शीघ्र ही हमें सफलता मिलेगी। विश्व हिन्दी सम्मेलनों के प्रयास से ही महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय … Read more

अबकी बार बच गया पाकिस्तान

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** आज के दिन पाकिस्तान की साँस अधर में लटकी हुई थी। यदि पेरिस स्थित वित्तीय कार्रवाई टास्क फोर्स (एफएटीएफ) आज पाकिस्तान को उसकी भूरी सूची में से निकालकर काली सूची में डाल देती तो उसकी नय्या डूब जाती। काली सूची में आने का अर्थ है,वह अंतरराष्ट्रीय अछूत बन जाए। पाकिस्तान … Read more

जिसकी लाठी उसकी भैंस

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** प्रसंग-भारत रत्न …………………. यह बात सनातन सत्य है कि,हर युग में शासकों ने अपने अपने कार्यकाल में अपने निजियों,सम्बन्धियों और विचार धाराओं वालों को उपकृत किया थाl यह जरुरी भी होता था,कारण कि वे उस शासक के भक्त-पिछलग्गू हो जाते थेl जिनको राजाश्रय मिलता था,उनका सम्मान स्वाभाविक रूप से समाज,सत्ता में … Read more

भारतीय राजनीति में ‘चरण स्पर्श रोग’

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************************************** भारतीय राजनीति और भारतीय मानस का एक लाइलाज लक्षण यह भी है कि जिस काम से बचने को कहा जाए,वही हर हाल में किया जाए। ऐसी ही लाइलाज बीमारियों में से एक है पैर छू संस्कृति। यूँ भारतीय परम्परा में यह बुजुर्गों,श्रेष्ठिजनों,गुरूओं और विद्वानों के प्रति सम्मान करने का प्रतीक है,लेकिन … Read more

हिंसा से बढ़ता सामाजिक अलगाव एवं अकेलापन

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* आज देश ही नहीं, दुनिया में हिंसा,युद्ध एवं आक्रामकता का बोलबाला है। जब इस तरह की अमानवीय एवं क्रूर स्थितियां समग्रता से होती है तो उसका समाधान भी समग्रता से ही खोजना पड़ता है। हिंसक परिस्थितियां एवं मानसिकताएं जब प्रबल हैं तो अहिंसा का मूल्य स्वयं बढ़ जाता है। हिंसा किसी … Read more

सावरकर साम्प्रदायिक थे या शुद्ध बुद्धिवादी ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** स्वातंत्र्यवीर सावरकर का स्वतंत्र भारत में क्या स्थान है ? न तो उन्हें भारत रत्न दिया गया,न संसद के केन्द्रीय कक्ष में उनका चित्र लगाया गया,न संसद के अंदर या बाहर उनकी मूर्ति स्थापित की गई,न उन पर अभी तक कोई बढ़िया फिल्म बनाई गई,न उनकी जन्म-शताब्दी मनाई गई और … Read more

`जनता के राष्ट्रपति` भारत रत्न अब्दुल कलाम की यादों का गुलदस्ता

राजेश पुरोहित झालावाड़(राजस्थान) **************************************************** १५ अक्टूबर जन्मदिवस विशेष…………….. मिसाइल मैन,देश के प्रसिद्ध अभियन्ता व भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म १५ अक्टूबर १९३१ को धनुष कौड़ी ग्राम रामेश्वरम तमिलनाडु में हुआ था। वे एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में जन्मे थे। इनके पिताजी मछुआरों को नाव किराये पर देने का काम करते थे। … Read more

आर्थिक मंदी और रविशंकर का फिल्मी चश्मा…

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************************************** क्या देश में सचमुच आर्थिक मंदी है ? अगर है तो वह सत्ताधीशों को क्यों नहीं दिख रही और नहीं है तो आम आदमी अपनी तंग जेब और काम-धंधों को लेकर इतना बेचैन क्यों है ? यदि देश में आर्थिक मंदी है तो वह व्यापक राजनीतिक असंतोष के रूप में व्यक्त … Read more