‘माँ’ के आगे सभी रिश्ते बौने

ललित गर्ग दिल्ली************************************** माँ और हम (मातृ दिवस विशेष)… ‘मातृ दिवस’ समाज में माताओं के प्रभाव व सम्मान का वैश्विक उत्सव है, जो माताओं और मातृतुल्य विभूतियों का सम्मान करता है। माताओं द्वारा अपनी संतान, परिवार और समाज के लिए उनके बलिदान, अमूल्य योगदान और समर्पण को याद करने, सम्मान देने एवं पूजने का पवित्र … Read more

जीवन स्त्रोत माँ’, सम्मान करें

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** माँ और हम (मातृ दिवस विशेष)… ‘माँ’ का पल्लू पकड़, उसी के साथ जाते थे, खाना जब भी हो, उसी के हाथ से खाते थे’।जी हाँ, हमारी प्रथम गुरु होती है हमारी माँ, जो जीवन के हर मोड़ पर हमारा साथ देती है। हमें मार्गदर्शित करती है। ‘मातृ दिवस’ के शुभ … Read more

मूर्धन्य रिश्ता ‘माँ’

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* माँ और हम (मातृ दिवस विशेष)…. जीवन में हर रिश्ते का अपना ही महत्व होता है। कहीं खून का रिश्ता, तो कहीं विचारों का, तो कहीं मन का। ऐसे ही अनेक रिश्तों की माला में गुथा होता है यह मानव जीवन, लेकिन इन सभी रिश्तों से अलग है माँ और … Read more

चुनाव:राजनेता पराए दुःख को अपना क्यों नहीं मानते ?

ललित गर्ग दिल्ली************************************** लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे हैं, राजनेताओं एवं उम्मीदवारों के दागदार चरित्र की परतें खुलती जा रही है। एक समय था, जब लोग देश के नेताओं के सार्वजनिक जीवन में आचरण का अनुसरण करते थे। नेताओं को भी समाज में अपनी छवि व प्रतिष्ठा की फिक्र रहती थी, लेकिन हाल के … Read more

ख़ुशी चाहिए तो सुख सूत्र अपनाइए

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन(हिमाचल प्रदेश)***************************************************** यदि हम चाहते हैं कि, हमारी जिंदगी हँसी-खुशी एवं आराम से कटे तो निम्न बातों का अनुसरण करें-🔹भगवान हमें जिस हाल में रखें, उसका शुकराना करना सीखें। शुकराना करने से कष्ट भी हँसते-हँसते कट जाते हैं।🔹यदि जिंदगी में सफल होना चाहते हों तो, जिंदगी का उद्देश्य जरूर निर्धारित करो और … Read more

देश की सेहत के लिए ‘नशा’ नासूर

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** किसी भी देश की प्रगति और उज्जवल भविष्य के सौष्ठव का कल्पनात्मक सम्भावित अनुमान उस देश की युवा पीढ़ी से लगाया जाता है। वह पीढ़ी अपने व्यक्तिगत चरित्र और बौद्धिक पक्ष का निर्माण किस प्रकार से करती है ? उसका कल्पनात्मक, भावात्मक और संवेगात्मक विकास किस प्रकार के सामाजिक वातावरण में … Read more

कांग्रेस की दिशाहीनता

ललित गर्ग दिल्ली************************************** लोकसभा के चुनाव उग्र से उग्रतर होते जा रहे हैं। जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ रहे हैं, कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। भाजपा की ओर रुख करते नेताओं ने कांग्रेस की नींद उड़ा कर रख दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आक्रामक, तीक्ष्ण एवं तीखे आरोप लगाने वाली कांग्रेस दल में … Read more

जो हार मान ले, वह मनुष्य नहीं

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** जीवन संघर्ष (मजदूर दिवस विशेष)… यदि जीवन है तो, संघर्ष भी है। कहते हैं कि, जो मनुष्य जीवन में संघर्षों का सामना न करे, जीवन से हार मान ले, कुछ भी न करे, वह मनुष्य मृतक के समान होता है। संघर्ष केवल मनुष्य जीवन ही नहीं करता। तालाब में तैरती एक … Read more

‘हँसी’ एकजुट करने में सक्षम

ललित गर्ग दिल्ली************************************** ‘विश्व हास्य दिवस’ (५ मई) विशेष… ‘विश्व हास्य दिवस’ एक उपहार है, एवं बिना खर्च के खुशियाँ मनाने एवं हंसकर तनाव दूर करने का विलक्षण एवं अद्भुत दिन है। यह हमें एकजुट करता है, जीवन को बेहतर बनाता है। मई महीने के पहले रविवार को मनाए जाने वाला यह दिन हँसने-हँसाने के … Read more

जनभाषा में मिले विधि-न्याय, व्यापार-व्यवसाय व शिक्षा और रोज़गार

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** चुनावी माँग-पत्र….. राष्ट्र केवल कोई भूमि का टुकड़ा नहीं होता। राष्ट्र बनता है उसकी सभ्यता और संस्कृति से, वहाँ के ज्ञान- विज्ञान, धर्म आध्यात्म और मौलिक चिंतन से। भाषा के माध्यम से ये निरंतर आगे बढ़ते हैं। यह भी कह सकते हैं कि, भाषा एक बहती हुई नदी की तरह है, … Read more