संस्कारवान हो शौक या मनोरंजन

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* चिंतन… मनुष्य एक सामाजिक प्राणी के साथ विवेकशील जानवर है, जिसमें अपने काम करने की असीम सम्भावनाएँ हैं। जानवर से तात्पर्य इतना है कि, प्रत्येक जानवर अपने धरम-संस्कार का पालन करता है तथा मनुष्य सब जानवरों के गुणों को अंगीकार कर रहा है और करता था। सामाजिक प्राणी होने के कारण उसे अपने … Read more

बगावती होते टिकट वंचित नेता, यही वफादारी ?

ललित गर्गदिल्ली************************************** ५ राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले अनेक राजनीतिक दलों एवं उनके नेताओं के बीच बड़ी उठा-पटक, खींचतान एवं चरित्रगत बदलाव देखने को मिल रहे हैं। राजस्थान एवं मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस ही आमने-सामने की स्थिति में है, लेकिन टिकट बंटवारे को लेकर दोनों ही दलों में दोनों ही राज्यों … Read more

बेमिसाल उपमाओं-रचनाओं के अद्वितीय महाकवि

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* कालिदास जयंती (४ नवम्बर) विशेष… साहित्य के क्षेत्र में अभी तक हुए महान कवियों में कालिदास जी अद्धितीय हैं। उनके साहित्यिक ज्ञान का कोई वर्णन नहीं किया जा सकता। कालिदास जी की उपमाएं बेमिसाल हैं, और उनके ऋतु वर्णन तो अद्वितीय है। मानो कि, संगीत कालिदास जी के साहित्य का मुख्य अंग है। … Read more

सार्वजनिक कार्यक्रम में ‘डीजे’ मतलब मौत को निमंत्रण

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* चिंतन… हमारे देश में ७ वार और ९ त्यौहार मनाए जाते हैं तथा देश स्वतंत्र होने से स्वच्छंदता से भरपूर है। धर्म के नाम पर इतने कट्टर हैं कि, धर्मस्थल के सामने आवाज़ बंद हो जाती है, पर जीवित इंसानों की कोई कीमत नहीं है। ऐसे ही मरणोपरांत सम्मान और इज़्ज़त मिलती है, … Read more

अंधी दुनिया में गुम होती किशोर पीढ़ी

ललित गर्गदिल्ली************************************** संचार-क्रांति से दुनिया तो सिमटती जा रही, लेकिन रिश्तों में फासले बढ़ते जा रहे हैं। भौतिक परिवर्तनों, प्रगति के आधुनिक संसाधनों एवं तथाकथित नए जीवन का क्रांतिकारी दौर हावी है, लेकिन हम सामाजिक-पारिवारिक-सांस्कृतिक प्रभावों के प्रति उतने सजग नहीं हैं, जितना बदलावों की आंधी के दौर में होना चाहिए। मोबाइल ने छीन रखा … Read more

राष्ट्रगान ही राष्ट्र की पहचान व सम्मान

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* हमारे देश और अभी कुछ दिनों पूर्व किसी अन्य देश में राष्ट्रध्वज का अपमान किया गया, उसको पैरों से कुचला और अपने देश के निवासियों ने ही अपमान किया तथा उस पर ख़ुशी मनाई, जो हम देशवासियों के लिए लज़्ज़ा की बात हुई। राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान के लिए लाखों लोगों ने अपना बलिदान … Read more

वेश-भूषा

दिनेश चन्द्र प्रसाद ‘दीनेश’कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)******************************************* बढ़ी हुई दाढ़ी, मैले-कुचैले एवं फटे कपड़े, टूटी चप्पल पहने एक व्यक्ति शहर की सबसे बड़ी पाँच सितारा होटल में घुसने की कोशिश कर रहा था। गेट पर खड़े दरबान उसे डाँटकर भगा रहे थे, अंदर घुसने नहीं दे रहे थे। लाख कोशिश के बावजूद वह होटल न जा … Read more

अमेरिकी छवि को दागदार करती बन्दूक ‘संस्कृति’

ललित गर्गदिल्ली************************************** दुनिया में स्वयं को सभ्य एवं स्वयं-भू मानने वाले अमरीका में ‘बंदूक संस्कृति’ के साथ लोगों में बढ़ रही असहिष्णुता, हिंसक मनोवृत्ति और आसानी से हथियारों की सहज उपलब्धता का दुष्परिणाम बार-बार होने वाली दुखद घटनाओं के रूप में सामने आना चिन्ताजनक है। अमेरिका में १ हत्यारे ने गोलियाँ बरसाकर करीब २१ लोगों … Read more

दिखावे की प्रतिस्पर्धा से भक्ति घटी

रत्ना बापुलीलखनऊ (उत्तरप्रदेश)***************************************** शक्ति, भक्ति और दिखावा… भक्ति, शक्ति और दिखावा ये तीनों शब्द एक-दूसरे के पूरक होते हुए भी अर्थ एंव साम्यर्थ में भिन्न हैं। हिन्दुओं का हर त्यौहार भक्ति-भावना की ज्योति जलाकर ही आता है, पर आजकल इस भक्ति-भावना में आडम्बर एवं दिखावे का इतना बाहुल्य है कि, भक्ति-भावना तिरोहित हो गई है।यह … Read more

दंत विहीन संघ संयुक्त राष्ट्र

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* संयुक्त राष्ट्र संघ का महत्व वर्तमान में उतना प्रभावशाली नहीं है। वह बिना दांत का शेर है, क्योंकि संघ में विकसित देशों की पकड़ है। पिछले वर्ष रूस और यूक्रेन युद्ध में संयुक्त राष्ट्र ने कोई भी महती भूमिका नहीं निभाई। वर्तमान में इज़राइल और हमास के युद्ध में संयुक्त राष्ट्र मूक दर्शक … Read more