नारी समान दर्जे की अधिकारी

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)********************************************* अस्तित्व बनाम नारी (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष)… इसमें शक की गुन्जाईश ही नहीं है कि, भारतीय समाज आज भी पुरुष प्रधान समाज है। यह सही है कि, आजकल बच्चियों को पढ़ाया जा रहा है, अर्थात शिक्षा से वंचित रखने वाली सोच एक तरह से समाप्तप्राय: हो गई है, लेकिन पढ़ाई के … Read more

‘अमृत काल’ में नारी का जीवन भी अमृतमय बने

ललित गर्ग दिल्ली************************************** ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ विशेष…. महिलाओं की भागीदारी को हर क्षेत्र में बढ़ावा देने और महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए हर वर्ष ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ मनाया जाता है। महिला अधिकार कार्यकर्ता रहीं क्लारा जेटकिन ने १९१० में इस दिवस की बुनियाद रखी थी। इस दिन पर सामाजिक, … Read more

आस्तित्व के लिए संघर्ष जारी रखें महिलाएँ

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ अस्तित्व बनाम नारी (महिला दिवस विशेष)… ‘निर्भया’ कांड के बाद से वर्तमान समय में ऐसा सैलाब उमड़ पड़ा है कि, नारी सुरक्षा को लेकर हर शहर-गाँव में महिलाओं के प्रति जनजागरण किया गया और सामाजिक बुराइयों के प्रति सभी एकसाथ आगे आए। नारी शक्ति व सुरक्षा के लिए कई कानून … Read more

‘मोती’ हिंसक उत्पाद ?

डाॅ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’इन्दौर (मध्यप्रदेश)**************************************** ‘मोती’ या मोतियों से बनी माला प्रायः सभी लोगों ने अवश्य देखी होगी। मटर के दाने के बराबर गोल-गोल सफेद दूधिया रंग के चमकदार पत्थर के टुकड़े की तरह दिखने वाले मोती को पाने के लिए सभी लालायित रहते हैं। मोती को न केवल आभूषणों में उपयोग किया जाता है, … Read more

अधिकतम मतदान… एक क्रांतिकारी शुरूआत

ललित गर्ग दिल्ली************************************** प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकतंत्र के महाकुंभ चुनाव में पहली बार मतदाता बने युवाओं से कीर्तिमान संख्या में मतदान का आग्रह किया है। अधिकतम संख्या में मतदान लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण होने के साथ लोकतंत्र के बलशाली होने का आधार है और जनता की सक्रिय भागीदारी का सूचक है। इस बार … Read more

शिक्षा और जनाधिकार के प्रति जागृति अपेक्षित

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* वस्तुत:, भ्रष्टाचारी सांसद- विधायक के चुने जाने पर पार्टी जिम्मेदार है, या आम आदमी ?, यह एक गंभीर और विचारणीय प्रश्न है। अब भी भारतीय लोकतांत्रिक जन मानस की सत्तर प्रतिशत जनता शिक्षा और सामाजिक राजनीतिक शिक्षालोक से वंचित है। जिस देश के ८० प्रतिशत लोग आज भी ५ … Read more

स्वार्थ त्यागो, वन्य जीवों की रक्षा जरूरी

ललित गर्ग दिल्ली************************************** ‘विश्व वन्य जीव दिवस’ (३ मार्च) विशेष… अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का अंधाधुंध दोहन करने में डूबे इंसान को अब यह अंदाजा ही नहीं रह गया है कि, उसने अपने साथ-साथ लाखों वन्य जीवों के लिए इस धरती पर रहना कितना दूभर कर दिया है। तथाकथित विकास एवं स्वार्थ के नाम … Read more

‘इंडिया गठबंधन’ भाजपा के लिए चुनौती बनना मुश्किल

ललित गर्ग दिल्ली************************************** अंधेरों एवं निराशा के गर्त में जा चुके एवं लगभग बिखर चुके ‘इंडिया गठबंधन’ के लिए कुछ अच्छी खबरों ने जहां उसमें नए उत्साह का संचार किया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी के लिए चिन्ता के कारण हैं। पहले उत्तर प्रदेश और फिर दिल्ली में समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी से … Read more

जैसे को तैसा

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** एक शहर में राजवीर नाम का व्यक्ति था, जो बहुत ही घमंडी था। उसे अपने पिता रघुवीर जी के ज़िला अधिकारी होने का बहुत ज़्यादा घमंड था। उसे लगता कि, उसके जैसा और कोई नहीं है इस संसार में। राजवीर एक छोटे से दफ़्तर में काम करता था, वहाँ भी अपने … Read more

भारत:समृद्धि के शिखर एवं गरीबी के गड्ढे…विडम्बना

ललित गर्ग दिल्ली************************************** वैश्विक संस्था ‘ऑक्सफैम’ ने अपनी आर्थिक असमानता रिपोर्ट में समृद्धि के नाम पर पनप रहे नए नजरिए, विसंगतिपूर्ण आर्थिक संरचना एवं अमीरी-गरीबी के बीच बढ़ते फासले की तथ्यपरक प्रभावी प्रस्तुति समय-समय पर देते हुए इसे संतुलित एवं समानतामय संसार-संरचना के लिए घातक बताया है। संभवतः, यह एक बड़ी क्रांति एवं विद्रोह का … Read more