बिखरे रिश्ते
संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* कहाँ गया रिश्तों से प्रेम ? बिखरे हुए रिश्तों को,समटने की कोशिश मेंकैसे समेटा जाए,सोचता हूँ हर बारहार जाता हूँ कई बार….। शायद प्रयास मेरे सही नहीं!या मेरे पास वो नहींजिससे कि मुझे मिले,वह हौसला किबाँट सकूँ प्यार औरसमेट लूँ बिखरे हुए रिश्ते,फिर से एक बार…। बने-बनाए रिश्तों को,बनाए रखना चाहता … Read more