संस्कारवान हो शौक या मनोरंजन
डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* चिंतन… मनुष्य एक सामाजिक प्राणी के साथ विवेकशील जानवर है, जिसमें अपने काम करने की असीम सम्भावनाएँ हैं। जानवर से तात्पर्य इतना है कि, प्रत्येक जानवर अपने धरम-संस्कार का पालन करता है तथा मनुष्य सब जानवरों के गुणों को अंगीकार कर रहा है और करता था। सामाजिक प्राणी होने के कारण उसे अपने … Read more