मन के मनके एक सौ आठ
शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* रचना का हस्ताक्षर-भाग ३….. आलोचक महोदय कवि के समक्ष आज फिर उपस्थित हो गए। वह भी क्या करते ? उनसे कविवर की अर्थ सिकुड़ अर्थात धन की कमी न देखी जा रही थी। आलोचक कभी कविवर के घर की जालों से भरी छत देखते,तो कभी कई बरस पहले एशियन पेंट की … Read more