चुनावी शतरंज:नीति ही राजा, मोहरे और चाले हों

ललित गर्ग दिल्ली************************************** २०२४ के लोकसभा चुनाव को लेकर शतरंज की बिसात बिछ रही है। कुछ ही हफ्ते बचे हैं और भारतीय जनता पार्टी एवं सभी विपक्षी दल शतरंज की चालों की तरह अपनी-अपनी चालें चल रहे है। भाजपा एवं इंडिया गठबंधन दोनों ही खेमों में अब हर दिन चुनावी रणनीति को लेकर शतरंज की … Read more

अपनी परम्परा-संस्कृति को नहीं भूलें

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** आया मनभावन वसंत… प्रति वर्ष वसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा- आराधना की जाती है। वसंत ऋतु बड़ी ही मनभावन ऋतु है। इसका सबको बेसब्री से इंतज़ार रहता है। वसंत माह में शीतल हवाएँ, हरे-भरे पेड़- पौधे, चारों तरफ हरियाली ही हरियाली, खेत में सरसों के पीले फूल इस … Read more

यही क्षण व्यक्तिवादी मनोवृत्तियों को बदलने का

ललित गर्ग दिल्ली************************************** आया मनभावन बसंत…. मन की, जीवन की, संस्कृति की, साहित्य की, प्रकृति की असीम कामनाओं का अनूठा त्योहार है बसंत पंचमी, जो हर वर्ष माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है। दूसरे शब्दों में बसंत पंचमी का दूसरा नाम सरस्वती पूजा भी है। बसंत पंचमी को श्रीपंचमी, … Read more

आनंद-उल्लास का दूजा नाम ‘वसंत’

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ आया मनभावन वसंत… प्रकृति के नवाचार के लिए नई उम्मीद, नए संकल्प से जब तन-मन दोनों जुड़ जाते हों, आसमान का सूर्य भी अपनी किरणों को फैलाने के लिए लालायित रहता हो, जब खुशियों के पंख लगे हों, भंवरे गुंजन करते हों, संगीत की स्वर लहरियाँ कानों में गूंज रही … Read more

अपने मन-मस्तिष्क को जागृत रखें

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)********************************************* आया मनभावन वसंत…. २-४ दिन से मुम्बई वाले भवन-समूह के बगीचे में दोस्तों के बीच यही चर्चा रही कि, पतझड़ ही अभी तक शुरू नहीं हुआ है और बसन्त पंचमी नजदीक आ रही है, जबकि बसन्त पंचमी तक वन-उपवन, बाग-बगीचों में लताएं नए-नए लाल-हरे कोमल पत्तों से ही नहीं, बल्कि नाना … Read more

जंगल को अतिक्रमण से बचाने की कोशिश

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** “तुझे पता है कि, इंडोनेशिया के लोग पर्यावरण के प्रति कितने जागरूक हैं ?”“आप ही बता दो ना दादी।”“यह तो पता ही है ना कि, कुछ लोगों की धनलिप्सा ने धरती का इतना दोहन किया है कि, वह अब चीत्कार कर रही है। पर्यावरण संतुलन इस कदर बिगड़ गया है कि, कहीं … Read more

नए भारत में ‘महावीर’ बनना ही सार्थकता

ललित गर्ग दिल्ली************************************** राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भगवान महावीर के २५५०वें ‘मोक्ष कल्याणक दिवस’ को मनाने की सार्थक पहल करके एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। कल्याणक महोत्सव का महत्व सिर्फ जैनियों के लिए ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज के लिए है। महावीर की शिक्षाओं की उपादेयता सार्वकालिक, सार्वभौमिक एवं सार्वदेशिक है, दुनिया के … Read more

अच्छी किताबों की घरेलू पहुंच सुनिश्चित हो

ललित गर्ग दिल्ली************************************** विश्व पुस्तक मेला… इंसान की ज़िंदगी में विचारों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान है। वैचारिक क्रांति एवं विचारों की जंग में पुस्तकें सबसे बड़ा हथियार है। यह हथियार जिसके पास हैं, वह ज़िंदगी की जंग हारेगा नहीं। जब लड़ाई वैचारिक हो तो पुस्तकें हथियार का काम करती हैं। पुस्तकों का इतिहास शानदार और … Read more

लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतिष्ठापना के लिए समान कानून की बड़ी जरूरत

ललित गर्ग दिल्ली************************************** उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने समान आचार संहिता (यूसीसी) के मसौदा बिल को मंजूरी दे दी है, इसी विशेष सत्र में इसे आसानी से पारित भी कर दिया जाएगा। इस तरह देश को आजादी मिलने के बाद यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बन जाएगा। इससे पहले गोवा में यह लागू है। आजादी … Read more

सभी २२ भारतीय भाषाओं का समर्थन मौजूद

बालेन्दु शर्मा दाधीच (प्रौद्योगिकीविद्) ****************************************************** महावीर सरन जैन के लेख पर टिप्पणी…. आदरणीय महावीर सरन जैन जी के लिए अत्यंत सम्मान रखते हुए मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि, यह बात तथ्यपूर्ण नहीं है कि, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अपने सॉफ़्टवेयर के लिए भारतीय भाषाओं में भाषा पैक नहीं बनातीं। विंडोज़ में सभी २२ भारतीय भाषाओं का … Read more