हवा भी छूने लगी नदी का बदन
नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* हवा भी हौले से छूने लगी नदी का बदन,लहरों में भी होने लगी हलचल जैसे मेरे दिल ने महसूस की सूरज की पहली किरण,नदी में हलचल उठने लगी सजीव सी। उसका हृदय झंकृत हुआ, हुआ अजीब-सा,ऐसी मचली कि मदमस्त हो गई पागल-सी उसकी धाराएँ कभी लातीं मुस्कान, हँसने-सी,नदी यह चली हवाओं … Read more