कुछ तो लोग कहेंगे…

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** लक्ष्य प्राप्त करने में हम पिछड़े ही सदा रहेंगे,काम संवरने वाले भी बिगड़े सदा रहेंगेयदि यही सोचते रह जायेंगे कुछ तो लोग कहेंगे,अपने मन को मार के क्या बेमौत ही नहीं मरेंगे ? लोगों का काम है कहना, इन बातों में क्यों बहना,‘कुछ तो लोग कहेंगे’ लोगों का काम है कहनाजीवन में … Read more

अनोखी व्हॉट्सऐप यूनिवर्सिटी

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* एक अनोखी यूनिवर्सिटी है,जिसकी बड़ी निराली शानन फीस फॉर्म न कोई इंटरव्यू,फिर भी लाखों बनते विद्वान।  न भवन कहीं, न पुस्तकालय,प्रयोगशाला का पता नहींफिर भी छात्र करोड़ों में हैं,नाम है व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी।  मोबाइल पर चलती यह,ग्रुप हैं इसकी कक्षाएंहर अफवाह पर पीएच-डी. होती,पर्सनल मैसेज हैं शोध विभाग।  पहला पीरियड सुप्रभात का,सबको एक … Read more

ब्रह्म को जानने वाला सच्चा ब्राह्मण

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** एक जून को मनाया जाता है दिवस ब्राह्मण,ब्रह्म को जानने वाला होता है सच्चा ब्राह्मण। कर्म से क्षत्रिय थे भगवान ब्राह्मण परशुराम,भविष्य पुराण में ब्राहण का शर्मा था उपनाम। वेदों धर्म औेर सत्य का ज्ञाता हैं सच्चा ब्राह्मण,शम दम तप क्षमा ज्ञान वाला है सच्चा ब्राह्मण। श्रेष्ठता जन्म से नहीं होती, बल्कि … Read more

वे हमारी प्रेरणा

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)… बच्चे केवल छोटे हाथ नहीं होते,वे समय की हथेली पर लिखे हुएआने वाले कल के हस्ताक्षर होते हैं। उनकी आँखों में चमकते हैंवे सपनेजिन्हें अभी शब्द नहीं मिले,पर जो एक दिनसमाज और राष्ट्र की दिशा तय करेंगे। जब कोई बच्चापहली बार अक्षर पहचानता … Read more

जीना न भूल जाएं…

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* कहीं ये हो न जाए,कहीं वो हो न जाएऐसा सोच कर कभी,जीना न भूल जाएं। जैसा अपने मन में आए,वैसा ही करते जा जाएंदु:ख-दर्द को भूलकर,खुल के मुस्कुराएं। जीवन मिलता नहीं दुबारा,सत्य राह पर चलते जाएंअपनों के हर गिले-शिकवे,मन से अब दूर भगाएं। आपस में सब बाँटें प्यार,एक-दूजे को अपनाएंरिश्ते होते कच्ची … Read more

सत्य-सुगंधित शब्द हों

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पत्रकार की लेखनी, जन-मन की आवाज।सत्य-सुगंधित शब्द हों, तभी बनेगा आज॥ तथ्य बिना जो लिख रहा, करता बड़ा अनर्थ।बातें झूठी बाँटकर, खो देता निज अर्थ॥ अब सामाजिक मीडिया, घातक जनसंवाद।हितकर उपयोगी कहाँ, मंचों वृथा  निनाद॥ अफवाहों के जाल में, फँसता   जन-विश्वास।सत्य-परीक्षण से विरत, बहस गालियाँ हास॥ अनदेखी अब राष्ट्रहित, फैलाते     विद्वेष।धर्म जाति भाषा घृणा, कर्म बोध  कहँ शेष॥ लोभ-मोह के फेर … Read more

तुम जल्दी कैसे सो जाते हो ?

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तुम इतनी जल्दी कैसेसो जाते हो ?जब मैं तुम्हें पढ़ती हूँ,समझती हूँ, लिखती हूँ। तुम इतनी जल्दी कैसेसो जाते हो ?जब मैं तुमसे बातें करती हूँ,बातों में बहुत कुछ इज़हार करती हूँ। तुम इतनी जल्दी कैसेसो जाते हो ?जब मैं इस अजनबी शहर में,कोसों दूर तुम्हारी यादों के साथ चलती हूँ। … Read more

बूँद-सा बन जा

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** टप-टप टपके राह बनातीबूँद न हारी चलती जाती,धीरे-धीरे वह बलखातीकठिन डगर पर वह मुस्काती। बूँद-बूँद से घट भर जाताबूँद*बूँद भर सिंधु कहाता,लघु को तुम सब लघु मत जानोलघुता ही बढ़ बड़ा हो जाता। नर तू भी बूँद-सा बन जा,नित प्रति कर्म-धर्म तू कर जा।एक दिवस जग जय-जय गाए,तेरा यश नभ तक फैलाए॥

सूरज उगले आग

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* धरती तपती दाह-सी, सूरज उगले आग।सूख गए हैं अब सभी, हरे-भरे से बाग॥ शीत पवन चलती नहीं, लू का फैला राज।कण-कण में अब बस रहा, ग्रीष्म ऋतु का साज॥ गरम हवा चलती रही, धरती बनी कडाव।पशु पक्षी बेचैन हुए, मिले नहीं अब ठाँव॥ बरस रही है आग अब, आसमान … Read more

खुशियाँ भी आने से डरती

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ कहीं दूर चला गया,वह जो साथी था मेराअब सब ‘सूना’ हो गया,इसीलिए ‘खुशियाँ’ भी आने से डरती है यहाँ…। एक ‘सैलाब’ आया था ज़माने में,सब कुछ बहा कर ले गयाअपने थे, वह अब नहीं दिखाई देते हैं,इसीलिए ‘खुशियाँ’ भी आने से डरती है यहाँ…। ख़्वाब बहुत सजाए थे हमने,पर क्या … Read more