मज़दूर की माटी

डॉ. पंकज कुमार बर्मनकटनी (मध्यप्रदेश )************************************** श्रम आराधना विशेष…. मुट्ठी में धूप समेटे चलता है वो हर रोज़,माथे पे पसीने का ताज लिए रखता है संजोग। मकान तेरा हो या मेरा, उसी की नींव से खड़ा,मौन रहकर भी बोलता, वो हर ईंट में जुड़ा। मुट्ठियाँ भरी नहीं कभी, फिर भी नहीं थमा,मज़बूती से थामे रखा … Read more

बताओ कौन है श्रेष्ठ…?

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ************************************************************* देखो वह रामलाल का लाल,लाल बाबू है बड़ा ही कमालबचपन से ही पढ़ने में तेज,पढ़ाई बिना लगाता नहीं सेज। पढ़ता वह मन लगाकर दिन-रात,गुरूजन भी देते उनका सदा साथसाथ पा पढ़ाई हुई उनकी पूरी,करने लगा अब नौकरी की तैयारी। तैयारी उसकी लाने लगी रंग,जीवन में अब छाई उमंगबाबू बन गया … Read more

जी लेने दो…

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* तनिक थोड़ा-सा आराम तो करने दो,दो पल लिए मन को बहला लेने तो दो। कुछ पल लिए ही सही, जी लेने दो,तनिक थोड़ा-सा आराम करने दो। दबाते रहते हैं अपने जज्बातों को,कुछ पल लिए ही सही जी लेने दो। नहीं है शिकवा कभी भी किसी से,अपने अरमानों में जी लेने तो … Read more

तू है सृजनकार

डॉ. अमलपुरे सूर्यकांत विश्वनाथरायगढ़ (महाराष्ट्र)***************************************** श्रम आराधना विशेष… है मजदूर तू है सृजनकार,गगन चुम्बी इमारत खड़ी है आपके श्रम पर। घर सबके बनाते हो आप,झोपड़ी में जिंदगी बिताते हो आप। खेत में अनाज उगाते हो आप,घर में दिखता नहीं कोई अनाज का दानाफिर भी खुश रहते हो आप। खाली है आपका पेट, जैसे उपवास रखा … Read more

शोर बहुत

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** दायरे और बढ़े ये कोई अच्छा तो नहीं,वो सुधर जाएगा ऐसा कोई वायदा तो नहीं। शहर में शौर है सड़कों पे हैं इंसान बहुत,होने वाला है यहीं आज कोई जलसा तो नहीं। झूठ को सच में बदलना उसे आता ही नहीं,आईना आईना है, उसका कोई अपना तो नहीं। उसने देखा … Read more

कब तक सहेंगे…?

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** आतंक, विनाश और ज़िंदगी… (पहलगाम हमला विशेष)… धर्मनिरपेक्षता का ढिंढोरा अब क्यों पीटे ?जब हम शांति पूर्ण, मैत्रीयता का पालन करते आ रहे।ऐसा पाकिस्तान में कहाँ होता ?पहलगाम में हिन्दुओं पर हुए नरसंहार परअब, सभी देश चुप क्यों है ?यह सवाल पहलगाम पूछ रहाआतंक, विनाश और ज़िंदगी को कब तक सहेंगे। … Read more

मैं कामगार

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जान मुझे हूँ कामगार मजदूर समझ ले मुझको,कर्मवीर मैं श्रमिकवीर हूँ, स्वाभिमान समझ ले मुझको। शिथिल गात्र और ढंसा गर्त नैनाश्रु समझ ले मुझको,है क्षुधार्त जठरानल तपते तृषार्त समझ ले मुझको। गठरी कुदाल ले ढाल बना बदहाल समझ ले मुझको,सड़क पड़ा चीथड़ों में लिपटा लाचार समझ ले मुझको। लावारिस … Read more

आतंक के विरुद्ध अब निर्णायक युद्ध हो

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* आतंक, विनाश और ज़िंदगी (पहलगाम हमला विशेष)… क्यों चीखे गूँजी घाटी में सिंह नाद करना होगा,निर्दोषों का क्यूँ खून बहा, शंखनाद करना होगातेरी गीदड वाली धमकी से तो हम नही डरने वाले,तेरी नीची करतूतों से हम नहीं मरने वाले। निर्मम क्रूर विध्वंस किया है, उनकी आँखों के आगे,सिंदूर उजाडा माँगों … Read more

वो जीवट पुतले

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* हमारे सपनों का घरौंदा जो मेहनत से बनाते हैं,बड़ी-बड़ी इमारतों को धरती पर साकार करते हैंकागज़ पर अदभुत-सा नक्शा तो आप बनाते हो,पथरीली जमीन पर उसे श्रमिक आकार देते हैं। बारिश में भीगते तल्लीन से लगे रहते हैं,मौसम की मार से बेखबर कर्म करते हैंकर्म के प्रति उनकी ऐसी जुझारू प्रवत्ति,जैसे … Read more

देशद्रोहिता सहन न होगी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* आतंक, विनाश और ज़िंदगी (पहलगाम हमला विशेष)… घर का भेदी लंका ढाए, बात सही है,उसको तो अब मारा जाए, बात सही है। देशद्रोहिता सहन न होगी, कुछ तो करना होगा,जो भी दुश्मन छिपे देश में, उनको मरना होगा। और नहीं हम सहन करेंगे, ताक़त अब दिखलाएंगे,जो भी भेदी मौज मनाते, … Read more