स्वतंत्रता दिवस:बलिदानों की कहानी

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* स्वतंत्रता दिवस विशेष …….. १५ अगस्त २०२० को हमारा ७४ वाँ स्वतंत्रता दिवस है। प्रथम स्वतंत्रता दिवस १५ अगस्त १९४७ को मनाया गया था; जिसमें मैंने भी भाग लिया था। उस समय मैं कोई १० वर्ष का रहा होऊँगा और गाँव के विद्यालय की प्रथम कक्षा का विद्यार्थी। मुझे … Read more

‘पराधीनता’ अभिशाप,तो ‘स्वाधीनता’ वरदान

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* स्वतंत्रता दिवस विशेष …….. ‘पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं’-इस उक्ति का अर्थ होता है कि पराधीन व्यक्ति कभी भी सुख को अनुभव नहीं कर सकता है। सुख पराधीन और परावलंबी लोगों के लिए नहीं बना है। पराधीनता एक तरह का अभिशाप होता है। मनुष्य तो बहुत दूर,पशु-पक्षी भी पराधीनता में छटपटाने लगते … Read more

आधुनिक हिन्दी के संरक्षक राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन-प्रो. अमरनाथ

हिन्दी के योद्धा…… भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन का राजनीति में प्रवेश हिन्दी प्रेम के कारण ही हुआ। १७ फ़रवरी १९५१ को मुजफ्फरनगर ‘सुहृद संघ’ के वार्षिकोत्सव के अवसर पर टण्डन जी ने कहा था-“हिन्दी के पक्ष को सबल करने के उद्देश्य से ही मैंने कांग्रेस जैसी संस्था में … Read more

‘विश्वास’ सबसे बड़ी पूंजी

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* सनद रहे कि,विश्वास ही विश्वासघात की जननी होता है। दूसरे शब्दों में विश्वास पर धरती टिकी है। धरती पर आस्था है और आस्था जीवन है। जीवन संसारिक रिश्तों से संभव है।बात रिश्तों की करें तो रिश्ते अनेक प्रकार के होते हैं। जिनमें माता-पिता,बहन-भाई,दादी-दादा,नानी-नाना,बेटी-बेटा,धरा एवं राष्ट्र का रिश्ता प्राकृतिक … Read more

श्रीकृष्ण मोहिनी मूरत के बहुआयामी नायक

ललित गर्गदिल्ली ******************************************************************* जन्माष्टमी विशेष…….. श्रीकृष्ण का चरित्र अत्यन्त दिव्य,अलौकिक एवं विलक्षण है और उनका जन्मोत्सव का पर्व उससे भी अधिक दिव्य एवं विलक्षण है। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव-जन्माष्टमी पर हमें उनसे प्रेरणा लेकर जीवन को जटिल नहीं,सरल और सहज बनाते हुए मानवता के अभ्युदय के लिये पुरुषार्थी प्रयत्न करने चाहिए,तभी इस पर्व को मनाने की … Read more

राम पर प्रमं का अद्भुत भाषण,लेकिन…

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** अयोध्या में राम मंदिर के भव्य भूमि-पूजन का कार्यक्रम अद्भुत रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में जैसा पांडित्य प्रकट हुआ है,वह विलक्षण ही है। किसी नेता के मुँह से पिछले ६०-७० साल में राम और रामायण पर इतना सारगर्भित भाषण नहीं सुना। मोदी ने भारतीय भाषाओं में राम के बारे में … Read more

नई शिक्षा नीति और सामाजिक सोच में कितना तालमेल ?

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में कहा कि-“ये शिक्षा नीति सभी के परामर्श से तैयार की गई है। यह कोई सर्कुलर नहीं,बल्कि महायज्ञ है,जो नए देश की नींव रखेगा और एक नई सदी तैयार करेगा।” प्रधानमंत्री का यह भाषण उनके संवाद कौशल की ही ताजा कड़ी है। … Read more

हर साल बाढ़,अब समाधान करना होगा

शशांक मिश्र ‘भारती’शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ****************************************************************** जून से अब तक जब भी टी.वी. खोलो या किसी समाचार-पत्र पर नजर डालो-आज इतने बेघर इतने बहे और इतने मरे…पढ़ने अथवा सुनने को मिलता है। बड़े-बड़े व आधुनिक सुविधाओं शासन व्यवस्थाओं के लिए लोकप्रिय महानगर २-३ घण्टे की बरसात नहीं सह पाते। सड़कों पर पानी भर जाता है,नालियां बन्द होकर … Read more

अंग्रेजी पढ़ाई को स्वैच्छिक क्यों नहीं किया…कुछ प्रश्न

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** नई शिक्षा नीति-२०२०………. नई शिक्षा नीति का सबसे पहले तो इसलिए स्वागत है कि उसमें मानव-संसाधन मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय नाम दे दिया गया। मनुष्य को ‘संसाधन’ कहना तो शुद्ध मूर्खता थी। नरेंद्र मोदी सरकार को बधाई कि उसने इस मंत्रालय का खोया नाम लौटा दिया।पिछले ७३ वर्षों में भारत ने २ … Read more

पत्तों पर पानी डालने से कुछ नहीं बदलता,जड़ों का ही काम आएगा

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)*************************************************************** विश्व में जितनी संस्थाएं हिंदी की सेवा के लिए बनी हुई हैं,उतनी संस्थाएँ किसी अन्य भाषा के लिए नहीं हैं। जितने संवैधानिक प्रावधान,अधिनियम,नियम आदि और संसदीय समिति सहित तरह-तरह की समितियां,संगठन और हिंदी के विकास व प्रसार के लिए संघ सरकार और विभिन्न राज्यों में भाषा के लिए पूरे विभाग,देश के … Read more