नीयत और बरकत

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************** किसी गाँव में तीन भाई थे। वे जाति से कुम्हार थे। उनका पिता सीधा-साधा, ईमानदार,परिश्रमी और विवेकी था। समय से पिता ने अपनी सूझ-बूझ से तीनों के कारोबार और परिवार का अलग-अलग निर्वाह करने का आदेश दे दिया। पिता को पसंद नहीं था कि कारोबार को लेकर तीनों भाइयों और … Read more

सबक जिंदगी का

मंजू भारद्वाजहैदराबाद(तेलंगाना)******************************************* फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… चारों तरफ होली का माहौल था। ‘होली है…होली है…’ की गूंज सुनाई दे रही थी। मैं और बहू रागिनी रसोई में पकवान बनाने में व्यस्त थे। तभी दरवाजे पर जोर-जोर से घंटी की आवाज सुन कर रागिनी दरवाजे की तरफ भागी।‘गरम चाय की प्याली हो….सामने बैठी घर … Read more

चुभन

सुश्री नमिता दुबेइंदौर(मध्यप्रदेश)******************************************** सारिका इंदौर मे जन्मी भारतीय संस्कारों में घड़ी रुड़की से आई.आई.टी. कर अमेरिका की एक नामी कम्पनी कार्यरत थी, कार्य के दौरान ही उसका परिचय सूरज से हुआ था। विचारों की समता परिणय में परिलक्षित हुई। उन्होंने अपनी बेटी निकिता को भी विदेशी मिट्टी में स्वदेशी संस्कारों की सौंधी महक से पोषित … Read more

खुशियों के रंग

उपासना सियागफिरोजपुर(पंजाब)************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… त्यौहार का दूसरा नाम होता है खुशियां। कोई भी त्यौहार हो,जैसे-जैसे नज़दीक आने लगता है, मन में अपने-आप ही उल्लास का समावेश होने लगता है। होली तो सभी का प्रिय त्यौहार होता है। होता भी क्यूँ नहीं,इस दिन रंग-पानी खेलने की पूरी छूट होती है,लेकिन होली तो … Read more

रंगरेज

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************ फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… ‘समय’ अपनी गति में,तेजी से आगे बढ़ रहा था, और साथ मे मेरी ट्रैन भी। ‘गुड़िया’ को अपने सीने से लगाए मैं चुपचाप चली जा रही थी! एक ऐसी यात्रा पर,जिसकी कोई मंजिल नहीं थी।आज होलिका दहन है,रास्ते में कई छोटे-छोटे गाँव पड़े,जहां पर रात्रि … Read more

कोई अपना-सा

शिवनाथ सिंहलखनऊ(उत्तर प्रदेश)**************************************** पीताम्बर जब प्राइवेट वार्ड के एक कमरे में पहुँचा तो देखा कि बाबू विलासराव बिस्तर पर अचेतावस्था में पड़े हुए थे। एक ओर कैथेटर लगा था तो दूसरी ओर एक-दो मशीनें भी। उनके पास दवाओं का ढेर जरूर लगा हुआ था पर पास में कोई सहयोगी न था। बहुत अजीब-सा वातावरण था,तभी … Read more

तुम केन्द्र हो,हम धुरी

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़रदेवास (मध्यप्रदेश)****************************************** महिला दिवस स्पर्धा विशेष…… दफ़्तर से घर लौटते ही रमेश निढाल होकर पलँग पर पड़ गया,आज उसके चेहरे पर बहुत ज़्यादा उदासी और थकान के भाव थे। पत्नी आशा ने पूछा -‘क्या बात है ? सब ठीक तो है न ? आप बहुत उदास और थके हुए से लग रहे हैं। … Read more

प्रारब्ध

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़रदेवास (मध्यप्रदेश)****************************************** देर रात को नशे में घर लौटे बेटे को नरेश बाबू ने समझाते हुए कहा कि-‘बेटा ऐसा कब तक चलेगा…? तुम रोज देर रात घर लौटते हो,वो भी नशे में,अपने आवारा दोस्तों की संगत में कुछ ज़्यादा ही बिगड़ गए हो। कोई छोटी-मोटी प्रायवेट नौकरी क्यों नहीं ढूंढ लेते। हम कब … Read more

स्वाभिमान

तृषा द्विवेदी ‘मेघ’उन्नाव(उत्तर प्रदेश)***************************************** वह पहला ही दिन था जब वर्तिका और देवेश एक-दूसरे से मिले थे। हालांकि,वो दोनों ही सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को वर्षों से जानते थे। कितनी आसान हो गई इंटरनेट की दुनिया भी,रिश्तों का बनना और बिछड़ना सब एक खेल जैसा हो गया।इंतजार भी जैसे किसी जन्नत का रास्ता-सा लग रहा … Read more

बिल्ली और चूहा

डॉ. हंसा दीपटोरंटो (कैनेडा)************************** बीड़ी के कश खींचता हुआ वह लगातार ताक रहा था उस ओर,जहाँ आकाश और धरती एक होने जा रहे थे। सुबह की चहल-पहल शुरू हो गई थी। सभी मर्द खेतों की ओर जा रहे थे। मंगल्या बहुत देर से यूँ ही बैठा था। रात में भी न सो पाया था,न खा … Read more