हिंसक राजनीति-लोकतंत्र पर बदनुमा दाग

ललित गर्गदिल्ली************************************** राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को हिंसक प्रतिस्पर्धा में नहीं बदला जा सकता, लोकतंत्र का यह सबसे महत्वपूर्ण पाठ पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस एवं अन्य राजनीतिक दलों को याद रखने की जरूरत है। पश्चिम बंगाल में इन दिनों पंचायत चुनाव के दौरान व्यापक हिंसा देखने को मिली, इससे पूर्व वर्ष २०१३ और १८ के पंचायत … Read more

देश-विदेश में हिन्दी का प्रतिष्ठापन हो

रत्ना बापुलीलखनऊ (उत्तरप्रदेश)***************************************** पृथ्वी के विराट रूप की कल्पना में जहाँ ओ$म की ध्वनि प्रतिध्वनित होती है, वह क्या है। हम लोगों की एक-दूसरे के प्रति भावनाओं का आदान-प्रदान ही तो है। हमारे वेद मंत्र, ऋचाएँ सभी का मूल संस्कृत भाषा है, जो स्वयं ही एक गीतात्मक लयात्मकता को धारण किए हुए है। इसी संस्कृत भाषा … Read more

हम पहनावे से आधुनिक माने जाएंगे या सोच से!

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* वैसे खान-पान, पूजा-पाठ कपड़ा पहनना ये सब व्यक्तिगत-निजता है, इसमें किसी को कोई विवाद-तर्क-समझाइश देने या करने की जरुरत नहीं है, पर जब मर्यादाओं की सीमाओं का उल्लंघन होता है तो पर उन पर प्रतिबन्ध लगाने की जरुरत क्यों पड़ती है ?आज खान-पान पहनावे पर बहुत अधिक चर्चा के साथ विवाद हो रहा … Read more

गाँवों का कायाकल्प

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* “बेटा सोमू! तुमने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली, रिजल्ट भी आ गया।अब तुम ज़ल्दी से कोई काम करने लग जाओ, तो मैं यह खेत साहूकार को सौंपकर तुम्हारे पास शहर आ जाऊँगा।” गाँव में रह रहे दीनू काका ने शहर में पढ़ रहे अपने बेटे को फोन पर कहा।“दद्दा! अब आप … Read more

वित्तीय क्षेत्र में डिजिटलाइजेशन आवश्यक

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)********************************************* प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी सब तरफ सुधार के पक्षधर हैं और वे न केवल सभी क्षेत्र में प्रचलित नियमों में भी सुधार हेतु सुझाव आमन्त्रित किए हुए हैं, बल्कि सभी सरकारी रिकॉर्ड का द्रुतगति से डिजिटलाइजेशन भी करा रहे हैं, इसलिए वित्तीय क्षेत्र विशेष रूप से शेयर निवेश से सम्बन्धित कुछ सुधार … Read more

विधवा विवाह:सामाजिक मान्यता मिले, यह धर्म-शास्त्र विरोधी नहीं

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी के अथक प्रयासों के फलस्वरूप भारत में १८५६ में विधवा (कल्याणी) विवाह को कानूनी मान्यता तो मिल गई है, पंरतु समाज में अभी भी इसकी पूर्णतः स्वीकार्यता नहीं है। कुछ रुढ़िवादी पुरातन पंथी लोग इसे धर्म और शास्त्र के विरूद्ध बताते हैं। परमेश्वर ने जब इस सृष्टि का … Read more

सच्चा साहित्यकार वही, जो डरे बिना राष्ट्र निर्माण में योगदान दे

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** साहित्यकार देश के निर्माण में सबसे अधिक सहायक होता है। उसके कंधों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। उसकी कलम बहुत कुछ कर सकती है। वह चाहे तो देश को उन्नति के शिखर पर पहुंचा दे और चाहे तो पतन के गर्त में गिरा दे। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में तो साहित्यकार को अपना … Read more

राकांपा की फूट से विपक्षी एकता को झटका

ललित गर्गदिल्ली************************************** वर्ष २०२४ के चुनाव से पूर्व भारतीय राजनीति के अनेक गुणा-भाग और जोड़-तोड़ भरे दृश्य उभरेंगे, महाराष्ट्र में ताजा राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए तो ऐसा ही लगता है। वहां जो हुआ है उससे विपक्ष में खलबली है, घबराहट एवं बेचैनी स्पष्ट देखी जा सकती है। जो पटकथा महाराष्ट्र में लिखी गई है, … Read more

‘गुरु’ नहीं, तो जीवन शुरू नहीं

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* गुरु पूर्णिमा विशेष… ‘गुरु पूर्णिमा’ के दिन को जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा भी काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। जैन धर्म में गुरु पूर्णिमा को लेकर यह मत प्रचलित है कि, इसी दिन जैन धर्म के २४वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने गांधार राज्य के गौतम स्वामी को अपना प्रथम शिष्य बनाया … Read more

सभी के साथ धर्म से परे समान व्यवहार जरूरी

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** समान नागरिक संहिता… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) पर खुलकर बात रखी और इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि सरकार जल्‍द ही इसको लेकर कानून ला सकती है। उनके अनुसार “परिवार में एक सदस्य के लिए एक कानून हो और दूसरे सदस्य के … Read more