जीवन का शब्द चित्र प्रस्तुत करती है कविता

काव्य गोष्ठी…. इंदौर (मप्र)। साहित्य समाज का दर्पण है। समाज में घटित प्रत्येक घटना का प्रतिबिम्ब कविता में परिलक्षित होता है। कविता समाज के प्रत्येक रंग को ग्रहण कर जीवन का शब्द चित्र प्रस्तुत करती है। जीवन को नैराश्य के अंधेरे से निकालकर आशा के प्रकाश की ओर ले जाती है।यह विचार नगर के वयोवृद्ध … Read more

सुहाना सफर

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** अगर साथ हो तुम सफर है सुहाना।हो पास जब तक सफर है सुहाना॥ पतझड़ नहीं है बहारों का मौसम,अंधेरों में जगमग सितारों का मौसम।मुहब्बत का गायेंगे मिल कर तराना,अगर साथ हो तुम सफर है सुहाना…॥ हर दिन ही होगी दिवाली औ होली,सुनूँगा तेरी प्यारी प्यारी-सी बोली।चलेगा नहीं कोई भी तब बहाना,अगर … Read more

मन के मनके एक सौ आठ

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* रचना का हस्ताक्षर-भाग ५….. आलोचक महाशय कुछ दिनों बाद आज फिर हमसे मुलाकात करने आए। आलोचक को यह कविवर भा गए थे,क्योंकि कविवर आलोचक की बात को बीच-बीच में काटते नहीं थे,जिरह भी नहीं करते थे। कुल मिलाकर नौसिखिया कविवर को पाकर आलोचक भी चित्त से प्रसन्नचित्त थे। अन्यथा तो अनुभव … Read more

भाषा बोलें प्रेम की

अनिल कसेर ‘उजाला’ राजनांदगांव(छत्तीसगढ़)************************************ भाषा बोलें प्रेम की,बैरी बनते मीत।प्रेम भाव सब में रहे,जग की हो यह रीत॥ भाषा कोई भी रहे,करें सभी सम्मान।भाषा हिंदी देश की, हमको है अभिमान॥ भाषा ऐसी बोलिए,जो मन को ले जीत।सत्य वचन हम बोलते,यही हमारी रीत॥ कड़वी भाषा छोड़ दें,मीठे-मीठे बोल।पत्थर भी तो खिल उठे,बन जाये अनमोल॥ भाषा संस्कृत ही … Read more

आज़ादी का अमृत घट

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ ७५ बरस की आजादी का अमृत और हम सपर्धा विशेष…. १८५७ के काल खंड से प्रारम्भ हुए १९४७ तक चले समुद्र मंथन में निकले आज़ादी के अमृत घट को लूटने के लिए राहु-केतु जैसे दानव ( देशद्रोही ) भी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे थे। मंथन करते-करते एक दिन वह क्षण भी आ … Read more

कहते अमृत आजादी को

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** ७५ बरस की आजादी का अमृत और हम सपर्धा विशेष…. पचहत्तर वर्षों से वादी।में है भारत की आजादी॥अमृत का मंथन कर लाये।प्राण लुटा कर अपने आये॥ थी वर्षों की बनी गुलामी।अपमानों की हुई सलामी॥जालिम बने रहे सब शासक।मानवता के थे वो नाशक॥ राज किया मुगलों ने पहले।शासक ब्रिटिश बने … Read more

यादों की दौलत

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* भीगी-भीगी मीठी-मीठी ठण्ड है आई,सौंधी-सौंधी-सी महक फ़िजा में है छाई।तुमने मेरी रूह में ऐसी अलख है जगाई,तेरी यादों की दौलत धड़कनों में है समाई॥ परिचय–उत्तराखण्ड के जिले ऊधम सिंह नगर में डॉ. पूनम अरोरा स्थाई रुप से बसी हुई हैं। इनका जन्म २२ अगस्त १९६७ को रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) … Read more

कयामत

प्रीति शर्मा `असीम`नालागढ़(हिमाचल प्रदेश)******************************************** उस रोज़ कयामत दबे पाँव मेरे घर तक आई थी,इंसान का,मानता हूँ…कोई वजूद नहीं,उस रब ने साथ मिलकर मेरी हस्ती मिटाई थी।उस रोज़ कयामत… शगुन-अपशगुन की,कोई बात ना आई थी,समझ ही ना पायाकिसने नज़र लगाई,किसने नज़र चुराई थी।उस रोज़ कयामत… ना दुआओं ने असर दिखाया,ना ज्योतिषी कोई गिन पायाना हवन-पूजन काम … Read more

वंदन

डॉ. आशा मिश्रा ‘आस’मुंबई (महाराष्ट्र)******************************************* काँटों की परवाह नहीं जब साथ अगर हो फूलों का,कठिन राह में प्रभु हों संग में भय फिर क्या शूलों का।वंदन करती अंधकार में प्रकाश बनकर राह दिखाना-सबका जीवन सुख से भर दें पेंग लगा के झूलों का॥ परिचय–डॉ. आशा वीरेंद्र कुमार मिश्रा का साहित्यिक उपनाम ‘आस’ है। १९६२ में … Read more

दिल जले

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** डूबकर तुझमें हम,क्या से क्या बन गएतेरे नाम से हम,आज फिर जोड़ दिए गएदेखने वालों के,फिर से होश उड़ गएतेरी-मेरी मोहब्बत से,दिल जले,जल गए। खुशनसीब तुम हो,खुशनसीब हम हैंजो तुम्हें हम मिले,या मुझे तुम मिलेक्योंकि सौ दिल,फिर से खिल जो उठेऔर मोहब्बत के दीप,फिर से जलने लगे। दिल की धड़कनों में,जो बस … Read more