मज़दूर की माटी
डॉ. पंकज कुमार बर्मनकटनी (मध्यप्रदेश )************************************** श्रम आराधना विशेष…. मुट्ठी में धूप समेटे चलता है वो हर रोज़,माथे पे पसीने का ताज लिए रखता है संजोग। मकान तेरा हो या मेरा, उसी की नींव से खड़ा,मौन रहकर भी बोलता, वो हर ईंट में जुड़ा। मुट्ठियाँ भरी नहीं कभी, फिर भी नहीं थमा,मज़बूती से थामे रखा … Read more