व्यक्तित्व-कृतित्व को अपनाने की नितान्त आवश्यकता

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** १२ जनवरी १८६३ का दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के नाम से विशेष रूप से अंकित है। हालांकि, विवेकानंद जी का बचपन का नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था, पर भारतीय वैदांतिक ज्ञान की प्राप्ति के पश्चात स्वामी रामकृष्ण परमहंस के सानिध्य में आकर उन्हें स्वामी … Read more

युवाओं के लिए स्वर्ण अवसर है ‘स्टार्ट-अप’

रत्ना बापुलीलखनऊ (उत्तरप्रदेश)***************************************** वास्तव में भारत जैसे विशाल जनसमूह के देश में स्टार्ट-अप योजना एक नई सोच, नई क्रान्ति एवं एक नया आविष्कार ही है, जो हमारे ब्रम्हाण्ड में नाद एवं ओंकार के रूप में व्याप्त है और सदा रहेगा, जिसकी अवधारणा हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने हमारे प्राचीन ग्रन्थ, वेद, ऋचाओं, उपनिषदों में संग्रहित की … Read more

हिन्दी:राष्ट्रीयता की प्रतीक भाषा की उपेक्षा क्यों ?

ललित गर्ग दिल्ली************************************** ‘विश्व हिन्दी दिवस’ विशेष…. ‘विश्व हिन्दी दिवस’ मनाने का उद्देश्य दुनियाभर में फैले हिंदी जानकारों को एकजुट करना, हिन्दी को विश्व स्तर पर स्थापित एवं प्रोत्साहित करना और हिंदी की आवश्यकता से अवगत कराना है। अंग्रेजी भाषा भले ही दुनियाभर के कई देशों में बोली और लिखी जाती है, लेकिन हिंदी हृदय … Read more

हिन्दी की गरिमा और उपयोगिता बढ़ती रहे, यही लक्ष्य हो

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* विश्व हिंदी दिवस विशेष…. प्रत्येक वर्ष भारत में १० जनवरी को ‘विश्व हिंदी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। हमारे भारत में हिंदी राजभाषा, संपर्क भाषा, राष्ट्रभाषा, राज्य भाषा और मातृभाषा के रूप में प्रयुक्त हो रही है। भाषा और साहित्य को किसी परिधि में बांधा कर नहीं रखा … Read more

पक्षियों का कलरव एवं ऊर्जा खत्म होना बड़ी चुनौती

ललित गर्ग दिल्ली************************************** देश एवं विदेशों में विलुप्त हो रही विभिन्न पक्षियों की प्रजातियों को बचाने के लिए वर्तमान में ‘राष्ट्रीय पक्षी दिवस’ की प्रासंगिकता बढ़ी है। सिर्फ अमेरिका में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर और भारत में भी इसकी विशेष प्रासंगिकता है, क्योंकि यहाँ भी अधिकांश पक्षी प्रजातियों को गंभीर भविष्य का सामना करना पड़ … Read more

वर्चस्व

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************** नेता जी अपने कार्यकर्ताओं के समक्ष अपनी उपलब्धियों का बखान कर रहे थे,“आज मैंने इस ब्रह्माण्ड पर अपना वर्चस्व बना लिया है। सजीव-निर्जीव सभी पर आज मेरा अधिकार है। पैसे के बल पर सब कुछ खरीद सकता हूँ। ये दुनिया सिर्फ पैसे के दम पर टिकी है। मैं इतना सम्पन्न … Read more

पुरुषार्थ एवं जीवंत धर्म की प्रेरणा हैं भगवान पार्श्वनाथ

ललित गर्ग दिल्ली************************************** जन्म जयंती (७ जनवरी) विशेष… भगवान पार्श्वनाथ सत्य की तलाश में राज-वैभव को त्याग संसार में संन्यस्त हुए। उन्होंने कठिन तप, वितरागता तक पहुंचकर अपने जीए गए सच को भाषा दी। जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर के रूप में उन्होंने वास्तविक धर्म को स्थापित कर उपदेश दिया कि, यदि धर्म इस जन्म … Read more

खोजने होंगे नए साल में अनुत्तरित सवालों के जवाब

ललित गर्ग दिल्ली************************************** नया साल प्रारंभ हो गया है तो हर बार की तरह इस बार भी नई उम्मीदें, नया विश्वास एवं नया धरातल लाया है। नए की स्वीकृति के साथ पुराने को अलविदा कह देने की सामान्य सोच रही है। यह समझ देखी गई है कि, नयेपन के जादुई आकर्षण के जागते ही हम … Read more

भारतीय भाषाओं में हैं चिकित्सा-विज्ञान का महासागर

डॉ. मनोहर भंडारीइन्दौर (मप्र)*************************** भारतवर्ष के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत की स्वतन्त्रता के अमृतोत्सव पर सार्वभौमिक हितार्थ पूरे विश्व में पारम्परिक चिकित्सा की पुनर्प्राण-प्रतिष्ठा का शंखनाद किया है। यदि हम अपने पारम्परिक ज्ञान पर विश्वास कर उनके आधार पर शोध करते तो उपवास, जैविक घड़ी और कैंसर के कारण की खोज पर मिले … Read more

सामन्जस्य से ही परिवार में शान्ति

दिनेश चन्द्र प्रसाद ‘दीनेश’कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)******************************************* ‘दो औरतें पुरुष के जीवन में रहती हैं शामिल।पुरुष कैसे सामन्जस्य बैठाए, यही है मुश्किल।’यह विषय बहुत ही गम्भीर और समस्या युक्त है। इस परिस्थिति से प्राय: सभी को गुजरना पड़ता है। बहुत कम लोग ही इसमें सामन्जस्य बिठा पाते हैं। सफल वही पुरुष हो पाते हैं, जिनकी पत्नी … Read more