चलो हरि की शरण

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** चलो हरि की शरण, छू लें हरि के चरणशुद्ध हो अंतःकरण, वस्त्र नूतन हो वरण।  करें गीता ग्रंथ का स्मरण,पाएँ वेद पांच का विवरणकरें पुरखों का भी अनुसरण, जाने कब हो जाएगा मरण ?  चित्त शुद्ध, स्वच्छ आचरण, हो भक्ति-भाव वातावरणआसक्ति का करें संवरण, मद्द्य पान का हो उद्धरण। न कर सके कोई अपहरण,हरि महिमा … Read more

युद्ध सदा विनाशकारी

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** युद्ध विनाशकारी होता है,युद्ध का अंत संहारी होता है। युद्ध तो केवल युद्ध होता है,यह तो नहीं शुद्ध होता है। शांत व्यक्ति तो प्रबुद्ध होता है,अशांत व्यक्ति अप्रबुद्ध होता है। यह अंदर और बाहर दोनों होता है,एक युद्ध हमारे अंतर्मन में होता है। दूसरा युद्ध भी बर्हियुदध होता है,इसमें अनाड़ी भी शिकारी … Read more

लोक क्रांति का अग्रदूत

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** लोक क्रांति का दूत अग्र है, श्रमिक है जिसका नाम,मेहनत करता सारे दिन वह नहीं करे आराममूढ़, अशिक्षित और उपेक्षित कहते उसको लोग,भूख-प्यास से पीड़ित वह तो क्या जाने सुख भोग। आग उगलता तपता सूरज गरम हवा का ज़ोर,कर्मक्षेत्र में व्यस्त नहीं है किसी से वह कमजोरचाहे ओला, पाला हो या झमझम … Read more

देशभक्त थे कॉमरेड ए.के. राय

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** कामगारों के मसीहा थे कॉमरेड ए.के. राय,रासायनिक अभियंता थे कॉमरेड ए.के. रायसिंदरी के जनप्रिय विधायक थे ए.के. राय, धनबाद के लोकप्रिय सांसद थे ए.के. रायजन-जन को समर्पित नेता थे ए.के. राय। विनम्र, मृदुभाषी, सरल-सहज थे ए.के. राय, शख्स व शख्सियत में अव्वल थे ए.के. रायसादगी प्रतिमूर्ति, सर्वहारा के तारा थे राय, मार्क्स, … Read more

लकीरें हाथ की

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** लकीरें हाथ की अपनेये मानव खुद सजाता है,ये दोनों हाथ की ताक़तसफल जीवन बनाता है। लिखा है जो लकीरों मेंभाग्य में जो समाया है,उसी के हाथ में सब हैकहानी ख़ुद रचाता है। अपनी शक्ति के बल सेहिमालय पर पहुँचता है,बनाता रेत में गुलशननहीं फ़रियाद करता है। छोड़ पढ़ना भाग्य में लिखी,हाथ की … Read more

स्वार्थी होती ज़िन्दगी

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* स्वार्थी होती जा रही है आज सभी की ज़िन्दगी,माता-पिता साथ नहीं रहते, फिर भी प्रेम की कमीअकेले-अकेले रह रहे हैं लोग सभी,फिर भी रिश्तों की डोर टूटती जा रही है कहीं। हाय-हाय में डूबा है हर इंसान,स्वार्थ के पीछे भाग रहा है सारा जहानकमाते बहुत हैं, फिर भी संतोष नहीं,असंतोष बढ़ता … Read more

आया पुरुषोत्तम मास

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आया पुरुषोत्तम मास, पुण्य की पावन बेला,भक्ति-भाव से भर उठता जन-जन का हर मेलानाम-स्मरण, सत्कर्मों से जीवन होता उज्ज्वल,हरि-कृपा बरसाती धरती, अम्बर व अलबेला। दान, धर्म, जप, तप से मन का नित कल्मष धुलता,सद्विचार का दीपक अंतर्मन में है जलतालोभ, मोह, अहंकार सभी चरणों में झुक जाते,पुरुषोत्तम की महिमा से भाग्य नया फिर फलता। गीता, … Read more

सपने हौसलों से पूरे होते

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हौसलों में है तेरे अभी दम बहुत,तू न थकेगा कभी, न रुकेगा कभीजब तलक मन में रहती है दुर्बलता,दु:ख में होता है दु:ख, सुख में है ममता। जग में सुख भी सदा रहने वाला नहीं,दु:ख भी जीवन में रहता हमेशा नहींछाया से माया से दोनों होते सदा,आते-जाते ही रहते हैं सुख और … Read more

घर लौटने की आख़िरी रोशनी

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** उसके भीतरएक उम्र नहीं,कई-कई उम्रें टूटती रहती हैंबिना किसी आवाज़ के। चेहरे पर सामान्य दिनों की धूल जमी रहती है,पर आत्मा मेंलगातार गिरते रहते हैंकुछ अदृश्य मकान। मैंने देखा है,कुछ लोग पूरी ज़िंदगीसिर्फ़ लौटने की इच्छा में जीते हैं। वे अपने भीतरएक पुराना आँगन बचाए रखते हैं,जहाँ माँ की पुकार अब भी … Read more

आदि अनंत महाकल्प मैं

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** हर समस्या का विकल्प मैं, हर निदान का संकल्प मैंलाचारों का एक वृक्षकल्प मैं, निर्भय हूँ, सत्य हूँ ब्रह्मकल्प मैं। न्याय हूँ, साकार हूँ प्रतिकल्प मैं, अन्याय का प्रतिकार, नरकल्प मैंराक्षसों का नाश हूँ, ग्रहकल्प मैं, पारदर्शी प्राण हूँ, तरुकल्प मैं। जागता मैं देश हूँ, न मृतकल्प मैं, स्वस्थ हूँ, आश्वस्त, न रोगीकल्प मैंकर्म … Read more