धन्य है! आज की संतान
तारा प्रजापत ‘प्रीत’रातानाड़ा(राजस्थान) ****************************************** धन्य है!आज की संतान,जिन्हें माँ-बाप नेअपने सुखों का,बलिदान देकरपढा-लिखा कर,अपने पैरों परखड़ा किया।जिन माँ-बाप ने,उन्हें भाई-बहनघर-परिवार दिया,वही सन्तानआज कहती है कि,-उनके घरआने-जाने से,उनकी गृहस्थी‘डिस्टर्ब’ होती है।तुम्हें अपने बच्चे,कितने प्यारे लगते हैंतुम्हारे माँ-बाप ने भी,तुम्हें इतने हीप्यार-दुलार से,पाला होगा।आज माँ-बाप,भाई-बहन से ज़्यादासास-ससुर,साले-साली,प्यारे लगते हैं।उनके ससुराल वाले,उनके माँ-बाप कोअपमान भरे,शब्द कह जाते हैं,पर वो … Read more