सच कहता हूँ…

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** सच कहता हूँ मान बेचकर,मैं सम्मान नहीं लेता हूँ। अन्तर्मन के आँसू का,मैं बलिदान नहीं लेता हूँ। मुझे बिलखते बच्चों की,पीड़ा सहन नहीं होती। छोड़ गोद के बच्चे को,मैं भगवान नहीं लेता हूँ॥ पकवानों से सजा थाल भी,मुझको रास नहीं आता। परिधान भूप-सा पाऊँ वो भी,मुझको खास नहीं भाता। टूटे … Read more

पृथ्वी के मुख पर कालिख़

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… जब मैं जन्मी, पूरी की पूरी पृथ्वी मेरे इर्द-गिर्द थी, पहाडों से फूटते झरने सरसराते पेड़ों से लिपटी लताएँ, खिलखिलाते अनगिनत फूल घनघोर बरसती हुई बारिश और हवा ने, मेरी नन्हीं-नन्हीं हथेलियों को चूम लियाl बचपन की हर सुबह, मैदानों में होती थी … Read more

सीख गई सबक निम्मी

निशा सतीशचन्द्र मिश्रा यामिनी मुंबई(महाराष्ट्र) ************************************************ निम्मी अभी कॉलेज से आती ही होगी, यह सोच जल्दी-जल्दी घर के काम को आभा निपटाते हुए जल्दी से किचन में जाकर दोपहर के खाने की तैयारी करने लगी।सारा काम ख़तम होने के बाद जैसे ही आभा सोफे पर बैठी ही थी कि,दरवाजे की घंटी बजी और बाहर से चिल्लाने … Read more

हरी-भरी हो धरा

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… लो संकल्प- हरी-भरी हो धरा, नहीं विकल्प। एक ही नारा- प्रदूषण मुक्त हो, देश हमारा। बीमार मन- उगे चारों तरफ़, कांक्रीट वन। कटते वन- बंजर धरती से, दुःखी है मन। एक ही दवा- पेड़-पौधों से मिले, शीतल हवा। पृथ्वी बचाओ- स्वस्थ और सुंदर, … Read more

धरा

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… धरा करती श्रृंगार, देखो वर्षा की फुहार हरियाली हर ओर, धरती हरियाई। छाई है देखो बहार, नाचता है मन मोर हो गई सुहानी भोर, धरा खिलखिलाई। कोयल की मीठी तान, पपीहे की देखो शान कामदेव छोड़े बान, रति भी मुस्कुराई। घनघोर घटा छाई, मोरनी नृत्य … Read more

आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* ‘आत्मजा’  खंडकाव्य से,अध्याय-८ … बोली माँ पति से समझा कर, अब है समय नहीं सोने का खोजो वर सुयोग्य बेटी को, नहीं एक भी क्षण खोने का। हुई सयानी बेटी अपनी, लगी समझने वह सब बातें भावी के प्रति ही आकर्षण, बढ़ता ज्यों बढ़ती दिन-रातें। रहती वह खोयी-खोयी-सी, जैसे अपने को … Read more

श्रृंगार धरा का

डॉ.आभा माथुर उन्नाव(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… आओ करें श्रृंगार धरा का, नूतन वस्त्राभूषणों से हरीतिमा की चुनर लाओ, शर्माई धरती को सजाओl पुष्पगुच्छ के कर्णफूल हों, पकी फ़सल हो स्वर्णमेखला कर सोलह श्रृंगार वधू का, प्रियतम के समीप ले जाओl कलकल ध्वनि से वह हास करे, खग कलरव से नित नृत्य … Read more

हमारी पृथ्वी

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… पृथ्वी है हमारी सब ग्रहों से न्यारी, इसमें ही ईश्वर जड़े हैं जीवों की क्यारी सब ग्रहों में इसका बड़ा मान है, इस पर हम सबका अभिमान है। है यह ममतामयी माता-सी महान, चोट खाकर भी हमें देती खाद्यान्न सीने को चीर देती … Read more

हुंकार

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* अपने श्रम को बेचने वाले श्रमिकों, एक हो जाओ जैसे- एक हो जाती हैं आग की लपटें, अब नहीं है तुम्हारे पास, खोने के लिए कुछ भी। तुम्हारा जीवन, जकड़ा है आर्थिक विकास के चरित्र से, तार-तार होकर जीवन चला रहे हो, फिर भी मरते हैं क्यों तुम्हारे बच्चे भूख से … Read more

चुनाव चक्रवात

छगन लाल गर्ग “विज्ञ” आबू रोड (राजस्थान) **************************************************************************** देख चुनाव उछाल है,सभी करे उत्पातl जोश भरे हर चाल में,सता भूख संतापl भूल चुके जो कर्म है,करे अनोखी बात- वोट चोट की मार से,सभी सहे अनुतापll नेता अब कहने लगे,सदा रहेगा साथl भूल-चूक सब माफ हो,मित्र तुम्ही रघुनाथl लो वादा तैयार हूँ,देने को मैं आज- वोट … Read more