जीना सीख लिया

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** धूप में,छाँव मेंअपनों से दुराव में,जीना सीख लिया। हार में,जीत मेंया हो प्रीत में,हँसना सीख लिया। अपनों के संग,परायों के संगया हो एकांत,रहना सीख लिया। सुख में,दु:ख मेंया हो भूख में,मुस्कुराना सीख लिया। घर में,बाहर मेंया हो कहर में,शान्त रहना सीख लिया। सत्य में,शांति मेंया हो क्रांति में,सहयोग देना सीख … Read more

आज की आधुनिकता…

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** आज के दौर कादोस्तों क्या हाल है,आधुनिकता के नाम परबेशर्मी का ये दौर हैन अदब न शर्म और न ही,बची संस्कृति और सभ्यताइसे ही कहते हैं लोग,आज की आधुनिकता।आज की आधुनिकता….।। तू है प्रभु का दासतो क्यों है उदास,जब प्रभु का हैतेरे सिर पर हाथ,तो क्यों रहता हैबंदे तू उदास,इस दौर में … Read more

मन्द सुगन्ध महके

संदीप धीमान चमोली (उत्तराखंड)********************************** मन्द सुगन्ध,महके रात्रि गंध,खोल दे श्वांस जिसकी हो बंदहरसिंगार कहो,कहो परिजात,पुष्प विशिष्ट धरा मात्र है चंद। पड़ जाएं जो गल बन माला,सोलह श्रंगार पड़े आगे मंद,परिजात-सा ले आएं स्वर्ग धरा,नासा छिद्र खुल जाएं पड़े बंद। देव पुष्प देवों का प्यारा,इत्र-सा महका दे संसार जो साराऔषधीय गुणों से है भरपूर,धनवंतरि का वो सबसे … Read more

बहला जाते हो

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** बोझिल दिन बहला जाते हो,नूर अजब नहला जाते हो। हम जब भी तन्हा होते हैं,तुम चुपके से आ जाते होनम बरसातों भून करारा,यादों को पकड़ा जाते हो। कानों में सरगोशी करते,बालों को सहला जाते होना खोलो जुम्बिश हाथों की,ख्यालों में झुला जाते हो। जब जाने की बातें करते,नाज़ुक दिल दहला जाते होबोलो जब … Read more

इक दफा देखिए

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* इक दफा पलकें उठा के मुझको देखिए,इक दफा पलकें गिरा के मुझको देखिए।इन आँखों में मेरी कौन है तुम्हारे सिवा-इक दफा नज़रें मिला के मुझको देखिए॥ परिचय–उत्तराखण्ड के जिले ऊधम सिंह नगर में डॉ. पूनम अरोरा स्थाई रुप से बसी हुई हैं। इनका जन्म २२ अगस्त १९६७ को रुद्रपुर (ऊधम … Read more

अनमोल पल

नरेंद्र श्रीवास्तवगाडरवारा( मध्यप्रदेश)**************************************** हम,जीअपनी जिंदगी रहे हैं,परहमारी नजर,औरों की जिंदगी पर हैयही प्रतिस्पर्धा है…घुड़दौड़ है। जो,न हमेंसुबह होने का,आभास कराती हैऔर न ही,शाम ढलने का। हम आलसी,भले ही नहीं रहेमगर,संतोषी भी नहीं हैं। और…और…और,अनगिनत आंकाक्षाओं के वशीभूतहम अतृप्ति का बोझ लिए,अर्जन करने मेंजुट गए हैं,अतिरिक्त…अनावश्यक। और खपा रहे हैं,जिंदगी के वे अनमोल पलजो हमें मिले … Read more

जीवन के दस्तूर

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** हमराह नहीं मिलता कोई भी रहगुज़र मेंहर राह अलग होती जीवन के इस सफर में। मन्जिल तो रहा करती पहले से तयशुदा पर,राही को ही तय करना चलना है किस डगर में। राही न कभी चाहे मन्जिल पे पहुंचना पर,दस्तूर हैं कुदरत के सबके लिए सफर में। हर अगला … Read more

अपना-पराया

श्रीमती चांदनी अग्रवालदिल्ली***************************** हम सबने परिवारों की बातचीत में अक्सर सुना है कि अपना तो अपना ही होता है। पराया अपना नहीं हो सकता। मुझे तो ऐसा लगता है कि जिस व्यक्ति से हमारा मन मिल जाता है,वह अपना-सा लगने लगता है। दूसरी ओर कोई अपना निकट का होकर भी पराया लगता है।अभी पिछले महीने … Read more

जब से बदरा जल बरसाये

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************** चैतन्य तरुण हो गयी धरा,जब से मेघा जल बरसाये।कोयल ने राग विरह छोड़ा,मल्हार राग फिर दुहराये॥ धरती मल मैल क्षरण करके,देखो नव यौवन पाया है,नदियों ने पानी ढो-ढो कर,सागर का मन दहलाया है।हरियाली है सब हरा-भरा,ऊपर से मेघ दूत छाये,अवनी की कोख हरी करने,मेघा आये मेघा आये॥ बंजर का मंजर टूट … Read more

कल्याणी का दर्द

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* सच कहती हूँ मैं,आत्मा काँप जाती है,आँखें भर जाती है,जब उनके विषय में चर्चा सुनती हूँ। क्या विचार,व्यवहार है उस कल्याणी (विधवा) नारी के प्रति। मित्रों छोटी-सी बिटिया,नहीं जानती है कल उसके संग क्या होने वाला है,क्या सुनने वाली है। बिटिया बड़ी हो गई,धूमधाम से ब्याह  रचाया गया और दिल खोलकर … Read more