मन के मनके एक सौ आठ

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* रचना का हस्ताक्षर-भाग ३….. आलोचक महोदय कवि के समक्ष आज फिर उपस्थित हो गए। वह भी क्या करते ? उनसे कविवर की अर्थ सिकुड़ अर्थात धन की कमी न देखी जा रही थी। आलोचक कभी कविवर के घर की जालों से भरी छत देखते,तो कभी कई बरस पहले एशियन पेंट की … Read more

माँ दे स्नेह समान

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* ईश्वर का अवतार सार माँ,जीवन का आधार।निर्मल ममता नित्य बाँटती,देती निश्छल प्यार॥ नित्य करे परिवार सुरक्षा,अनुपम सारे काम,भाव धरे हर क्षण सेवा का,माँ ही चारों धाम।पालन का नित्य श्रेय उठाती,इससे ही उद्धार,ईश्वर का अवतार सार माँ,जीवन का आधार…॥ जीव धरे नौ माह कोख पर,मिले जन्म से नाम,दुग्ध धार से तृप्त करे … Read more

काश! तुम्हें भूल पाती

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* क्यों बांधे हुए रखे हो मुझको,तुम झूठे दिल की जंजीरों मेंक्यों नहीं करते मुझे आजाद,अब मत बांधे रखो जंजीरों में। बहुत इन्तजार किया था मैंने तेरा,मगर तुम हो दिल के सौदागरभंवरे हो तुम लूटा है दिल मेरा,मंडराते इस डाल से उस डाल पर। प्रीत की दुनिया से मैं थी अनजान,जब तुम … Read more

किसानों की नैतिक जीत,मोदी का सियासी दांव…!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुरू नानक जयंती और देव दिवाली पर उनकी सरकार द्वारा देश में लागू ३ विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा,इन कानूनों के खिलाफ सालभर से आंदोलन कर रहे किसानों की नैतिक जीत तो है ही,साथ में यह प्रमं श्री मोदी का दूरगामी राजनीतिक दांव भी है। … Read more

मेला

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)**************************************** मेला यह संसार है,आते-जाते लोग।चार दिनों की जिंदगी,सहते सभी वियोग॥सहते सभी वियोग,एक दिन सबको जाना।कर ले नेकी काज,यहाँ कुछ नाम कमाना॥कहे ‘विनायक राज’,लगे है रेलम-पेला।कठपुतली-सी चाल,जमाना देखे मेला॥

सच पूछो तनहाई है

नरेंद्र श्रीवास्तवगाडरवारा( मध्यप्रदेश)**************************************** दिल-दिमाग में जबसे दौलत,कूट-कूट कर छायी है।भीड़ भले ही आसपास है,सच पूछो तनहाई है॥ प्रतिस्पर्धा ये रेगिस्तानी,दौलत की मृगमरीचिका।तपते रिश्ते सूख रहे हैं,पता नहीं है पानी का॥प्रतिस्पर्धा को छोड़ें,बदलें,पर करे कौन अगुवाई है।भीड़ भले… ठाठ-बाट के साधन इतने,आकर्षित बाजार किये।‘सब-कुछ’ से झट घर भर लेवें,जागी आँखें स्वप्न लिये॥अहं भरा दीवानापन ये,इसकी ना … Read more

प्रेरणा

डॉ. आशा मिश्रा ‘आस’मुंबई (महाराष्ट्र)******************************************* जब तक साँस है…तब तक आस है,ज़िंदगी होती बस इतनी हीं ख़ास हैजी लो हर लम्हा…बना दो यादगार,बाँटो ख़ुशियाँ…कर लो सबसे प्यार। हो न कभी हैरान,ना किसी से परेशान,मुस्कुरा कर दूर भगा जीवन की उलझनेंछोड़ दे अब रूठना या किसी को मनाना,ख़ुद से ख़ुद की यहाँ कर ले बस पहचान। … Read more

महके रजनीगंधा बनकर…

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** वो नैन बसी प्यारी-प्यारी,मुख सांवला-सलोना है।महके रजनीगंधा बनकर,मन का कोना-कोना है॥ तुम संग चाँद रजत रुपहली,नथ मेरे नगीने लगेपीत सूरज जुड़े पर मेरे,फूल कनेर जैसे सजे।तुम सँग हँसी के फूल झरते,तुम बिन अंसुवन रोना है।महके रजनीगंधा बनकर,मन का कोना-कोना है…॥ उपवन खिलता चारों मौसम,मन मधुकर गुन-गुन करतेतुम होते सावन ही सावन,मन भीतर … Read more

बुढ़ापा

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)***************************************** जिंदगी का सच,सुबह आईने में देखाखुद ही का चेहरा,कितना बदल चुका।मन के भाव आज जवान,चेहरे पड़ी झुर्रियों कोढांकने की कोशिश,बालों को काला करकेयुवाओं की होड़ में,शामिल होने की ललक मेंथक चुके कई इंसान।ऐसा लगता बुजुर्गी का,मानो कोई इम्तिहान होआवाज में कंपन,घुटनों में दर्दमानो सब खेल मुँहमोड़ चुके।बतियाने को रहा गया,अनुभवों का खजानाऔर … Read more

झूठ

डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’रायपुर(छत्तीसगढ़)******************************************* बात करो तुम सत्य ही,झूठ कभी मत बोल।मिथ्या भाषा छोड़ तू,वाणी है अनमोल॥ सत्य झूठ में भेद अति,करलो सच पहचान।जीवन में हो सत्यता,बनो श्रेष्ठ इंसान॥ झूठा बनकर सामने,खड़ा हुआ हूँ शांत।गलत लगा आरोप है,उससे मन है क्लांत॥ चमक-दमक की होड़ में,सभी रखे अरमान।छोटी-छोटी बात पर,बना झूठ है शान॥ क्षणिक खुशी के … Read more